- बार-बार पेशाब आने पर 60 ग्राम भुने चने खाकर उपर से थोड़ा गुड़ खायें। दस दिन लगातार सेवन करने से यह समस्या ठीक हो जाएगी। ज्कोयादा उम्र वालों को ज्यादा दिन तक यह खुराक लेनी चाहिए। पाचन-शक्ति यदि बिगड़ी हो तो भी यह प्रयोग करें।
- सवेरे-संध्या गुड़ से बना हुआ तिल का एक लड्डू खाने से बार-बार पेशाब आना बन्द होता है। आवश्यकतानुसार चार-पांच दिन खायें। सर्दियों में तो यह बहुत ही उत्तम रहता है।
- पेशाब बार-बार और अधिक मात्रा में आये तो कुछ दिनों तक दोपहर को भोजन के पश्चात 2 पके केलों का सेवन करना चाहिए। यह रोग अंगूर खाने से भी दूर हो जाता है।
- कटे तरबूज को रात में ओस में रख दें। प्रातः उसका रस निकालकर शक्कर मिलाकर पीने से पेशाब की जलन दूर होती है।
- सोते समय पेशाब करने वाले बच्चों के मसाने कमजोर हो जाते हैं। एक छुहारा धोकर कपड़े से साफ कर 250 मि. ली. दूध में डालकर उबालें। दूध उबल जाये और छुहारा फूल जाए तो दूध को चूल्हे से उतार लें और ठंडा कर बच्चे को पिला दें। चार-पांच दिन के प्रयोग से ही फर्क ।
- एक किलो पानी में 50 ग्राम प्याज के टुकड़े उबालें, उबलने पर छानकर, शहद मिलाकर नित्य तीन बार पिलाने से पेशाब खुलकर आता है। यदि पेशाब बंद हो गया हो, तो वह भी आने लगता है।
- 5 नग प्याज लेकर, उसको छीलकर चटनी की तरह पीसकर, उतना की गेहूं का आटा डालकर हलुवा-सा बना लें और हल्का गर्मकर पेट पर इसका लेप कर लेट जायें। पेशाब आने लगेगा।
- 2 ग्राम जीरा व 2 ग्राम मिश्री दोनों को पीसकर लेने से रूका हुआ पेशाब खुल जाता है। दिन में तीन बार लें।
- कलमी शोरा 3 ग्राम, दूध 250 ग्राम, पानी एक किलो। सबको मिलाकर बगैर मीठे के दो बार पिलायें। पेशाब खुलकर होगा। यह हर मौसम के लिए है।
- पेशाब किसी भी कारण से बंद हो तो 2 ग्राम अरण्ड का तेल गर्मपानी में मिलाकर पीने से पंद्रह-बीस मिनट में पेशाब खुलकर आ जाता है।
- गुर्दों की खराबी से यदि पेशाब बनना बंद हो जाए तो मूली और मूली के पत्तों का रस 60 ग्राम की मात्रा में पीने से वह फिर से बनने लगता है। इससे पेशाब की जलन और वेदना शांत हो जाती है।
- मक्के के भुट्टे के बाल दो तोला, एक पाव पानी में उबालिए। पानी एक छटांक रहने पर छानकर, ठंडा करके पिएं। पेशाब खुलकर होने लगेगा।
- यदि बच्चा बिस्तर पर पेशाब करता है तो रात में 3 ग्राम शंखपुष्पी दूध के साथ देने पर लाभ मिलता है।
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