दुविधा में रहना कई बार व्यक्ति के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है.गीता में बताया गया है कि यदि आपके दिमाग में किसी काम को लेकर दुविधा है तो उस काम को कभी नहीं करना चाहिए.यदि बलपूर्वक आप ऐसा करते हैं तो उस काम में आपको सफलता मिलने की संभावना काफी कम होती है.

वस्तुतः अगर गीता के कुछ नियमों का अक्षरश: जीवन में पालन किया जाये तो अपने जीवन में स्पष्ट बदलाव लाया जा सकता है,इसके श्लोक ,व्यक्ति के जीवन में स्पष्ट बदलाव लाने की अद्भुत क्षमता रखते हैं,विशेष रूप से उस समय जब आप अपने जीवन में अपने करियर,या व्यवसाय में लगातार मिलती असफलताओं से ,हताशा के शिकार हो जाते हैं.उस समय आपकी इस चिंता और निराशा को दूर करने में गीता के श्लोक आपकी बहुत सहायता करते हैं

गीता में कहा गया है कि जो हुआ अच्छे के लिए ही हुआ होगा.इसका मतलब है कि अगर आपको असफलता मिलती है तो उसके पीछे भी कहीं न कहीं आपकी सफलता का राज छिपा हुआ है,बस ,दुविधाग्रस्त स्थिति को प्रश्रय न देकर,उस छिपे राज को जानने या समझने की कोशिश करें.एक बार असफलता का कारण जान लेने के बाद उसे दूर करने का उपाय करने के बाद अनायास ही सफलता आपके चरण चूमेगी

कोई काम शुरू करने से पहले उससे मिलने वाले फल की चिंता न करें.अपना काम पूरी तन्मयता से करने के बाद निश्चित रूप से सफलता आपको मिलेगी.इसी के साथ यह भी ध्यान रहे,कि,परिवर्तन ही विकास का सूचक है.अपनी नौकरी,या व्यवसाय में हुए छोटे बड़े बदलावों को देखकर न आहत हों न ही घबराएँ. परिवर्तन तो प्रकृति का शाश्वत नियम है,और ये हर परिस्थिति में होकर रहेगा.आपकी सफलता मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करती है कि आप ,मानसिक रूप से इस परिवर्तन के लिए कितने तैयार हैं?

  • किसी भी परिस्थिति में न भयभीत हों न हिम्मत हारें.गीता के ज्ञान के अनुसार डर और चिंता किसी भी सफल व्यक्तित्व के सबसे बड़े दुश्मन हैं.साथ ही अपने क्रोध पर भी नियंत्रण रखें .
  • किसी भी काम को करते समय उससे मानसिक रूप से अटैच न हों.कई बार ज़रूरत से ज़्यादा यह लगाव आपके असफल होने की वजह बन जाता है.अगर आपको आगे बढ़ना है तो हर समय अपने काम करने के तरीके में बदलाव करना जरूरी होता है.
  • हमेशा अपनी सोच सकारात्मक रखें.यदि आपकी सोच सकारात्मक है तो आपको उन बुरे दिनों में भी निराशा हाथ नहीं लगेगी,अन्यथा,तमाम प्रयासों के बावजूद भी आपको सफलता नहीं मिलेगी.
  • अपरिहार्य परिस्थिति में ,शांति चित्त से आगे बढ़ने का प्रयास करें.जीवन की आपाधापी में कई बार चित्त अस्थिर हो जाता है.मन को शांत रखने के लिए ध्यान की महिमा अभूतपूर्व है.
  • अपना लक्ष्य हमेशा बड़ा रखें.कहते हैं अगर आप सूर्य का संधान करने की कोशिश करते हैं तो भले ही आपका तीर सूर्य तक न पहुँचे मगर,ऊँचाई तक अवश्य पहुंचाएगा.

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