‘‘मेरी पहली गर्भावस्था में प्रीटर्म बर्थ हुआ था हालांकि मैं इससे जुड़े सभी खतरों का इलाज करा चुकी हूं लेकिन क्या अब भी यही समस्या हो सकती है?’
मुबारक हो! यदि आप पहले ही सारी चिकित्सा करवा चुकी हों तो आपका शिशु बिल्कुल सही समय पर ही इस धरती पर कदम रखेगा।हालांकि आप डॉक्टर के साथ मिलकर कुछ ऐसे और कदम भी उठा सकती हैं जिससे प्रीटर्म बर्थ का कोई खतरा ही न रहे। सबसे पहले तो अपने डॉक्टर से पूछें कि इस बारे में कोई ताजा अध्ययन हुए हैं?
 

शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि 16 से 36 सप्ताह के दौरान यदि शॉट या जेल के रूप में प्रोजेस्टेरॉन हार्मोन दिए जाएं तो प्रीटर्म बर्थ के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है।आप भी अपने डॉक्टर की राय से इसे लेसकती हैं। फिर अपने डॉक्टर से पूछें कि क्या आपके स्क्रीनिंग टेस्ट करवाने की जरूरत है या नहीं क्योंकि इन टेस्टों के पॉजिटिव नतीजे का मतलब होता है कि आगे और जांच करनी होगी।

फैटल फाइबरोनेक्टीन (Fatal Fibronectin) स्क्रीनिंग जांच से योनि में प्रोटीन का पता तभी चलता है अगर एम्नीयोटिक सैक गर्भाशय की दीवारों से अलग हो जाए (यह समय से पहले प्रसव पीड़ा का संकेत है)।अगर इस जांच की रिपोर्ट निगेटिव आती है तो फिर घबराने की कोई बात ही नहीं है। यदि जांच पॉजिटिव आती है और प्रीटर्म लेबर का खतरा दिखाई देता है तो डॉक्टर आपकी गर्भावस्था को लंबा करने का उपाय कर सकते हैं या शिशु के फेफड़ों को समय से पहले होने वाले प्रसव के लिए तैयार कर सकते हैं।

दूसरे स्क्रीनिंग टेस्ट से सर्विक्स की लंबाई पता चलती है। इसे अल्ट्रासाउंड की मदद से मापा जाता है। यदि यह छोटी है या इसके खुलने के संकेत मिलते हैं तो डॉक्टर आपको बेडरेस्ट की सलाह दे सकते हैं या फिर सर्विक्स में टांके लगा सकते हैं। (यदि अभी 22 सप्ताह नहीं हुए)।जानकारी से हमेशा ताकत मिलती है,लेकिन इस मामले में आप दूसरे शिशु का समय पर प्रसव सुनिश्चित कर सकती हैं और यह एक अच्छी बात है।

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