जैविक खेती के लिए जैविक खाद का प्रयोग

रासायनिक खाद से पौधे का ग्रोथ तो हो जाता है लेकिन इससे मिट्टी पर ख़राब प्रभाव पड़ता है। साथ ही साथ इससे उगाई गयी सब्जियों व फलों को खाने से तरह तरह की बीमारियाँ के होने होने का जोखिम भी बढ़ जाता है।

Composting Tips & Tricks: पौधे की अच्छी ग्रोथ के लिए हमें अलग-अलग तरह की खादों की ज़रूरत पड़ती है। कुछ लोग तो अपने खेतों और बगीचों में रासायनिक खाद का इस्तेमाल करते हैं। रासायनिक खाद से पौधे का ग्रोथ तो हो जाता है लेकिन इससे मिट्टी पर ख़राब प्रभाव पड़ता है। साथ ही साथ इससे उगाई गयी सब्जियों व फलों को खाने से तरह तरह की बीमारियाँ के होने होने का जोखिम भी बढ़ जाता है।

पौधे की अच्छी ग्रोथ और मिट्टी को लम्बे समय तक उपजाऊ बनाने के लिए हमें घर पर बनी जैविक खाद का इस्तेमाल करना चाहिए। जैविक कंपोस्ट खाद को बनाना काफ़ी आसान है। इसे आप अपने घर के वेस्ट मटेरियल से भी आसानी से बना सकते हैं। इस लेख के माध्यम से हम घर में खाद तैयार करने की विधि और तरीक़ों के बारे में जानेंगे। 

पौधों के लिए बेस्ट होममेड जैविक खाद 

जिस तरह से हमें कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन की आवश्यकता होती है ठीक वैसे ही पौधों को जीवित रहने और वृद्धि के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम के साथ साथ अन्य आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है जिनकी पूर्ती के लिए आप घर पर कुछ घरेलू जैविक कम्पोस्ट खाद तैयार कर सकते हैं और अपने पौधों को दे सकते हैं। गार्डनिंग में उपयोग किये जाने वाले जैविक खादों में टी कम्पोस्ट, लीफ कम्पोस्ट, किचन वेस्ट कम्पोस्ट, गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट और बोन मील को प्रमुख माना जाता है। 

जैविक खाद जिसे हम आसानी से अपने घर पर तैयार कर सकते हैं। 

1.  कम्पोस्ट खाद

यह हमारे घर, रसोई और बगीचे के व्यर्थ पदार्थों को सड़ा-गला कर बनाई जाने वाली खाद होती है। इस खाद में एनपीके की मात्रा बहुत ही अच्छी होती जय जो पौधे के विकास में सहायक होती है। इसे तैयार करने के लिए पत्तियों, टहनियों, पेड़-पौधों के अवशेष तथा सब्जियों के व्यर्थ हिस्सों को कम्पोस्ट के लिए तैयार गढ्ढा बनाकर डालकर उसे बंद कर देते हैं, फिर कुछ दिनों तक प्रतीक्षा करना होता है ताकि इसका विघटन हो जाए। विघटन की इस प्रक्रिया में कुछ सप्ताह या महीने तक का समय लगता है। फिर एक निश्चित समय के बाद वह ह्यूमस में सड़-गलकर खाद में बदल जाता है, जिसका प्रयोग आप अपने घर के किचन गार्डेन या फिर गमलों के लिए किया जा सकता है। 

2. गोबर की खाद

गोबर की खाद भी एक तरह की कम्पोस्ट ही होती है पर इसमें सिर्फ़ गोबर का ही इस्तेमाल होता है। इस तरह की खाद मवेशियों, भेड़-बकरी, घोड़े आदि के गोबर को सड़ा-गला कर बनाया जाता है। यह पूरी तरह से जैविक और एक पूर्ण खाद होती है जिसमें जीवांश भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इस तरह की खाद में नाइट्रोजन भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। कई लोग ताज़े गोबर को खाद के रूप में उपयोग करते हैं पर ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे पौधे मर भी सकते हैं और उनमें दीमक का प्रकोप भी हो सकता है। इसके लिए भी गढ्ढा बनाकर उसमें गोबर को डाल दिया जाता है और कुछ दिनों तक विघटन के लिए प्रतीक्षा करनी होती है। कुछ महीनों के पश्चात यह विघटित होकर खाद में परिवर्तित हो जाता है। 

