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पैरैंट्स
हर पैरैंट्स का यह प्रयास होता है कि उन के बच्चे का पालनपोषण सर्वश्रेष्ठ हो। एक बच्चे की परवरिश करना दैनिक जीवन की प्रक्रिया से कहीं अधिक उत्तरदायित्व है। यह एक ऐसा कार्य है, जिसे प्रत्येक पैरेंट्स बहुत स्नेहपूर्ण व समर्पण भाव से करते हैं। आज के समय में पैरैंट्स अपने बच्चे को बेहतर जीवन देने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं और इसके लिए बच्चे को मेड के भरोसे व अकेले छोड़ने को भी तैयार रहते हैं। ऐसे में वे बच्चे को पर्याप्त समय नहीं दे पाते, पर अफसोस करने की जरूरत नहीं, आप बस कुछ खास बातों का ध्यान रखकर अपने बच्चे के अकेलेपन को दूर कर सकते हैं और ये खास बातें बता रही हैं सेमफोर्ड स्कूल की फाउंडर डायरैक्टर मीनल अरोरा। 
 
अकेले बच्चे को दें क्वालिटी टाइम
 
अपने बच्चे के साथ इमोशनल अटैचमैंट होना नेचुरल है, लेकिन हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि केवल इमोशनल होकर सोचने से कुछ हासिल नहीं होगा। बच्चे के उज्ज्वल भविष्य के लिए उस की हेल्थ, डाइट, एजूकेशन और इमोशनस डेवलपमेंट पर ध्यान देना बहुत जरूरी है और यह तभी संभव है जब आप बिना किसी अफसोस के अपने बच्चे के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं।इस के लिए यह जरूरी नहीं कि आप 24 घंटे अपने बच्चे के पास रहें, बल्कि उस के साथ जितनी भी देर रहें, प्यार भरी देखभाल के लिए समय जरूर निकालें। बदलते वक्त की जरूरतों को स्वीकार करते हुए उसी के अनुकूल अपने बच्चे को बेहतर परवरिश दें अगर उस के उज्जवल भविष्य के लिए उसे अकेले भी छोड़ना पडे़ तो अकेले छोड़ने से पहले कुछ खास बातों का ध्यान जरूर रखें और ये खास बातें हैं ये-
 
खास बातें –
  • बच्चे की ऐज एवं मैच्युरिटी का ध्यान रखें। बच्चे की उम्र 7 साल से कम नहीं होनी चाहिए।
  • 11-12 साल के बच्चों को कुछ घंटों के लिए घर पर अकेले छोड़ा जा सकता है और वो भी सिर्फ दिन के समय।
  • बच्चों पर नजर रखने के लिए पड़ोसियों की सुरक्षा एवं सहयोगी पड़ोसियों की उपलब्धता और सब से महत्वपूर्ण जब बच्चे को घर पर छोड़ा जाए तो वह वहां सुरक्षित महसूस करें।
  • यदि आप अपने बच्चे को घर में छोड़ने के लिए खुद को बिल्कुल अनुकूल पाते हैं, तो उन की अत्यधिक सुरक्षा के लिए निम्न उपायों को जरूर अपनाएं।
 
सुरक्षा के उपाय
 
  • अगर आप का बच्चा घर पर अकेला रह रहा है तो उसे पूरा नाम पता और कौंटैक्ट डिटेल्स याद कराना शुरू करें और उन्हें खिड़कियों और दरवाजों के तालों के बारे में भी जानकारी दें, यही नहीं उन्हें बड़ों की अनुपस्थिति में गैस, स्टोव, इलैक्ट्रिक या अन्य धारदार वस्तुओं पर काम करने की कतई अनुमति न दें। इस के अतिरिक्त उन्हें आप की मंजूरी के बिना आस-पड़ोस के घर में नहीं जाने का निर्देश दें।
  • उन्हें इमरजैंसी की स्थिति में पड़ोस में एक ‘सेफ हाउस’ के बारे में बताएं, यही नहीं, फोन पर इमरजैंसी नंबर्स, स्थानीय अथवा दूर के रिश्तेदार के नंबरों की सूची बना कर उन्हें दें।
  • अपने-अपने पड़ोसी को अपनी अनुपस्थिति के बारे में सूचित करें और उन से नियमित बच्चों की देखरेख के बारे में कहें।
  • बच्चों की भलाई और सुरक्षा हमरे लिए सब से अधिक महत्वपूर्ण होनी चाहिए। इस के लिए बच्चों को घर में छोड़ने के दौरान कुछ गाइडलाइंस को ध्यान में रखना चाहिए ताकि उन्हें पूरी सुरक्षा दी जा सके। हमेशा ध्यान रखें कि बच्चे दुनिया के सब से कीमती संसाधन हैं और भविष्य के लिए उम्मीद की सब से उज्जवल किरण, उन्हें प्यार कीजिए खुश रहिए, उन की सरुक्षा कीजिए।
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