Hand Gestures

Hand Gestures: योगशास्त्र के अनुसार, हमारे हाथ की सभी उंगलियां ब्रह्मांड के पंचतत्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं। हाथ का अंगूठा अग्नि तत्व, तर्जनी उंगली वायु तत्व, मध्यमा उंगली आकाश तत्व, अनामिका उंगली पृथ्वी तत्व और कनिष्ठा उंगली जल तत्व का प्रतीक है। इन सभी उंगलियों से बनने वाली विभिन्न प्रकार की मुद्राओं को ही हस्त मुद्रा कहा जाता है। जब हाथ की दसों उंगलियों को एक दूसरे से स्पर्श करके विशेष प्रकार की मुद्राएं बनाई जाती हैं, तब शरीर में रुकी हुई असंतुलित ऊर्जा फिर से संतुलित होकर प्रवाहित होने लगती है। जिससे व्यक्ति के शरीर की शक्ति जागृत होती है। हस्त मुद्रा बनाते समय 2 या 3 उंगलियों को एक दूसरे से स्पर्श करते हैं बाकि की उंगलियों को सीधा रखते हैं, तभी हस्त मुद्राओं का पूरा लाभ प्राप्त होता है। आज इस लेख में हम उंगलियों से बनने वाली हस्त मुद्राओं के बारे में जानेंगे जो हमें आध्यात्मिक जीवन जीना सिखाती है।

ज्ञान मुद्रा और वायु मुद्रा

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ज्ञान मुद्रा के लिए अंगूठे के आगे के भाग और तर्जनी उंगली को स्पर्श किया जाता है। इस मुद्रा से विचार शक्ति प्रबल होती है और याददाश्त भी तेज होती है। इस मुद्रा से व्यक्ति के स्वभाव में सकारात्मक परिवर्तन आता है और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है। ज्ञान मुद्रा के लिए तर्जनी उंगली के आगे वाले भाग को अंगूठे के नीचे वाले भाग में रख कर हल्के से दबाया जाता है। इससे शरीर की वायु संतुलित होती है। वायु मुद्रा से व्यक्ति का मस्तिष्क शांत होता है और सभी नकारात्मक विचार खत्म हो जाते हैं। साथ ही वायु मुद्रा से व्यक्ति को साइटिका, घुटने के दर्द, गले और रीढ़ के दर्द में राहत मिलती है।

आकाश मुद्रा, शून्य मुद्रा और पृथ्वी मुद्रा

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अंगूठे के आगे वाले भाग से मध्यमा उंगली को स्पर्श करने से आकाश मुद्रा बनती है। इस मुद्रा से कान और हृदय से जुड़े रोगों में लाभ मिलता है और हड्डियां मजबूत होती हैं। व्यक्ति के मन से डर, दुःख, क्रोध और जलन जैसे विकार दूर करने में आकाश मुद्रा सबसे अधिक कारगर है। जब मध्यमा उंगली को मोड़कर अंगूठे के नीचे वाले भाग में स्पर्श किया जाता है तब शून्य मुद्रा बनती है। शून्य मुद्रा बनाने से व्यक्ति को थायरॉइड और मुंह के रोगों में विशेष लाभ प्राप्त होता है। अनामिका उंगली के आगे वाले भाग को अंगूठे से स्पर्श करने से पृथ्वी मुद्रा बनती है। पृथ्वी मुद्रा से व्यक्ति के शरीर में स्फूर्ति और कांति आती है। साथ ही व्यक्ति को मानसिक शांति भी मिलती है।

कमल मुद्रा और गरुड़ मुद्रा

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यदि किसी व्यक्ति के मन में हमेशा नकारात्मकता बनी रहती है या किसी व्यक्ति को अपने आस पास हमेशा नकारात्मक ऊर्जा का आभास होता है तो सकारात्मकता बढ़ाने के लिए कमल मुद्रा बेहद प्रभावी है। जो व्यक्ति आत्मज्ञान करना चाहते है और अपने जीवन को आध्यात्म की ओर ले जाना चाहते हैं, उनके लिए गरुड़ मुद्रा लाभकारी है। गरुड़ मुद्रा से शरीर के आस पास सकारात्मक ऊर्जा जाग्रत होती है।

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