कहते हैं भगवान् शिव जिस पर प्रसन्न होते हैं उसका कल्याण होने से कोई नहीं रोक सकता। महाशिवरात्रि के अवसर पर आज हम आपको बतायेंगे भोलेनाथ के एक ऐसे अनोखे मंदिर के बारें में। यूं तो भोलेनाथ को खुश करने के लिए उनके भक्त उन्हें दूध, जल और फल तक उन्हें अर्पित करते है, लेकिन पतालेश्वेर मंदिर के प्रति भक्तों की अनोखी श्रद्धा है। यहाँ भगवान शिव को लोग दूध, जल और फल के साथ-साथ सीखों वाली झाड़ू उनके शिवलिंग पर अर्पित करते है। मान्यता है की इस मंदिर में भगवान शिव को झाड़ू अर्पित करने से हर मनोकामना पूरी होती है।

 

150 साल पुराना है ये मंदिर

इस मंदिर में दर्शन के लिए भारी संख्या में भक्त सिर्फ मुरादाबाद जिले से ही नहीं बल्कि आस-पास के जिलों और दूसरे प्रांतों से भी आते हैं। मान्यता है कि यह मंदिर करीब 150 वर्ष पुराना है। इसमें झाड़ू चढ़ाने की रस्म प्राचीन काल से ही है। इस शिव मंदिर में कोई मूर्ति नहीं बल्कि एक शिवलिंग है, जिस पर श्रद्धालु झाड़ू अर्पित करते हैं।

 

पाताल से निकला था शिवलिंग

भगवान भोले नाथ के इस मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैली है। भक्त इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ की शरण में अपने कष्टों के निवारण के लिए आते है। भगवान शिव के इस मंदिर के प्रति भक्तों की अनोखी श्रद्धा उन्हें भगवान शिव के दरबार में खींच लाती है। मंदिर के नाम के बारे में भक्तों का कहना है की भगवान का ये शिवलिंग पाताल से निकला था। जिसके चलते इस मंदिर का नाम पतालेश्वेर पड़ गया। इस मंदिर में कोई पापी भी भगवान की शरण में आकार उन्हें सच्चे दिल से याद करता है तो उसका भी कल्याण हो जाता है।

 

चरम रोगों से मिलती है मुक्ति

करीब 150 साल पुराने इस मंदिर को भिखारीदास नाम के 1 भक्त ने बनबाया था। एक लम्बे अरसे से मंदिर में सेवा कर रहे यहाँ के पुजारी का कहना है कि मंदिर तो 150 साल पुराना है। लेकिन मंदिर में मौजूद शिवलिंग कितना पुराना है ये अभी भी रहस्य बना हुआ है। बहराल मंदिर में झाड़ू अर्पित करने से भक्तों को सभी प्रकार के चरम रोगों से मुक्ति मिलती है।

 

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