Varanasi One Day Trip
Vishwanath Corridor : Varanasi One Day Trip

Kashi Vishwanath Jyotirlinga: हिन्दू धर्म में सावन के महीने का काफी ज्यादा महत्व माना गया है। सावन के महीने की शुरुआत 4 जुलाई से हो चुकी हैं। ऐसे में देशभर के सभी शिव मंदिरों में भक्तों का तांता देखने के लिए मिल रहा है। कई यात्री चारधाम यात्रा पर जा रहे हैं तो कई बनारस के काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन करने जा रहे हैं। भक्त काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन करने जाना सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। ये 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इस मंदिर की मान्यता काफी ज्यादा है। आज हम आपको इस मंदिर से जुड़ी मान्यता और कुछ खास बातें बताने जा रहे हैं तो चलिए जानते हैं काशी विश्वनाथ मंदिर की खासियतों के बारे में –

जानें कब हुई थी काशी विश्वनाथ की स्थापना

साल 1194 में मोहम्मद गोरी द्वारा काशी विश्वनाथ को पहले लुटा गया था उसके बाद इस मंदिर को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया। बाद में मंदिर का निर्माण फिर से करवाया गया। लेकिन फिर से जौनपुर के सुल्ताना मोहम्मद शाह ने इस मंदिर को तुड़वा दिया। लेकिन एक बार फिर अकबर के नौ रत्नों में से एक राजा टोडरमल द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर का फिर से जीर्णोद्धार करवाया गया। यह साल 1585 में करवाया गया। इसमें नारायण भट्ट की मदद ली गई थी। उसके बाद से ही है मंदिर काफी ज्यादा प्रसिद्ध और चमत्कारी माना जाता है।

जाने कब खुलता है मंदिर

काशी विश्वनाथ मंदिर सावन के वक्त सुबह 2:30 पर खुलता है। इस मंदिर में रोजाना पांच बार भोलेनाथ की आरती की जाती है। पहली आरती सुबह 3:00 होती है और आखिरी आरती रात 10:30 बजे होती है। दिनभर मंदिर में भक्तों का आना जाना लगा रहता है। साल भर में लाखों भक्त काशी विश्वनाथ के दर्शन करने के लिए आते हैं। वहीं सावन के महीने में यहां सबसे ज्यादा भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है।

जानें काशी विश्वनाथ की खासियत

कहा जाता है इस मंदिर में मौजूद शिवलिंग स्वयं महादेव ने अपने निवास के लिए स्थापित किया था। काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भ ग्रह में मंडप और शिवलिंग दोनों मौजूद है, जो चांदी के चौकोर वेदी में विराजित है। इसके अलावा काशी विश्वनाथ मंदिर में काल भैरव, भगवान विष्णु और विरुपाक्ष गौरी का मंदिर भी मौजूद है। इस मंदिर की मान्यता काफी ज्यादा है।

कहा जाता है वाराणसी के कण-कण में सिर्फ विराजमान है और सभी जगह उनका वास है। इतना ही नहीं मान्यताओं के अनुसार वाराणसी शहर भगवान शिव के त्रिशूल पर टिका हुआ है। उनका आशीर्वाद यहां के लोगों पर हमेशा बना रहता है।

ये भी मान्यता है कि जो भी भक्त गंगा नदी में स्नान करने के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने के लिए आता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए सबसे ज्यादा भक्त काशी विश्वनाथ के दर्शन करने के लिए जाना पसंद करते हैं। आप भी इस 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक कशी विश्वनाथ के दर्शन करने के लिए जा सकते हैं।

मैं आयुषी जैन हूं, एक अनुभवी कंटेंट राइटर, जिसने बीते 6 वर्षों में मीडिया इंडस्ट्री के हर पहलू को करीब से जाना और लिखा है। मैंने एम.ए. इन एडवर्टाइजिंग और पब्लिक रिलेशन्स में मास्टर्स किया है, और तभी से मेरी कलम ने वेब स्टोरीज़, ब्रांड...