बच्चों में कॉन्फिडेंस डेवलप करना है, तो न करें ये पेरेंटिंग मिस्टेक्स
कई बार ये देखा गया है की कोई बच्चा बहुत इंटेलीजेंट होता है | उसकी बात सही होने पर भी वो उसे ठीक तरह से सबके सामने नहीं रख पाता है |
Raising Confident Kids: हर बच्चे के फिज़िकल और मेंटल डेवलपमेंट के लिए बहुत-सी चीज़ें मायने रखती हैं। उसका खानपान, परवरिश का तरीका, आसपास का माहौल और इन सबमें सबसे जरुरी है उसका आत्मविश्वास, जिस पर उसकी ग्रोथ पूरी तरह से निर्भर है। कई बार ये देखा गया है की कोई बच्चा बहुत इंटेलीजेंट होता है। उसकी बात सही होने पर भी वो उसे ठीक तरह से सबके सामने नहीं रख पाता है। इसकी वजह है उसमें कॉन्फिडेंस की कमी होना।

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे का कॉन्फिडेंस लेवल हमेशा अच्छा बना रहे, लेकिन इस वजह से हम कई बार बच्चों पर इतना प्रेशर बना देते हैं कि उनका रहा सहा कॉन्फिडेंस भी कम होता चला जाता है। बच्चों को गलत तरीके से हैंडल करने से उनका आत्मविश्वास कमज़ोर हो जाता है। इसके लिए पेरेंट्स को बच्चों को अच्छी तरह से डील करना चाहिए, ताकि आगे चलकर बच्चा अपने मन की बातें उनसे या किसी से भी शेयर कर पाए। अपनी बात किसी के भी सामने पूरे कॉन्फिडेंस से रख पाए। आइये जानते हैं कुछ टिप्स जिन पर काम करके पेरेंट्स बच्चों का कॉन्फिडेंस बूस्ट अप करने में मदद कर सकते हैं।
अंडर कॉन्फिडेंस का टैग देना

पेरेंटिंग यानी कि पेशेंस। बच्चों का मन बहुत कोमल होता हैं। वो जैसा व्यवहार अपने आसपास होता देखते हैं, वैसे ही ढल जाते हैं। उन्हें लगने लगता है कि शायद यही तरीका है व्यवहार करने का, प्रतिक्रिया देने का। बहुत से लोग ये सोचते हैं कि अगर वो बच्चों को किसी से अंडर कॉंफिडेंट का टैग देंगे, तो बच्चे इस से अपने आप को चेंज करेंगे लेकिन ऐसा नहीं है। आपके इस तरह के व्यवहार से बच्चों के मन में नेगेटिविटी आती है। वो सोचने लगते हैं कि शायद वो कभी कॉन्फिडेंट बन ही नहीं पाएंगे। आपको बच्चों के आसपास एक पॉजिटिव माहौल क्रिएट करना है, जिससे बच्चा सेल्फ मोटिवेट होकर सुपर कॉन्फिडेंट बन जाएगा।
एक चीज़ को बार-बार न दोहराएं

जिस तरह हम बड़ों को बार-बार एक ही चीज़ पर बात करना या सुनना पसंद नहीं होता है, ठीक उसी तरह से बच्चे कभी पसंद नहीं करते कि एक ही चीज़ उनको बार-बार समझाई जाए या पेरेंट्स एक ही चीज़ को लेकर उन्हें बार-बार फ़ोर्स करें। इस तरह से बच्चा जिद्दी बन जाता है, वो हमारी बातें मानना तो दूर सुनना भी बंद कर देते हैं। प्यार से खेल-खेल में उन्हें एक या दो बार ही समझाएं, तो बच्चे उस बात पर गौर करते हैं। बार-बार एक ही बात दोहराई जाए, तो उस बात की कोई वैल्यू नहीं रह जाती हैं।
दूसरों से तुलना कर कमियां ना गिनाएं

कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता हैं। सबके अंदर कोई ना कोई कमी होती ही हैं। कैसा लगेगा जब आपको कोई आपकी कमियां बार-बार गिनाएं। इसी तरह से बच्चों के सामने अगर उनकी कमियां बार-बार बताई जाएं, तो उन्हें भी अच्छा नहीं लगेगा , बल्कि ऐसा करने से वो चिड़चिड़े होकर अंडरकॉन्फिडेंट फील करने लगेंगे। बच्चों के साथ पॉजिटिव रहे और प्यार से मोटिवेट करके उन्हें समझाएं।
