हिंदी कैलेंडर के ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को वट सावित्री अमावस्या के नाम से जानते है। इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य प्राप्त करने के लिए वट सावित्री व्रत रखकर वट-वृक्ष और यमदेव की पूजा करती हैं। मान्यताओं के अनुसार, वट सावित्री व्रत अपने पति की लंबी आयु और संतान के उज्जवल भविष्य के लिए रखा जाता है। इस साल यह 3 जून दिन सोमवार को पड़ रहा है।
वट पूजा का महत्व
सुहागन स्त्रियों के लिए वट पूजा का बहुत खास महत्व होता है। इस दिन सुहागन महिलाएं अपने सुखद वैवाहिक जीवन के लिए बरगद के पेड़ का पूजन करती हैं। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन सावित्री नामक स्त्री में अपने सुहाग सत्यवान के प्राण यमराज से वापस ले लिए थे। तभी से इस व्रत को पति की लंबी आयु के लिए रखा जाने लगा।
वट वृक्ष का महत्व
हिन्दू-धर्म में वट (बरगद) वृक्ष को बहुत पूजनीय बताया गया है। बरगद के पेड़ में बहुत सी शाखाएं लटकी हुई होती है जिन्हे सावित्री देवी का रूप माना जाता है। पुराणों के अनुसार, बरगद के पेड़ पर त्रिदेवों का वास होता है। इसलिए वर पूजा में भी वट वृक्ष की पूजा की जाती है।
शुभ मुहूर्त
इस बार वट सावित्री व्रत 3 जून 2019, सोमवार को है।
ज्येष्ठ अमावस्या का आरंभ = 2 जून 2019, रविवार को शाम 04:39 बजे।
ज्येष्ठ अमावस्या का समापन = 3 जून 2019, सोमवार शान 03:31 बजे।
वट सावित्री व्रत के फायदे
- इस व्रत के प्रभाव से वैवाहिक जीवन अच्छा बीतता है और मैरिड लाइफ में आने वाले कष्टों को भी इस व्रत के प्रभाव से दूर किया जा सकता है।
- हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, जो सुहागन स्त्री पूरी श्रद्धा एवं विधि-विधान से इस व्रत को पूरा करती हैं उनका सुहाग दीर्घायु होता है।
- घर में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है।
वट सावित्री व्रत करने का तरीका
1. सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद सोलह श्रृंगार करें।
2. एक थाली में गुड़, भीगे हुए चने, आटे से बनी हुई मिठाई, कुमकुम, रोली, मोली, 5 प्रकार के फल, पान का पत्ता, धूप, घी का दीया, एक लोटे में जल और एक हाथ का पंखा लेकर बरगद पेड़ के नीचे जाएं।
3. पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं, उसके बाद प्रसाद चढाकर धूप, दीपक जलाएं।
4. पूजा में जल, मौली, रोली, कच्चा सूत, भिगोया हुआ चना, फूल तथा धूप का प्रयोग करें।
5. उसके बाद सच्चे मन से पूजा करके अपने पति के लिए लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें।
6. पंखे से वट वृक्ष को हवा करें और सावित्री माँ से आशीर्वाद लें ताकि आपका पति दीर्घायु हो।
7. इसके बाद बरगद के पेड़ के चारो ओर कच्चे धागे से या मोली को 7 बार बांधे और प्रार्थना करें।
8. घर आकर पति का आशीर्वाद लें। उसके बाद अपना व्रत खोल सकती हैं। कई महिलाएं इस दिन पूरे दिन व्रत रखती हैं और सूर्यास्त के बाद व्रत खोलती हैं।
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