प्रिंसिपल करीब 55 साल के सौम्य चेहरे वाले व्यक्ति थे। पूरी बात सुन उन्होंने कहा, ‘हमारे कालेज में रैगिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है। आप लोग अपनी क्लास में जाइए मैं राजेश को समझा दूंगा। ‘सर समझा दूंगा का क्या मतलब? राजेश और उसके साथियों को इसके लिए सजा मिलनी 
चाहिए नमिता ने कहा।’ठीक है, मैं उन्हें सजा भी दे दूंगा। अब आप लोग अपनी क्लास में जाइए प्रिंसिपल ने शांत स्वर में कहा। नमिता को उनकी बात सुन कर बहुत आश्चर्य हुआ। रैंगिंग एक संगीन अपराध था लेकिन प्रिंसिपल साहब उसे बहुत हल्के ढंग से ले रहे थे। उसने उनके चेहरे की ओर देखते हुए कहा, ‘सर, प्लीज आप हमें कागज दे दीजिए। हम लोग राजेश और उसके साथियों की लिखित कम्पलेंट करेंगे’लिखित कंप्लेंट की आवश्यकता नहीं है। मैं नियमानुसार कार्यवाई कर लूंगा। ‘सर, किस नियम की बात कर रहे हैं आप? नियमानुसार तो सबसे पहले लिखित शिकायत लेनी चाहिए लेकिन मेरी समझ में नहीं आ रहा कि आप उसे क्यूं नहीं लेना चाह रहे हैं नमिता का स्वर तेज हो गया। हिमानी ने उसका हाथ दबा चुप रहने का इशारा किया लेकिन नमिता का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा था। ‘आप लोग मेरे ऊपर भरोसा रखिये। मैं सब संभाल लूंगा।
प्रिंसिपल साहब ने समझाने की कोशिश की। 
‘हां सर, हमें भरोसा हो चला है कि आप सब संभाल लेंगे नमिता ने सीधे प्रिंसिपल की आंखों में झांका फिर बोली, ‘सर, क्या जान सकते हैं कि राजेश और उसके साथियों के प्रति आपका साफ्ट कार्नर क्यूं है?प्रिंसिपल साहब नमिता की आंखों का ताव सह न सके। उन्होंने अपनी नजरें झुका लीं और अपना चश्मा उतार कर मेज पर रख दिया। उनके चेहरे पर छाये बेबसी के चिह्नों को देख कर लग रहा था कि उनके अंतर्मन में कोई आत्मसंघर्ष चल रहा है। चंद पलों बाद उन्होंने गहरी सांस भरी फिर बोले, ‘राजेश इस कालेज के प्रबंधक का बेटा है।’तो क्या वह नियम-कानून से ऊपर हो गया।हिमानी ने कहा। उसके अंदर का भी आक्रोश बढऩे लगा था। प्लीज, आप मेरी मजबूरी समझिये। मुझे इसी कालेज में नौकरी करनी है इसलिए मैं प्रबंधक को नाराज नहीं कर सकता। फिर भी मेरा यकीन करिए मैं राजेश को समझा दूंगा प्रिंसिपल साहब के स्वर से उनकी बेबसी झलक उठी।
‘सर, यह देखिए उसने मेरा कुर्ता फाड़ा है। अगर यही घटना आपकी बेटी के साथ हुई होती तो क्या आप भी राजेश को समझाने की बात करते इंद्राणी ने अपना दुपट्टï हटाते हुए फटा कुर्ता दिखाया फिर बोली, ‘आपको हमारी लिखित कम्पलेंट पर कार्यवाई करनी ही होगी।यह सुन प्रिंसिपल साहब ने अपनी आंखें बंद कर लीं। उनके चेहरे पर एक के बाद भाव आ रहे थे। चंद पलों बाद उन्होंने अपनी आंखें खोली फिर समझाने की मुद्रा में बोले, ‘आप लोग जो घटना बता रही हैं उसका न तो कोई चश्मदीद गवाह है और न ही कोई सबूत। इसलिए मैं राजेश के खिलाफ कोई सख्त कार्यवाई नहीं कर सकता फिर भी मैं उसे समझा दूंगा कि दोबारा ऐसी हरकत न करे। शिकायत करने से आप लोगों की भी बदनामी होगी। इसलिए आप लोग भी अपनी क्लास में जाइए।’