आसन कब करें?
आसन सुबह के समय करना ही सबसे अच्छा होता है। सुबह आपके पास समय नहीं है, तो शाम या रात को खाना खाने से आधा घंटा पहले भी कर सकते हैं। यह ध्यान रखें कि आपका पेट न भरा हो। भोजन करने के 3-4 घंटे बाद और हल्के स्नैक्स लेने के 1 घंटें बाद योगासन कर सकते हैं। चाय-छाछ आदि पीने के आधे घंटे बाद और पानी पीने के 10-15 मिनट बाद आसन करना बेहतर रहता है।

ये सावधानियां बरतें
योग में विधि, निरंतरता, एकाग्रता और सावधानी जरूरी है।
कभी भी आसन झटके सेन करें और उतना ही करें, जितना आसानी से कर पाएं। धीरे-धीरे अभ्यास बढाएं।

  • कमर दर्द हो तो आगे न झुकें, पीछे झुक सकते है।
  • अगर हार्निया हो तो पीछे न झुकें।
  • दिल की बीमारी हो या उच्च रक्तचाप हो तो तेजी के साथ योगासन नहीं करना चाहिए। शरीर कमजोर है, तो फिर आराम से करें।
  • 3 साल से कम उम्र के बच्चे योगासन न करें। 3 से 7 साल तक के बच्चे हल्के योगासन ही करें। 7 साल से ज्यादा उम्र के बच्चे हर तरह के योगासन कर सकते हैं।
  • गर्भावस्था के दौरान मुश्किल आसन और कपालभाति बिल्कुल भी न करें। महिलाएं मासिक धर्म खत्म होने के बाद, प्रसवोपरांत 3 महीने बाद और सिजेरियन ऑपरेशन के 6 महीने बाद ही योगासन कर सकती हैं।

ये गलतियां बिलकुल न करें –
किसी भी आसन के फाइनल पॉस्चर (अंतिम बिंदु) तक पहुंचने की जल्दबाजी बिलकुल भी न करें। अगर आपका तरीका थोड़ा-सा भी गलत हो गया, तो फिर अंतिम बिंदु तक पहुंचने का कोई लाभ नहीं मिलेगा। मसलन, हलासन में पैरों को जमीन पर लगाने के लिए घुटने मोड़ लें, तो बेकार है। जहां तक आपके पैर जाएं, वहीं रूकें, लेकिन घुटने सीधे रखें।

नियंत्रण

योगासन करते हैं, तो फिर आपको खाने पर निंयत्रण करना भी जरूरी होता है। अगर आप अत्यधिक कैलोरी और अत्यधिक वसा युक्त वाला खाद्य पदार्थ या फिर तेज मिर्च-मसाले वाला खाना खाते रहेंगे तो फिर योग का कोई खास असर नहीं होने वाला है।

जब भी बीमारी से छुटकारा पाने के लिए योगासन करें, तो विशेषज्ञ से पूछकर ही करें। योग का असर तुरंत नहीं होता है। ऐसे में दवाएं भी तुरंत बंद न करें। जब बेहतर लगे, जॉच भी कराते रहें, फिर उसके बाद ही डॉक्टर की सलाह से दवा बंद करें।

योगासन का असर होने में थोड़ा वक्त लगता है। फौरन नतीजों की उम्मीद नहीं करें। कम-से-कम खुद 6 माह का समय दें। फिर देखें- असर हुआ या नहीं।

योग वस्तुतः जीवनशैली और जीवन जीने का मार्ग है। इसे अपना कर अनेक असाध्य रोगों से मुक्ति संभव है।