एक ऐसी जगह जहां बाघ पालतू बिल्ली की तरह रहते थे वो भी बौद्ध भिक्षुओं की देखरेख में। दुनियाभर से हजारों सैलानी हर रोज वहां पहुँचते और बाघों के साथ खेलते व फोटो खिंचवाते थे। लेकिन अब ये परिसर वीरान हो गया है। थाईलैंड में टाइगर टेंपल के नाम से प्रसिद्ध मंदिर एक बार फिर से आरोपों के घेरे में आ गया है। यहां पर वन्यजीव विशेषज्ञों ने परिसर से फ्रीजर में रखें बाघों के 40 मृत शावक बरामद किए हैं। बताया जा रहा है कि मंदिर ने अपने आपको एक वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित कर रखा था, पर पिछले कुछ सालों से चल रही जांच में निकलकर आया कि यहां पर बंद जानवरों को तस्करी करके लाया जाता था और उनपर अत्याचार भी किया जाता था।
यही नहीं वहां पर घूमने आए लोगों ने तो यहां तक कहा था कि सारे टाइगर देखने में ऐसे लगते थे जैसे उन्हें नशा दिया गया हो। आपको बता दें कि टाइगर को छुड़ाने की कवायद वन्यजीव अधिकारी साल 2001 से कर रहे थे जिसमें अब जाकर उन्हें सफलता मिली है।
सोशल मीडिया पर डाली गई तस्वीर में फर्श पर 40 शावकों के शव पड़े दिख रहे हैं।
क्यूं चर्चित है बाघों का मंदिर
बाघों का मंदिर थाईलैंड के कंचनबुरी प्रान्त में स्तिथ है जो की थाईलैंड-बर्मा बॉर्डर के पास है। इसे ‘Wat Pa Luang Ta Bua’ नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर विदेशी पर्यटकों के बीच खासा आकर्षण का केंद्र है। यहां की खास बात ये थी कि यहां टाइगर पर्यटक और बौद्ध भिक्षुओं के साथ आजाद घूमा करते थे। टूरिस्ट्स यहां पर बाघों को खाना खिलाते हैं, साथ घूमते हैं और सेल्फी भी लेते थे। इसके लिए बाघों को खासा ट्रेनिंग दी जाती थी।
किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते थे यहां के बाघ
इस परिसर में प्रवेश करने के लिए कुछ नियम भी थे जिनमें लाल कपड़े ना पहनना, दौड़-भाग ना करना इत्यादि शामिल हैं। यह टेम्पल थाईलैंड का प्रमुख ट्यूरिस्ट अट्रेक्शन बन चुका था। हर साल यहाँ पर लाखों की संख्या में ट्यूरिस्ट आते थे। खास बात यह भी थी कि आज तक यहां के किसी भी बाघ ने किसी को कोई भी नुकसान नहीं पहुँचाया है।
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