आपका कहना भी ठीक है सर, बिन चश्मदीद गवाह और सबूत के कोई कार्यवाई नहीं हो सकतीÓ नमिता ने अपने अंदर के आक्रोश को दबाते हुए प्रिंसिपल के चेहरे की ओर देखा फिर बोली, ‘सर, प्लीज आप अपना मोबाइल नंबर दे दीजिए। ताकि अगर दोबारा कोई ऐसी घटना ना घटे तो हम लोग आपको आकर डिस्टर्ब करने के बजाय मोबाइल पर ही आपको सूचित कर सकें।प्रिंसिपल साहब ने अपना मोबाइल नंबर दे दिया तो नमिता ने हिमानी और इद्राणी को बाहर चलने का इशारा किया। वे दोनों प्रिंसिपल के आश्वासन से संतुष्ट नहीं थीं, लेकिन नमिता उन्हें लगभग जबरदस्ती बाहर ले आई। उसके चेहरे पर छाए भावों को देख कर लग रहा था कि वह कोई निर्णय ले चुकी है।
‘रैंगिंग करने वालों के खिलाफ इतने सख्त कानून बन गए हैं मगर प्रिंसिपल ने कोई कार्यवाई नहीं की और तुम हम लोगों को बाहर ले आई बाहर आते ही हिमानी फट पड़ी।’प्रिंसिपल कार्यवाई करेंगे लेकिन उसके लिए उन्हें मजबूर करना पड़ेगा नमिता ने कहा।’वह कैसे? ‘तुम क्लास में जाओ। मैं इंद्राणी को लेकर एक बार फिर राजेश के पास जा रही हूं। वहां पहुंचने से पहले मैं तुमको और प्रिंसिपल साहब को कॉन्फ्रेंस काल कर मोबाइल अपने जेब में रख लूंगी। तुम अपने मोबाइल का स्पीकर ऑन रखना ताकि वहां होने वाली बातें पूरी क्लास सुन सके। इंद्राणी अपने मोबाइल के रिकार्डिंग मोड को चालू रखेगी ताकि वहां होने वाली बातें रिकार्ड हो सकें नमिता ने अपनी योजना समझाई फिर इंद्राणी की ओर मुड़ते हुए बोली, ‘अगर तुमको डर लग रहा हो तो हम लोग अपना इरादा त्याग सकते हैं।’अगर उन लोगों ने मेरे साथ हंसी-मजाक किया होता तो मैं उन्हें माफ कर देती, लेकिन उन लोगों ने हमें खिलौना समझ कर खेलने की कोशिश की है। इसलिए मैं उन्हें कभी माफ नहीं कर सकती। उन्हें समझाना होगा कि आज की लड़कियां न केवल हर फील्ड में उनकेसाथ कंधे से कंधा भिड़ा कर खड़ी है, बल्कि जरूरत पडऩे पर उन कंधों को झुकाना भी जानती है इंद्राणी का चेहरा क्रोध से तमतमा उठा। उसकी आंखों में कुछ कर गुजरने की तमन्ना समाई हुई थी।’तो फिर चलो अपने ‘मिशन एंटी-रैगिंग कोकामयाब करते हैं नमिता ने अपना हाथ आगे बढ़ाया तो इंद्राणी और हिमानी ने अपने-अपने हाथ उसके हाथ पर रख दिये। हिमानी अपनी क्लास की ओर चल दी। 
वहां कई स्टूडेंट्स पहले से बैठे थे। उनकी बातों से लग रहा था कि उनमें से कइयों की रैगिंग हो चुकी है।राजेश अपने साथियों के साथ अभी भी वहीं डटा था। उसे देखते ही नमिता ने कॉन्फ्रेंसिंग हेतु पहले हिमानी का नंबर डायल किया फिर प्रिंसिपल साहब का।’लगता है तोता मैडम का एक बार की रैंगिंग से मन नहीं भरा तभी दोबारा रैंगिंग करवाने आ गई हैÓ राजेश ने उन्हें देखते ही ठहाका लगाया।’सर, क्या आपको पता नहीं है कि रैंगिंग करना अब गैर-कानूनी घोषित हो चुका है नमिता ने शांत स्वर में कहा।’