How To Increase Self-reliance: आत्मनिर्भरता (Self-reliance) और सेल्फ कॉन्फिडेंस कोई वस्तु नहीं है, जिसे आप अपने बच्चों को उनके जरूरत के समय खरीद कर दे दें। आत्मनिर्भरता और सेल्फ कॉन्फिडेंस एक प्रक्रिया है, जिसे समय के साथ धीरे-धीरे पेरेंट्स को अपने बच्चों में डेवलप करना होता है पर सवाल यह है कि पेरेंट्स किस तरह अपने बच्चों में आत्मनिर्भरता को बढ़ा सकते हैं। कैसे उनकी परवरिश करें कि बड़े होने पर बच्चों के अंदर कॉन्फिडेंस की कमी ना हो। इस आर्टिकल में आपको कुछ टिप्स बताए जा रहे हैं, इसके उपयोग से आप अपने बच्चों के अंदर सेल्फ-रिलायंस और सेल्फ कॉन्फिडेंस को डेवलप कर सकते हैं आईए जानते हैं;
बच्चों को प्यार से करें हैंडल
बच्चे जब सीखने की प्रक्रिया में होते हैं तो वह बहुत सी गलतियां करते हैं। उस समय उन्हें प्यार से हैंडल करने की जरूरत होती है। अगर पेरेंट्स बच्चों के बचपन में उनसे परफेक्शन की उम्मीद करके उनकी गलतियों के लिए डांटे हैं या गुस्सा करते हैं तो बच्चा नए काम को सिखाने में रुचि दिखाना कम कर देता है और धीरे-धीरे उसके अंदर कॉन्फिडेंस की कमी आने लगती है। इस कमी को दूर करने के लिए पेरेंट्स कुछ बिंदुओं पर ध्यान दें सकते हैं;
बच्चों से परफेक्शन की उम्मीद के बिना कार्य को करने दें।
गलती होने पर उन पर चिल्लाने की बजाय प्यार से समझाएं, उन्हें उनकी गलती सुधारने में मदद करें।
एक ही बार में किसी कार्य को सीखने पर जोर ना दें, हर रोज थोड़ा-थोड़ा सिखाएं।
बच्चों के साथ रहें सकारात्मक
बच्चों का मन बहुत नाजुक होता है। वह आपके नकारात्मक शब्दों से भी दुखी हो सकता है। अगर आप अपने बच्चों के साथ नकारात्मक शब्दों का अधिक प्रयोग करते हैं तो यह आपके बच्चे में नेगेटिविटी को बढ़ाता है साथ ही उनके अंदर डर को भी बढ़ता है। यही डर बच्चों को अपने आप को एक्सप्रेस करने से रोकता है और उनके व्यक्तित्व को दब्बू बनता है। पेरेंट्स किस तरह अपने बच्चों को इस डर से बचा सकते हैं;

अपने बच्चों से बात करते समय सकारात्मक शब्दों का प्रयोग करें।
बच्चों की गलतियों को बताएं, पर उससे पहले उनकी कोशिशें की सराहना करें।
बच्चों से कहें, कोशिश करने पर वह किसी भी कार्य को सीख सकते हैं।
बच्चों को लेने दें अपने निर्णय
पेरेंट्स के तौर पर बच्चों की देखभाल करना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा बच्चों के सभी कार्य करना या उनके सभी निर्णय लेना गलत है। पेरेंट्स के इस तरह के बरताव से बच्चों में निर्णय लेने की क्षमता का विकास नहीं होता है। ऐसे में पेरेंट्स इन बिंदुओं पर ध्यान दें सकते हैं;
उम्र के अनुसार बच्चों को अपने कार्य करने दें।
क्या पहनना है, क्या खाना है, कब खेलना है, कब पढ़ना है, इत्यादि जैसे कार्यों के रोजाना के छोटे-छोटे निर्णय बच्चों को खुद लेने दें।
घर के छोटे-मोटे कार्य में उनकी राय लें और उसको महत्व दें।
बच्चों को सिखाएं हार से डारे ना
अगर आप अपने बच्चों को सिर्फ जीतने की परिभाषा के साथ बड़ा कर रहे हैं तो आप अपने बच्चों को जीवन जीने की अधूरी परिभाषा सीख रहे हैं, क्योंकि जीवन में हारने की परिभाषा भी सिखाना जरूरी है। अगर आपका बच्चा हार के बाद भी प्रयास करने के लिए तैयार है तो वह आत्मनिर्भर है। क्या कर सकते हैं पेरेंट्स, अपने बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए;
अपने बच्चों को प्रयास करने के महत्व को समझाएं।
जितने से ज्यादा सिखाना जरूरी है, बच्चों को यह बात सिखाएं।
आप कर सकते हैं, बस एक प्रयास की जरूरत है। बच्चों से यह शब्द जरूर कहें।
हारना बुरी बात नहीं है, प्रयास न करना बुरा है। यह बात बच्चों को कहें।
आत्मनिर्भरता और सेल्फ कॉन्फिडेंस जीवन में छोटे-छोटे प्रयासों के साथ ही बढ़ाया जा सकता है। जब आप शुरू से छोटे-छोटे प्रयास करते हैं तब ही एक दिन आपको बड़ा रिजल्ट मिलता है।
