फ़ीमेल फ़िल्म प्रोड्यूसर होना कितना मुश्किल है?

बतौर प्रोड्यूसर यह मेरी दूसरी फ़िल्म है। पहले “एन एच 10” प्रोड्यूस की थी। उसके बाद दूसरी फ़िल्म “फ़िल्लौरी” प्रोड्यूस करने की हिम्मत की है। यह सच है कि एक एक्टर का काम और ज़िम्मेदारी कम नहीं होती, लेकिन प्रोड्यूसर की ज़िम्मेदारी बहुत ज़्यादा होती है। डे-टू-डे इशूज़ होते हैं। अगर आपका और टीम का विज़न क्लीयर हो, गोल सही दिशा में हो तो काम आसान हो जाता है। हां, फ़ीमेल होने के नाते कुछ मुश्किलें आती हैं, लेकिन जब आपके आसपास के लोग सपोर्टिव हों तो सब आसान हो जाता है।

आपके भाई करमेश भी प्रोड्यूसर हैं, साथ काम करना मुश्किल होता है या आसान?

कहते है कि सिबलिंग के साथ काम करना मुश्किल होता है, लड़ाई ज़्यादा होती है, लेकिन मेरा अपने भाई के साथ कम्फ़र्ट लेवल बहुत है। ट्रस्ट भी बहुत करती हूं, करमेश और मेरा सोचने का और दुनिया को देखने का नज़रिया, वर्क एथिक्स सब सेम है। काम आसान हो जाता है। हमारे प्रोफ़ेशन अलग रहे, मैं एक्टिंग में आ गई, भाई मॉर्चंट नेवी में है। उनके सपोर्ट के बिना प्रोडक्शन हाउस बनाना नामुमकिन था। हम दोनों एक दूसरे के लिए ईक्वली इम्पॉर्टेंट हैं।

चुनौतियों का सामना कैसे करती हैं?
मैंने हमेशा से अपने बारे में एक चीज़ नोटिस की है कि जब मुझ पर ज़्यादा ज़िम्मेदार, ज़्यादा चैलेंज आते हैं तो मैं और ज़्यादा स्ट्रांग और एक्टिव हो जाती हूं। मेरी काम करने की कशामता बढ़ जाती है, मुझमें इतनी एनर्जी है कि मैं एक साथ कई काम कर सकती हूं। मैं अपने अन्दर की आवाज़ सुनती हूं, कुछ स्ट्रांगली फ़ील होता है तो करने से डरती नहीं हूं। मैंने इंडस्ट्री में जगह बनाई है, लोगों का विश्वास हासिल किया है। अब तक जितनी फ़िल्म की हैं, “बॉम्बे वेलवेट “की छोड़कर सभी कामयाब हुई हैं। काम को लेकर जो भी चुनौतियां आएंगी, स्वीकार करूंगी, लेकिन अपने विज़न के साथ कॉम्प्रोमाइज़ नहीं करूंगी। वही गेम खेलूँगी जो मुझे आता है।

नान फ़िल्मी बैकग्राउंड की होने से स्टारडम हैंडल करना कितना मुश्किल है?

मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक्टिंग लाइन में आऊंगी। सब कुछ अचानक बहुत तेज़ी से मेरी ज़िंदगी में हुआ। अपने करियर के शुरुआती दिन में मैं बहुत रेस्टलेस फ़ील करती थी, धीरे-धीरे समझ आने लगा कि क्या करना है और क्या नहीं। मैं हार्ड वर्किंग हूं, काम परफेक्शन से करती हूं। 2018 में मुझे इस इंडस्ट्री में काम करते दस साल हो जाएंगे, लेकिन मैंने कभी भी स्टाररडम हावी नहीं होने दिया। मैं बहुत सिम्पल हूं। स्टार्डम टेम्परेरी होता है। इतने बड़े स्टार होने के बावजूद जिस डेडिकेशन से तीनों खान या मिस्टर बच्चन काम करते हैं, वो वाक़ई तारीफ़-ए क़ाबिल है। अपने आप को ग्राउंडेड रखना, अपनी वैल्यूज़ को समझना मेरे लिए बहुत इम्पोर्टेंट है।

आपका फ़ैशन मंत्र क्या है ?

कुछ भी नहीं। मुझे सिम्पल कपड़े पसंद हैं जो कंफर्टेबल हों, मौसम के अनुसार हों, हल्के रंग के हों, साथ ही लाइट कॉटन हो तो बहुत ही अच्छा है। आजकल के डिज़ाइनर्स में ध्रुव वर्मा मुझे अच्छा लगा और सब्यसांची का लहंगा मेरा फ़वरेट है।

 

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