यह त्‍योहार पूरे भारत वर्ष में धूमधाम के साथ मनाया जाता है। साल में दो बार नवरात्र‍ि पड़ती हैं, जिन्‍हें चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र के नाम से जाना जाता है। चैत्र नवरात्र से हिन्‍दू वर्ष की शुरुआत होती है। इस बार चैत्र नवरात्र 6 अप्रैल से शुरू होकर 14 अप्रैल को खत्म हो रही है। आइए जानते है क्या है शुभ मुहूर्त घट स्थपना और चैत्र नवरात्र का क्या है महत्व?
 
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 
 
घटस्थापना या कलश स्थापना नवरात्रि के दौरान महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक है। यह नौ दिनों के उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है। शास्त्रों में नवरात्रि की शुरुआत में एक निश्चित मुहूर्त के दौरान ही घटस्थापना करने के लिए कहा गया है। घटस्थापना देवी शक्ति का आह्वान है और इसे गलत समय पर करना अशुभ हो सकता है। सुबह स्नान करके पूजन सामग्री के साथ पूजा स्थल पर पूर्व दिशा की ओर मुंह करके आसन लगाकर बैठें। 6 अप्रैल की सुबह 06:10 से 10:19 तक का समय काफी शुभ है। 4 घंटे 9 मिनट के इस समय के दौरान कभी-भी घटस्थापना की जा सकती है। 
 
कलश स्‍थापना की सामग्री 
 
मां दुर्गा को लाल रंग खास पसंद है इसलिए लाल रंग का ही आसन खरीदें। इसके अलावा कलश स्‍थापना के लिए मिट्टी का पात्र, जौ, मिट्टी, जल से भरा हुआ कलश, मौली, इलायची, लौंग, कपूर, रोली, साबुत सुपारी, साबुत चावल, सिक्‍के, अशोक या आम के पांच पत्ते, नारियल, चुनरी, सिंदूर, फल-फूल, फूलों की माला और श्रृंगार पिटारी भी चाहिए।
 
कलश स्‍थापना कैसे करें?
 
– नवरात्रि के पहले दिन यानी कि प्रतिपदा को सुबह स्‍नान कर लें।
– मंदिर की साफ-सफाई करने के बाद सबसे पहले गणेश जी का नाम लें और फिर मां दुर्गा के नाम से अखंड ज्‍योत जलाएं।
– कलश स्‍थापना के लिए मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ के बीज बोएं।
– अब एक तांबे के लोटे पर रोली से स्‍वास्तिक बनाएं। लोटे के ऊपरी हिस्‍से में मौली बांधें।
– अब इस लोटे में पानी भरकर उसमें कुछ बूंदें गंगाजल की मिलाएं फिर उसमें सवा रुपया, दूब, सुपारी, इत्र और अक्षत डालें।
– इसके बाद कलश में अशोक या आम के पांच पत्ते लगाएं।
– अब एक नारियल को लाल कपड़े से लपेटकर उसे मौली से बांध दें फिर नारियल को कलश के ऊपर रख दें।
– अब इस कलश को मिट्टी के उस पात्र के ठीक बीचों बीच रख दें जिसमें आपने जौ बोएं हैं।
– कलश स्‍थापना के साथ ही नवरात्रि के नौ व्रतों को रखने का संकल्‍प लिया जाता है।
– आप चाहें तो कलश स्‍थापना के साथ ही माता के नाम की अखंड ज्‍योति भी जला सकते हैं।
 

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