Hindi Story: रेखा ने अपने पति से पूछा कि यदि कोई अपने बच्चों को जीनियस बनाना चाहे तो उसे क्या करना चाहिये? पति ने कहा कि इसके लिये बच्चों को परियों की कहानियां सुनानी चाहिये। इतना सुनते ही रेखा ने एक और सवाल कर दिया कि यदि और अधिक प्रतिभाशाली बनाना हो तो फिर क्या करे? अब पतिदेव ने हंसते हुए कहा कि फिर तो ऐसे बच्चों को और अधिक परियों की कहानियां सुनानी चाहिये।
रेखा ने कहा कि मुझे चाहे कितनी ही कहानियां क्यूं न सुनानी पड़े, मैं तो अपने बेटे को सबसे बड़ा जीनियस बनाऊंगी। इन दोनों की बातें सुनते-सुनते इनके बेटे गप्पू ने मम्मी से कहा कि मुझे जीनियस बाद में बना लेना, पहले मुझे पतंग लेकर दो। सारे मुहल्ले के बच्चे आज सुबह से पतंग उड़ा रहे हैं, मुझे भी अभी पतंग उड़ानी है। कई बार समझाने पर भी जब गप्पू नहीं माना तो रेखा ने उसे पतंग तो ले दी, परंतु साथ ही यह चेतावनी दे डाली कि पतंग उड़ाने के लिये छत पर नहीं जाओगे। कुछ ही देर बाद गप्पू अपनी मां को किया हुआ वादा भूल कर अपने दोस्तों के साथ घर की छत पर पतंग उड़ाने में मस्त हो गया।
घर में जब खाना तैयार हो गया तो रेखा ने गप्पू को ढूंढते हुए आवाज़ लगानी शुरू की कि घर आकर खाना खा लो। जब इधर-उधर देखने पर गप्पू कहीं दिखाई नहीं दिया तो रेखा ने उसे गली में देखना शुरू कर दिया। गली में आते ही रेखा की नजर छत की ओर गई जहां गप्पू अपने दोस्तों के साथ पतंग उड़ा रहा था। रेखा ने बिना आव-ताव देखे गप्पू पर गुस्सा करना शुरू कर दिया। मां का गुस्सा देख कर गप्पू इतना घबरा गया कि घबराहट में उसका पैर छत से फिसल गया और वह सिर के बल नीचे गिर पड़ा। कुछ ही क्षणों में अड़ोस-पड़ोस वालों की मदद से गप्पू को अस्पताल में दाखिल करवा दिया गया। थोड़ी देर रुकने के बाद सभी पड़ोसी एक-एक करके वहां से चले गये। अब गप्पू की मां रेखा अपने पति के साथ अस्पताल के कमरे के बाहर परेशानी की हालात में असहाय सी बैठी थी। रेखा बार-बार गप्पू के छत से गिरने का दृश्य याद करके एक ही बात दोहराये जा रही थी कि किसी तरह मेरे बच्चे को बचा लो। गप्पू के पिता के कई बार समझाने पर भी रेखा अपने आंसुओं पर काबू नहीं रख पा रही थी।
रोते-रोते रेखा की इतनी बुरी हालत हो गई कि उसे भी इलाज के लिये अस्पताल में दाखिल करना पड़ा। जब गप्पू के पिता ने डॉक्टर से बात की तो उन्होंने बताया कि बच्चे को गिरता देखकर आपकी पत्नी को इतना सदमा लगा है कि वो उसे बर्दाश्त नहीं कर पा रही। कुछ दिन इलाज करने पर गप्पू तो काफी हद तक ठीक हो गया, लेकिन रेखा की हालात में कोई सुधार नहीं हो रहा था। रेखा का इलाज कर रहे डॉक्टर ने उसके पति से कहा कि यदि आप कहे तो मै
ं किसी मनोवैज्ञानिक को बुला देता हूं। रेखा के पति ने कहा कि आपको क्या लगता है कि मेरी पत्नी पागल हो गई है। इस पर डॉक्टर साहब ने कहा- ‘ऐसी बात नहीं है। मनोविज्ञान एक ऐसा विज्ञान है जो किसी भी प्राणी के चिंतन, भाव, व्यवहार और मानसिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करता है। इसका उद्देश्य चेतनावस्था की प्रक्रिया का विश्लेषण करके बीमारी या उससे जुड़ी परेशानी का हल ढूंढना होता है।’
कुछ दिन इलाज करने पर मनोवैज्ञानिकों ने यह पाया कि जब रेखा छोटी थी तो उस समय एक चिड़िया ने इनके घर में पंखें और छत के बीच एक घोंसला बनाया था। कुछ ही दिनों में उस चिड़िया ने उसमें अंडे दे दिये। रेखा हर रोज उन अंडों को बहुत ध्यान से देखती थी और इसी के साथ उसने अपने सभी घरवालों से कहा कि कोई भी मेरे कमरे का पंखा नहीं चलायेगा। परंतु एक दिन अचानक जब बहुत गर्मी में रेखा बाहर से आई तो गलती से खुद ही पंखा चला दिया। पंखा चलते ही अगले क्षण चिड़िया का घोंसला और उसमें पड़े हुए सभी अंडे नीचे गिर कर टूट गये। अब अपने बेटे को नीचे गिरता देख रेखा की आंखों में दहशत भरा वही नजारा सामने आ गया।
रेखा के पति ने कहा कि अब इस समस्या का हल क्या है? डॉक्टरों ने बताया कि किसी भी परेशानी या उलझन के बारे में जितना सोचा जाये वे उतना ही परेशान करती है और दिमागी रूप से इंसान को कमजोर कर देती है। हमारे जीवन में जो कुछ भी होता है वो सब परमात्मा की मर्जी से ही होता है। हमारे साथ जो कोई सुखद या दुःखद घटना घटती है वो परमात्मा की इच्छा से ही होती है। हमारे लाख चाहने पर भी हमारी मर्जी मुताबिक कुछ नहीं हो पाता। इसलिये हमें सिर्फ अपना कर्म करते रहना चाहिये। अपनी सभी चिंता यदि ऊपर वाले के भरोसे छोड़ दी जाये तो हम काफी हद तक चिंतामुक्त रह सकते हैं। इन बातों को ध्यान में रखते हुए हमें प्रभु के हर निर्णय को खुशी-खुशी स्वीकार करना चाहिए।
रेखा के पति को इस बात की हैरानगी हो रही थी कि क्या बचपन में घटी एक छोटी-सी घटना के लिये इंसान को इतना पछतावा हो सकता है। डॉक्टरों ने उन्हें समझाया कि कोई भी बुरा ख्याल बिना किराये के हमारे दिलोदिमाग में उस समय तक रहता है जब तक हम उसे भूल नहीं जाते। जीवन में जो कुछ छूट गया है उस पर गहराई से विचार करे परंतु उसका प्रभाव अपने मन पर कभी न पड़ने दे। जौली अंकल भी डॉक्टरों की बात से इत्तफाक रखते हुए यही मानते हैं कि जो बीत गया सो बीत गया, इसलिए पीछे मुड़कर कभी मत देखिए, क्योंकि बार-बार पीछे मुड़कर देखने से आगे का रास्ता लंबा हो जाता है। जिस दिन आदमी अपनी गलतियों पर सच्चे दिल से पश्चाताप कर लेता है, उसी दिन उसका मन पछतावे की आग में जलने की बजाए आईने की तरह साफ हो जाता है। जैसा करो वैसा बोलो, जैसा बोलो वैसा करो।
ये कहानी ‘कहानियां जो राह दिखाएं’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं–
