Ayurvedic Home Remedies for Fever
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Overview:

मुनचूसन सिंड्रोम कई प्रकार का हो सकता है। इसमें जरूरी नहीं है कि इंसान अपने आप को ही पीड़ित बताए।

Munchausen Syndrome Symptoms: हर घर-परिवार, दोस्त-रिश्तेदार में कोई न कोई ऐसा शख्स जरूर होता है जो हर समय बीमार रहता है। जबकि डॉक्टर कहते हैं कि उन्हें कोई बीमारी ही नहीं है और वे एकदम फिट हैं। यानी बीमार नहीं होने पर भी वह हमेशा यही कहते हैं कि ‘मैं तो बहुत बीमार रहता या रहती हूं’। इसका असल कारण है एक सिंड्रोम, जिसे ‘मुनचूसन सिंड्रोम’ नाम दिया गया है। यह सिंड्रोम किसी उम्र से नहीं जुड़ा है, हालांकि बुजुर्गों में यह ज्यादा पाया जाता है। आइए जानते हैं क्या है मुनचूसन सिंड्रोम।

जानिए आखिर क्या है मुनचूसन सिंड्रोम

Munchausen Syndrome Symptoms-मुनचूसन सिंड्रोम एक प्रकार का काल्पनिक और मानसिक स्वास्थ्य विकार है।
Munchausen syndrome is a type of fantasy and mental health disorder.

मुनचूसन सिंड्रोम एक प्रकार का काल्पनिक और मानसिक स्वास्थ्य विकार है। इस सिंड्रोम से पीड़ित शख्स स्वस्थ होने पर भी जानबूझकर ऐसा व्यवहार करता है जैसे कि उसे कोई शारीरिक या मानसिक बीमारी है। वह बीमारों की तरह व्यवहार करता है और बार-बार लोगों को बताता है कि वह बहुत बीमार है। जबकि ऐसा वह मानसिक विकार के कारण करता है और खुद भी कई भावनात्मक परेशानियों का सामना करता है।
इस सिंड्रोम से पीड़ित लोग अधिकांश तौर पर बुखार, पेटदर्द, सिरदर्द, सीने में दर्द जैसी समस्याएं बताते हैं।

कई प्रकार का होता है यह सिंड्रोम

मुनचूसन सिंड्रोम कई प्रकार का हो सकता है। इसमें जरूरी नहीं है कि इंसान अपने आप को ही पीड़ित बताए। कई बार बच्चों या बुजुर्गों की देखभाल करने वाला शख्स दूसरों का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए या सहानुभूति लेने के लिए आश्रितों के लिए भी झूठी ​बीमारी का दिखावा करने लगता है। इसमें 6 साल के बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल होते हैं। यह ‘फैक्टिटियस डिसऑर्डर इंपोज्ड ऑन अदर’ यानी एफडीआईए की श्रेणी में आता है। जिसमें दूसरों पर बीमारी धोपी जाती है। हालांकि इस सिंड्रोम को ‘मुनचूसन सिंड्रोम बाय प्रॉक्सी’ नाम दिया गया है। कई बार यह सिंड्रोम इतना गंभीर हो जाता है कि देखभाल करने वाला शख्स आश्रित में वास्तविक लक्षण पैदा करने की कोशिश तक कर बैठता है।

लोगों का ठगने का जरिया भी बन रहा

मुनचूसन सिंड्रोम अब लोगों को ठगने का तरीका भी बन गया है। कई बार सेहतमंद लोग सोशल मीडिया या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खुद की झूठी बीमारी की जानकारी देकर मदद मांगते हैं। कई बार वे खुद को दूसरों की सेवा करने वाला बताकर लोगों से वित्तीय मदद मांगने लगते हैं। ऐसे लोग अपने दर्द को इस प्रकार बताते हैं कि लोग उनकी मदद को आगे आ जाते हैं और ठगी का शिकार हो बैठते हैं। कुछ लोग बीमा लेने के लिए, नौकरी बचाने के लिए, कामचोरी करने के लिए भी इस सिंड्रोम का सहारा लेने लगते हैं।

ऐसे पहचानें मुनचूसन सिंड्रोम के लक्षण

मुनचूसन सिंड्रोम के लक्षण पहचानना हर आम इंसान के लिए जरूरी है, जिससे आपकी भावनाओं के साथ कोई शख्स खिलवाड़ न कर सके। इस सिंड्रोम से पीड़ित लोग अपनी या अपने आसपास के लोगों की बीमारी को बढ़ा चढ़ाकर बताते हैं। वे बीमारी और उनके लक्षणों के बारे में झूठ बोलते हैं और सहानुभूति लेने की कोशिश करते रहते हैं। आपको ऐसे लोगों के झूठ को पकड़ना आना चाहिए। ऐसे लोगों को नजर में रखें जो हमेशा बीमार होने की बात करते रहते हैं। अगर यह किसी की आदत है, तो मान लीजिए वह सिंड्रोम का शिकार है।

जानिए मुनचूसन सिंड्रोम के कारण

मुनचूसन सिंड्रोम का कोई सटीक और ज्ञात कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसके पीछे मनोवैज्ञानिक कारणों के साथ ही जैविक कारण भी हैं। कई बार बचपन की उपेक्षा, दूसरों के दुर्व्यवहार या बार-बार बीमार होने के कारण भी यह सिंड्रोम हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस सिंड्रोम से कितने लोग पीड़ित हैं यह नहीं कहा जा सकता है, लेकिन महिलाओं की तुलना में यह पुरुषों में अधिक आम है। चिंता की बात यह है कि इसका कोई इलाज भी अभी तक नहीं खोजा जा सका है। हालांकि अगर आपको लगता है कि आप इस सिंड्रोम के शिकार हैं तो खुद में बदलाव करने की कोशिश करें। खुद को समझाएं कि आप सेहतमंद और खुश हैं।

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...