अरे, ऐसे कानून तो मेरे जेब में पड़े रहते हैं। तुम बताओ दोबारा किस लिए आई हो? राजेश ने उसे घूरते हुए कहा।’आपने रैंगिंग के नाम पर इस बेचारी का कुर्ता क्यूं फाड़ा? नमिता ने पूछा।’हुक्म उदूली की कुछ तो सजा मिलनी चाहिए। इन मोहतरमा से कोई खजाना नहीं मांगा गया था केवल ‘शीला की जवानी पर दो-चार ठुमका दिखाने के लिए कहा गया था लेकिन इनको उस पर भी एतराज था राजेश ने कहा फिर बेशर्मी से हंसते हुए कहा, ‘लेकिन कोई बात नहीं। अब आप आ गई हैं इनकी जगह आप ठुमके दिखा दीजिए।’और अगर नहीं दिखाऊं तो?’तो आपका भी वही हाल होगा जो इनका हुआ है। ‘मिस्टर राजेश, मैं आपकी शिकायत प्रिंसिपल साहब से करूंगीÓ नमिता ने दांत पीसे।’जरूर कर देना राजेश ने ठहाका लगाया फिर बोला, ‘वह मेरे बाप का खरीदा हुआ कुत्ता है। उनकी कृपा से ही वह प्रिंसिपल बना है, इसलिए हमारे आगे-पीछे दुम हिलाना उसकी ड्यूटी है।’अपने प्रिंसिपल के खिलाफ ऐसी बातें करना आपको शोभा नहीं देता। अगर उन्होंने सुन लिया तो आफत आ जाएगी नमिता ने टोका।’कोई आफत नहीं आएगी। अगर उसने सपने में भी मेेरे खिलाफ कुछ करने की जुर्रत की तो अगले ही दिन उसे निकाल बाहर किया जाएगा राजेश ने कहा फिर मुस्कराता हुआ बोला, ‘बेकार की बातों में टाइम बर्बाद मत करिए। जल्दी से ठुमके दिखा दीजिए, फिर अपनी क्लास में जाइए।’मैं आपकी कोई बात नहीं मानूंगी नमिता का स्वर सख्त हो गया।मानना तो तुम्हें भी पड़ेगा, बेबी राजेश के मुंह से गुर्राहट निकली और उसकी आंखें लाल हो गईं।अगर नहीं माना तो क्या आप इंद्राणी की तरह मेरा भी कुर्ता फाड़ देंगे।Ó नमिता ने कहा।
‘तुम्हारा तो मैं उससे भी बुरा हाल करूंगा! राजेश आगे बढ़ते हुए बोला।’नहीं तुम ऐसा नहीं कर सकते नमिता चीख पड़ी।राजेश ने अपना हाथ आगे बढ़ाया ही था कि शोर सुन कर रुक गया। फस्र्ट ईयर के लड़कों का हुजूम उनकी ओर दौड़ता चला आ रहा था। सबसे आगे हाथ में मोबाइल थामे हिमानी चल रही थी। इससे पहले की वह कुछ समझ पाता भीड़ ने उसे घेर लिया।’मिस्टर राजेश, यहां पर आपने जो कुछ कहा था उसे मोबाइल के स्पीकर पर पूरी कक्षा में सुन लिया है। आपको प्रिंसिपल साहब के पास चलना होगा हिमानी अपना मोबाइल लहराते हुए चिल्लाई।’उसकी जरूरत नहीं है। मैं स्वयं यहां आ गया हूं तभी प्रिंसिपल साहब की आवाज सुनाई पड़ी। शोर सुन कर वह भी बाहर आ गए थे।’सर, आपने भी अपने मोबाइल पर अपने बारे में इस शिष्य के विचार सुन लिए होंगे नमिता ने काट खाने वाले अंदाज में प्रिंसिपल की ओर देखते हुए कहा।’हां, बेटी सुन लिया है और मैं अभी अपना इस्तीफा दे रहा हूं प्रिंसिपल साहब ने कहा। उनका चेहरा शर्म से लाल था।यह सुन वहां सन्नाटा छा गया। किसी को भी ऐसी स्थिति की कल्पना नहीं थी। चंद पलों के लिए नमिता भी हतप्रभ रह गई थी फिर उसने सन्नाटा भंग करते हुए कहा, ‘सर, पलायन किसी समस्या का हल नहीं है।’लेकिन इतना कुछ होने के बाद मैं अब यहां काम करने की स्थिति में नहीं हूं प्रिंसिपल साहब के होंठ थरथराए।
