हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है और वर्ष के सभी 24 एकादशी में कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तो विशेष कल्याणकारी मानी जाती है। जिसे देवोत्थान एकादशी या देवउठनी एकादशी के रूप में जाना जाता है। इस बार यह दिन शुक्रवार, यानी 8 नवंबर को पड़ रहा है।मान्यता है कि इस दिन 4 महीनो से क्षीर सागर में सोए हुए भगवान विष्णु जागृत अवस्था में आते हैं, ऐसे में इस दिन किए गए व्रत और पूजा पाठ कल्याणकारी सिद्ध होती है। हालांकि देवउठनी एकादशी व्रत का पूरा लाभ पाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। चलिए जानते हैं कि देवउठनी एकादशी के दिन कौन कौन सी बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
चावल का सेवन न करें
जी हां, देवउठनी एकादशी के दिन चावल खाना निषेध माना गया है, मान्यता है कि इस दिन चावल का सेवन करने से व्यक्ति अगला जन्म रेंगने वाले जीव के योनि में होता है। इसलिए अस दिन भूलकर भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
व्यवहार में सात्विकता बनाएं रखें
एकादशी का व्रत बेहद कठीन और संयम वाला होता है, ऐसे में इस दिन आहार-व्यवहार में सात्विकता बनाएं रखने की कोशिश करें। भूलकर भी इस दिन मन-वचन और कर्म से कोई गलत कार्य ना करें।
तामसिक भोजन न करें
इस दिन मांस-मछली और दूसरे तामसिक भोजन का भूल कर भी सेवन ना करें।
आलस न करें
देवउठनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान आदी दैनिक कार्यों से निवृत होकर अपना मन भगवान की स्तुति में लगाएं। व्रत को दौरान दिन में ना सोएं।
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