एक अध्ययन के अनुसार सिकल सेल विकार भारत में खासकर मध्य और पश्चिमी क्षेत्रो में काफी फैला हुआ है। फिर भी लोगों के पास इस बीमारी से जुड़ी जानकारी काफी कम हैं। एक अनुमान के मुताबिक भारत में हर साल 5200 शिशु सिकल सेल बीमार के साथ पैदा होते हैं। जिनमें से कुछ शिशु जन्म के कुछ समय बाद ही दम तोड़ देते हैं और जो जिंदा बच जाते हैं वे पूरे जीवन कष्टों को झेलते रहते हैं। यही नहीं सिकल सेल रोग वैश्विक स्तर पर बहुत बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। यदि आप भी इस रोग के बारे में नहीं जानते हैं तो इस लेख के माध्यम से जानें सिकल सेल रोग के बारे में विस्तार से।  
 
क्या होते हैं सिकल सेल रोग
 
सिकल सेल रोग लाल रक्त कोशिका संबधी विकार है और यह अनुवांशिक होता है। यानी माता-पिता से प्राप्त आसामान्य ‘जीन’ से बच्चों में उत्पन्न होता है। इसलिए यह रोग संक्रामक नहीं होता है। वैज्ञानिक अनुसंधान में पाया गया है कि सिकल सेल जीन मलेरिया के प्रति आंशिक सुरक्षा प्रदान करता है और सामान्यतः मलेरियाग्रस्त क्षेत्रों में पाया जाता है। जैव विकास के दौरान सिकल सेल जीन अफ्रीकी पूर्वजों में उत्पन्न हुआ और इसके मलेरिया प्रतिरोधी गुण के कारण अन्य मलेरियाग्रस्त क्षेत्रों में भी तेजी से फैल गया। यह अफ्रीका के अलावा भूमध्य सागर, मध्य पूर्व और भारत में पाया जाता है। यह बीमारी यूरोप, अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र में भी पायी गयी है। भारत में यह छत्तीसगढ़, उड़ीसा, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु और केरल के कुछ हिस्सों में पायी जाती है।
 
कैसा होता है सिकल सेल रोग
 
सिकल सेल रोग वाले लोगों में लाल रक्त कोशिकाओं में असामान्य हीमोग्लोबिन होता है जिसे “सिकल हीमोग्लोबिन” कहा जाता है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला प्रोटीन है जो कि पूरी बाॅडी में आॅक्सीजन ले जाता है, जिनमे सिकल सेल रोग पाया जाता है, उनमें दो असामान्य हीमोग्लोबिन देखे जाते हैं जो कि बच्चे में माता-पिता से आते हैं। सिकल सेल रोग के सभी रूपों में कम से कम दो असामान्य जीनों में से एक व्यक्ति के शरीर में आसामान्य बनाने की वजह होता है। क्योंकि सामान्य लाल रक्त कोशिकाएं (RBC) उभयावतल डिस्क के आकार की होती हैं और रक्तवाहिकाओं में आसानी से प्रवाहित होती हैं, लेकिन सिकल सेल रोग में लाल रक्त कोशिकाओं का आकार अर्धचंद्र/हंसिया (सिकल) जैसा हो जाता है। ये असामान्य लाल रक्त कोशिकाएं कठोर और चिपचिपी होती हैं तथा विभिन्न अंगों में रक्त प्रवाह को अवरुद्ध करती हैं। अवरूद्ध रक्त प्रवाह के कारण तेज दर्द होता है और विभिन्न अंगो को क्षति पहुँचाता है।
सिकल सेल रोग के अन्य रूप
 
जब एक व्यक्ति के पास दो हीमोग्लोबिन एस (सिकल हीमोग्लोबिन) जीन होते हैं, तो हीमोग्लोबिन एसएस, बीमारी को सिकल सेल एनीमिया कहा जाता है । यह सबसे आम और अक्सर सबसे गंभीर प्रकार का सिकल सेल रोग है। हीमोग्लोबिन एससी रोग और हीमोग्लोबिन एस बी थैलेसीमिया सिकल सेल रोग के दो अन्य रूप हैं। इस बीमारी के बारे में ज्यादा से ज्यादा जागरूकता फैलाकर ही सिकल सेल रोग से बचाव किया जा सकता है।