3. पत्ती की खाद 

पेड़ों की पत्ती की खाद को लीफ मोल्ड अथवा लीफ कम्पोस्ट भी कहा जाता है। इस तरह की खाद पत्तियों और बगीचे में निकलने वाले पौधों अथवा घास को सड़ा-गला कर बनाया जाता है। इसके लिए पेड़ों की पत्तियों को एकत्रित करके एक बड़े पॉट या गड्ढे में डाल दिया जाता है ताकि वह कुछ समय बाद विघटित हो जायें। इसके लिए आप चाहें तो कुछ माइक्रोबस भी डाल सकते हैं ताकि विघटन की प्रक्रिया में तेज़ी आ सके। इस तरह की खाद में जीवांश भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं तथा इसमें पोषक तत्व भी भरपूर होते हैं। यह बाग़वानी अथवा गमलों के लिए मिट्टी बनाने में बहुत ही ज़्यादा  उपयोगी होती है।

4. हड्डी की खाद

हड्डी की खाद को बोनमिल के नाम से जाना जाता है। यह पौधों की ग्रोथ के लिए बहुत ही ज़्यादा उपयोगी होती है। इसके लिए मरे हुए पशुओं की हड्डियों को एकत्रित करके उसक चुरा बनाया जाता है। जिसके लिए सबसे पहले हड्डियों को उबालना और भाप देना होता है फिर सुखाकर एक महीन पाउडर बना लिया जाता है। खेत और गार्डन में फास्फोरस की मात्रा को बढ़ाने के लिए इस जैविक उर्वरक का उपयोग किया जाता है। इस तरह की खाद में 4 से 5 प्रतिशत नाइट्रोजन और 20-25 प्रतिशत फास्फोरस होता है। यह नाज़ुक और कमज़ोर पौधों के लिए टॉनिक का काम करती है। 

5. खली की खाद

खली की खाद के रूप में मुख्य रूप से सरसों और नीम खली का नाम सामने आता है। यह दोनों ही पूरी तरह से जैविक और कई ऐसे गुणों से भरपूर हैं जोकि पौधों की वृद्धि में सहायक होते हैं। इस तरह की खाद एक तरफ़ जहाँ पौधों को पोषण देती हैं वहीं नैचरल रूप से पेस्टीसाइड का भी काम करती है। इस तरह की खाद बनाने के लिए आप घर पर मौजूद सरसों खली अथवा नीम की निबोली को ले सकते हैं। अगर आप अपने घर के मौजूद गमलों के लिए खली की खाद बनाना चाहते हैं तो 250 ग्राम सरसों की खली को दो लीटर पानी में गला लें और करीब 5 दिन बाद इस खली के घोल को पौधों की जड़ों में डालें, इससे पौधों की ग्रोथ अच्छी होगी।

6. वर्मी कम्पोस्ट 

वर्मीकम्पोस्ट को केंचुआ खाद भी कहा जाता है जोकि पौधों के लिए पोषण पदार्थों से भरपूर एक उत्तम जैव उर्वरक है। यह केंचुआ के द्वारा वनस्पतियों एवं भोजन के कचरे आदि को विघटन की प्रक्रिया के तहत बनाई जाती है। इसके लिए आपको एक गड्ढे या फिर बड़े पॉट की की जरुरत पड़ेगी। इस प्रक्रिया को शुरू करते समय गोबर में थोड़े से केंचुए डाल कर ढक दिया जाता है। नमी के लिए समय-समय पर पानी का छिड़काव किया जाता है। केंचुए डाले गए गोबर को महीनों तक खाते और अपने पीछे वर्मी कम्पोस्ट बना कर छोड़ते जाते हैं।

इस तरह की खाद बनाने के लिए आपको बहुत छोटी सी जगह की आवश्यकता होती है। अगर आपके पास कोई छोटी जगह भी नहीं है तो आप किसी प्लास्टिक पॉट का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अधिकतर जैविक खादों को विघटन की प्रक्रिया के तहत बनाया जाता है, जिसमें 45-60 दिन का समय लग सकता है। इस प्रक्रिया को बढ़ाने के लिए आजकल कई तरह के माइक्रोबस भी आते हैं। इन्हें मिलाने से आपकी खाद 30-45 दिन में बनकर तैयार हो जाएगी। सब्ज़ियों, फलों और बाग़वानी के लिए इस तरह की खाद बहुत ही उपयोगी होती है। 

संजय शेफर्ड एक लेखक और घुमक्कड़ हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में हुआ। पढ़ाई-लिखाई दिल्ली और मुंबई में हुई। 2016 से परस्पर घूम और लिख रहे हैं। वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन एवं टोयटा, महेन्द्रा एडवेंचर और पर्यटन मंत्रालय...

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