Vithika Yadav about Awareness: समाज में आज भी यौन स्वास्थ्य और गर्भ समापन अथवा स्वैच्छिक गर्भपात जैसे मुद्दों पर खुलकर बात करना आसान नहीं है। ऐसे में मानवाधिकार कार्यकर्ता वीथिका यादव युवाओं तक सही और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाने का महत्वपूर्ण काम कर रही हैं। महिला दिवस के अवसर पर गृहलक्ष्मी ने उनसे उनके सफर और महिलाओं के स्वास्थ्य व अधिकारों पर खास बातचीत की।
प्रश्न.1 अपने बचपन और परिवार के बारे में कुछ बताइए?
मेरा बचपन राजस्थान के अलवर में बीता। हमारे परिवार में शिक्षा को बहुत महत्व दिया जाता था। मेरे माता-पिता दोनों सरकारी सेवा में थे। उन्होंने हमें सिखाया कि किसी भी बात को बिना सोचे-समझे स्वीकार न करें, बल्कि सवाल पूछें। घर में तो खुलापन था, लेकिन समाज में कई सीमाएँ दिखाई देती थीं, खासकर लड़कियों से जुड़े विषयों पर। इन्हीं अनुभवों ने मुझे निडर बनने और दूसरों की बात ध्यान से सुनने की सीख दी, जिसने आगे चलकर मेरे काम की दिशा तय की।
प्रश्न.2 इस क्षेत्र में काम करने की प्रेरणा कैसे मिली?
भारत में बड़ी होने वाली कई लड़कियों की तरह मुझे भी अपने शरीर या यौन विषयों पर सवाल पूछने में झिझक होती थी। काम की शुरुआत में मुझे उन किशोरियों के साथ काम करने का अवसर मिला जो तस्करी, हिंसा और शोषण जैसी कठिन परिस्थितियों से गुजरी थीं। कई लड़कियों को अपने शरीर और अधिकारों के बारे में सही जानकारी ही नहीं थी। एक लड़की ने मुझसे कहा था, “मुझे समझ ही नहीं आता कि सच क्या है।” उसी समय मुझे महसूस हुआ कि सबसे बड़ी समस्या भरोसेमंद जानकारी की कमी है। यही बात मुझे इस क्षेत्र में काम करने के लिए प्रेरित करती रही।
प्रश्न.3 आपकी पढ़ाई ने इस दिशा में कैसे मदद की?

मैंने लेडी श्रीराम कॉलेज से इतिहास में स्नातक किया। इतिहास पढ़ते हुए यह समझ विकसित होती है कि समाज और अधिकार समय के साथ बदलते हैं और उन्हें पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। कॉलेज के समय ही मैंने तय कर लिया था कि मुझे मानवाधिकार के क्षेत्र में काम करना है। पढ़ाई ने व्यवस्था को समझने का नजरिया दिया, जबकि लोगों के अनुभवों ने मुझे सक्रिय होकर काम करने की प्रेरणा दी।
प्रश्न.4 लव मैटर्स इंडिया, टीन बुक और प्रतिज्ञा अभियान का साझा उद्देश्य क्या है?
इन सभी पहलों का उद्देश्य एक ही है—यौन और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर खुली, भरोसेमंद और बिना झिझक वाली बातचीत को बढ़ावा देना। हमारे समाज में इन विषयों के आसपास चुप्पी और गलत धारणाएं बहुत गहरी हैं। हमारा प्रयास है कि खासकर युवाओं को ऐसा मंच मिले, जहाँ वे बिना डर अपने सवाल पूछ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें। डिजिटल माध्यमों के जरिए स्पष्ट और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना आज के समय की बड़ी आवश्यकता है।
प्रश्न.5 इन विषयों पर समाज में झिझक क्यों बनी हुई है?
लंबे समय से इन विषयों को खुलकर चर्चा के योग्य नहीं माना गया। कई लोगों को यह डर होता है कि यदि बच्चों को जानकारी दी गई तो वे गलत रास्ते पर चले जाएँगे। इसके साथ ही लड़कियों के प्रति कठोर दृष्टिकोण भी एक कारण है। इस स्थिति को बदलने के लिए परिवारों को बच्चों से उम्र के अनुसार खुलकर बातचीत करनी चाहिए और स्कूलों में वैज्ञानिक यौन शिक्षा को शामिल करना जरूरी है।
प्रश्न. 6 गर्भ समापन के कानून होने के बावजूद क्या चुनौतियां हैं?
भारत में गर्भ समापन से जुड़े कानून प्रगतिशील माने जाते हैं, लेकिन जमीन पर अभी भी कई कठिनाइयां हैं। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षित डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है। कई महिलाओं को यह भी पता नहीं होता कि किन परिस्थितियों में गर्भ समापन कानूनी है। इसके अलावा सामाजिक दबाव और गोपनीयता को लेकर चिंता भी बड़ी समस्या बन जाती है।
प्रश्न. 7 महिला दिवस पर गृहलक्ष्मी की पाठकों के लिए आपका संदेश?
हर महिला को अपने शरीर और जीवन से जुड़े निर्णय लेने का अधिकार है। सुरक्षित प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं मूल अधिकार का हिस्सा हैं। सही जानकारी प्राप्त करना बहुत महत्वपूर्ण है और स्वास्थ्य सेवाएँ लेना जिम्मेदारी का कदम है। जब महिलाएँ जागरूक होंगी और एक-दूसरे का साथ देंगी, तभी समाज अधिक स्वस्थ और मजबूत बनेगा।
गीता ध्यानी द्वारा वीथिका यादव (कैंपेन एडवाइजरी ग्रुप मेंबर, प्रतिज्ञा कैंपेन फॉर सेफ अबॉर्शन को-फाउंडर, लव मैटर्स फाउंडर, टीनबुक) से बातचीत के प्रमुख अंश

