Lonar Lake
Lonar Lake

Lonar Lake: महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित लोनार झील को स्थानीय लोग किसी प्राकृतिक चमत्कार से कम नहीं मानते हैं। यह जगह सचमुच विज्ञान, प्रकृति और इतिहास का एक अनोखा मेल का प्रतीक है। यह झील लगभग 52,000 साल पहले एक विशाल उल्का के पृथ्वी से टकराने के कारण बनी थी। इसे दुनिया की कुछ दुर्लभ क्रेटर झीलों में गिना जाता है और यह न केवल वैज्ञानिकों बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। आइए, लोनार झील की खासियत और इसे घूमने की जानकारी को चार प्रमुख बिंदुओं में समझते हैं।

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Lonar Lake
Beauty of Lonar Lake

लोनार झील का सबसे बड़ा आकर्षण इसका भूवैज्ञानिक महत्व है। यह झील दुनिया के सबसे दुर्लभ बेसाल्टिक क्रेटर में से एक है, जो उल्कापिंड के टकराव से बना है। झील का पानी दो भागों में बंटा हुआ है। बाहरी हिस्सा मीठे पानी का है, जबकि अंदर का हिस्सा खारे पानी का है। यह इसे जैविक और भौतिक रूप से खास बनाता है। झील का खारा पानी विभिन्न प्रकार के खनिजों और शैवालों से भरपूर है, जो यहां पाए जाने वाले जीवों और पक्षियों को जीवन प्रदान करता है। वैज्ञानिक और भूगर्भशास्त्री यहां नियमित रूप से शोध करते हैं, क्योंकि यह झील अंतरिक्ष और पृथ्वी के विकास के कई रहस्यों को उजागर करने में मदद करती है।

Biodiversity of Lonar Lake
Biodiversity of Lonar Lake

लोनार झील का शांत और अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को आकर्षित करता है। झील के चारों ओर हरी-भरी वनस्पति, पक्षियों की कई प्रजातियां, और दुर्लभ जीव-जंतु पाए जाते हैं। यह झील फ्लेमिंगो, मोर, हेरॉन, और अन्य जलपक्षियों के लिए एक आदर्श स्थान है। सुबह और शाम के समय झील का दृश्य और यहां का शांत वातावरण किसी चित्रकला की तरह प्रतीत होता है। झील के आसपास छोटे-छोटे झरने और चट्टानी संरचनाएं इस जगह की सुंदरता को और बढ़ाते हैं।

लोनार झील का केवल भूवैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। झील के आसपास कई प्राचीन मंदिर हैं, जैसे दौलतशाह मंदिर, कमलजा देवी मंदिर और शिव मंदिर, जो प्राचीन हिंदू स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। कहा जाता है कि इन मंदिरों का निर्माण चालुक्य और राष्ट्रकूट काल में हुआ था। झील से जुड़ी पौराणिक कहानियां भी इसे और खास बनाती हैं। मान्यता है कि यहां लोनासुर नामक राक्षस का वध हुआ था, जिससे इस झील का नाम पड़ा। यहां आने वाले पर्यटक झील के शांत वातावरण के साथ-साथ इसके ऐतिहासिक और धार्मिक पहलुओं का भी अनुभव कर सकते हैं।

झील के चारों ओर ट्रेकिंग कर सकते हैं। यह झील के आसपास बने ट्रेकिंग मार्ग प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने का एक बेहतरीन तरीका है। पक्षी देखना भी इस जगह पर आकर लोग पसंद करते हैं।  झील के पास पक्षियों की विविध प्रजातियों को देखना एक अद्भुत अनुभव है। लोनार के आसपास के गांवों में स्थानीय व्यंजन, जैसे बाजरा की रोटी और चटनी, का स्वाद लिया जा सकता है। झील के पास स्थित प्राचीन मंदिरों का दौरा अवश्य करें। लोनार झील न केवल प्रकृति प्रेमियों के लिए, बल्कि इतिहास और विज्ञान के शोधकर्ताओं के लिए भी एक विशेष स्थल है। 

संजय शेफर्ड एक लेखक और घुमक्कड़ हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में हुआ। पढ़ाई-लिखाई दिल्ली और मुंबई में हुई। 2016 से परस्पर घूम और लिख रहे हैं। वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन एवं टोयटा, महेन्द्रा एडवेंचर और पर्यटन मंत्रालय...