‘सर, दोषी आप नहीं हैं बल्कि वह है जिसने उद्दंडता की है, इसलिए सजा भी उसी को मिलनी चाहिए न कि आपको इतना कह कर नमिता पल भर के लिए रुकी फिर बोली, ‘आप अपने अधिकारों का प्रयोग कर दोषियों को सजा दीजिए। यहां की सारी बातों की रिकाडग हमारे पास है। अगर किसी ने बदतमीजी करने की कोशिश की तो मैं उसे पुलिस के साथ-साथ महिला आयोग को भी दे दूंगी।यह सुन प्रिंसिपल के चेहरे पर पहले राहत के चिह्नï उभरे फिर धीरे-धीरे उनका चेहरा सख्त हो गया। वे राजेश को घूरते हुए बोले, ‘मिस्टर राजेश, आप पहले सबके सामने इन लड़कियों से हाथ जोड़ कर माफी मांगें फिर लिखित माफीनामा पेश करें, वरना आपको कालेज से रिस्टीकेट कर दिया जाएगा।’आप जो कह रहे हैं उसका अंजाम जानते हैं राजेश दांत पीसते हुए गुर्राया।’कालेज की बदनामी न हो इसीलिए मैं यह कह रहा हूं, लेकिन शायद तुम अपना अंजाम नहीं जानते। अगर यह रिकाडग पुलिस और महिला आयोग के पास गई तो तुम्हें जेल जाने से कोई नहीं बचा सकता। उसके बाद तुम्हारे कैरियर का क्या होगा। इसका अंदाजा तुम खुद लगा सकते हो। प्रिंसिपल साहब का स्वर सख्त हो गया था।
यह सुन राजेश के बल ढीले पड़ गए, लेकिन वह सबके सामने माफी मांगने में हिचकिचा रहा था। इसलिए बोला, ‘मैं आपके ऑफिस में आकर लिखित माफीनामा दे दूंगा।’ओ.के., अगर तुम आग से खेलना चाहते हो तो ऐसा ही सही।Ó प्रिंसिपल ने गहरी सांस भरी फिर नमिता की ओर देखते हुए बोले, ‘बेटा, तुम लोग इस रिकाॄडग को पुलिस और महिला आयोग को भेजने के लिए स्वतंत्र हो। मेरी तरफ से कोई प्रतिबंध नहीं है।’सर, मामला बाहर जाने से हमारे कालेज की बदनामी होगी। इसलिए राजेश और उसके साथियों को माफी मांगने का एक मौका मिलना चाहिए, वरना अगर ये रिकाॄडग बाहर गई तो धरने-प्रदर्शन शुरू हो जाएंगे और राजेश के साथ-साथ इसके पिता की भी पोलिटिकल कैरियर तबाह हो जाएगाÓ एक छात्र रजनीश कुमार ने कहा। यह सुन राजेश का जोश बिल्कुल ठंडा हो गया। उसने हाथ जोड़ कर सबके सामने सभी लड़कियों से माफी मांगी और वहीं पर एक माफीनामा लिख कर प्रिंसिपल को दे दिया।प्रिंसिपल साहब ने उसे पढ़ा फिर नमिता की ओर देखते हुए बोले, ‘तुम उस रिकाॄडग की एक कापी मुझे भी दे दो। वह राजेश को भविष्य में भी अनुशासित रखने के काम आती रहेगी।
इतना कह कर उन्होंने वहां जमा छात्रों की भीड़ की ओर देखा फिर बोले, ‘चंद छात्रों की उद्दंडता की आंच आपके कालेज की प्रतिष्ठा पर न आने पाए इसलिए मुझे विश्वास है कि आप लोग इस घटना की खबर को अपने तक ही सीमित रखेंगे।’यस सर सभी छात्रों ने एक स्वर में उनकी बात का समर्थन किया। नमिता, इंद्राणी और हिमानी का हाथ पकड़ कर अपनी क्लास की ओर चल दी। सबके चेहरे पर एक अनोखा आत्मविश्वास झलक रहा था।
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