1.  मिर्ज़या से आपके करियर की शुरुआत हो रही है ? आपका रिएक्शन ?

मिर्ज़या को मैं सिर्फ़ एक फ़िल्म की तरह नहीं ले सकता यह मेरी लाइफ़ का एक फ़ेज़ है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता । इस तरह की फ़िल्म का हर एक आर्टिस्ट इंतजार करता है, मैं तो ख़ुशक़िस्मत हूँ कि मिर्ज़या मेरी डेबयू फ़िल्म है। यह एक लार्जर-देन-लाइफ़ मूवी है, इसकी गिनती हर शुक्रवार को रिलीज़ होने वाली फ़िल्म में नहीं होनी चाहिए ।

2. फ़िल्म के लिए किस तरह की तैयारी की थी आपने ?

इस फ़िल्म के लिए मैंने 18 महीने तैयारी की है। छः महीने दिल्ली में रहा, वर्क्शाप की, हॉर्स राइडिंग की एक्स्पर्ट ट्रेनिंग ली, साथ ही स्क्रिप्ट पर काम किया। फ़िल्म में मेरे दो लुक्स हैं, एक आदिल जो राजस्थान का घोड़े के अस्तबल में काम करने वाला मज़दूर है और दूसरा मिर्ज़ा जो एक वॉरीअर है । आदिल के लिए मुझे दुबला रहना था उसकी बॉडी में फैट का एक भी अंश नहीं दिखना था। मिर्ज़ा के लिए मैंने क़रीब सात किलो वेट बढ़ाया । मुझे बाल व दाढ़ी भी बढ़ानी पड़ी ।

3. क्या आप हमेशा से एक्टिंग को अपना प्रोफ़ेशन बनाना चाहते थे ?
नहीं, जब छोटा था तो राइटर बनाना चाहता था। तब मैं सोचता था कि अच्छी कहानी लीखूँगा, लेकिन फिर लगा कि ऐक्टिंग करना चाहिए । 18 -19 साल का होते होते मुझे क्लीयर हो गया था कि मैं  ऐक्टिंग की ही लाइन में आना चाहता हूं। मैं समझ गया था कि इसे ही अपना प्रोफ़ेशन बनाना है ।

5. फिल्म को लेकर आपकी फ़ैमिली का रिएक्शन कैसा है ?
मेरी फ़ैमिली का रिएक्शन काफ़ी नॉर्मल है। क्यूंकी कोई सर्प्राइज़्ड नहीं है । डैड ने तो फ़िल्म देख भी ली है, उन्हें पसंद भी आई है । मॉम और बाकी फ़ैमिली मेम्बर्ज़ उत्साहित जरूर है ।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

6. ऐक्टिंग के अलावा और क्या शौक़ है ? 

मुझे फ़ुट्बॉल खेलने का बहुत शौक़ है पर कुछ समय से खेल बंद है । शूटिंग के दौरान चोट वग़ैरह का डर था, अब प्रमोशंज़ में बिज़ी हूँ । मुझे घूमने जाने का भी बहुत शौक़ है।

7. एेसी कौन सी जगह है जहाँ बार-बार जाना चाहेंगे?
मैं पिछले चार साल से लगातार टोरंटो जा रहा हूँ । वहाँ आयोजित फ़िल्म फ़ेस्टिवल में जाना मुझे बहुत अच्छा लगता है। पूरे समय ख़ूब अच्छी-अच्छी फिल्में देखता हूं। बहुत ही कम्प्लीट इंडिपेंडेंट वाली फ़ीलिंग होती है । वहाँ मैं बार-बार जाना चाहता हूँ और एकदम अकेले। मुझे लगता है कि किसी के साथ आप उस वातावरण को और वहां दिखाई गई फ़िल्मों का मज़ा नहीं ले सकते है ।

 

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8. किस प्रकार की फ़िल्मे देखने का शौक़ रहा ?
मुझे हर तरह की फिल्में देखने का शौक़ रहा है। पहले तो अमेरिकन और युरोपीयन फिल्में बहुत देखी। फिर 1999 – 2000 में जब मैं 9-10 साल का हुआ तो हिंदी फ़िल्मे देखने में मज़ा आने लगा। उस वक़्त ‘दिल चाहता है’ , ‘लक्ष्य’ , ‘रंग दे बसंती’ , ‘ब्लैक फ़्राइडे’ , ‘पुकार’ और ‘नायक’ जैसी फ़िल्मे देखी ।

9. एेसी कोई फ़िल्म है जो आपने पाँच से ज़्यादा बार देखी हो ?

फ़िल्म तो नहीं है, हाँ,  ‘दिल चाहता है’ की मेकिंग को मैंने पाँच से ज़्यादा बार जरूर देखा होगा । इस फ़िल्म की बिहाइंड द सीन यू ट्यूब पर है। इसे देखकर मालूम होता है कि कैसे इंडस्ट्री में कुछ नया करके नये लोग स्टार्स बन गए । फ़रहॉन अख्तर, अंजुम भासिम, शंकर ईशान लॉय, अधुना और एवान रवि चंद्रन सभी का काम देखने लायक है। दरअसल, इस फ़िल्म के बाद इंडस्ट्री में फ़िल्म मेकिंग प्रॉसेस में चेंज आया है।

10. ज़्यादातर देखा गया है कि लड़कियां अपने पापा के क़रीब होती है और लड़के मम्मी के । आपके घर में क्या सीन है ?

हमारे घर में भी बिलकुल ऐसा ही सीन है। सोनम और रिया डैड के क़रीब है और मैं मॉम के नज़दीक हूँ। अकेला लड़का हूं और वो भी सबसे छोटा, तो मॉम मेरे लिए काफ़ी प्रोटेक्टिव और केयरिंग हैं ।

 

 

 

 

 

 

 

 

10.  आप में और अनिल जी में क्या कुछ समानता है ?

नहीं, डैड का स्वभाव और पर्सनैलिटी एकदम अलग है। मैं शायद उनके जैसा नहीं हूं। अगर मैं उन के जैसा बनाने की कोशिश करूँगा, तो वो फ़ेक लगेगा । वैसे मैं अपनी सिस्टर सोनम की तरह हूं, सब कुछ बोल देता हूं । सोनम बहुत स्वीट और पॉज़िटिव है । पापा और सोनम का मीडिया से रेपो हमेशा अच्छा रहा है, मैं भी वैसे ही बनना चाहूँगा । मैं कह सकता हूं कि मुझे भी इंटरैक्शन में मज़ा आ रहा है ।

11. खाने में क्या पसंद है ?
मैं सोचता हूँ कि जीने के लिए खाना खाना चाहिए, न कि खाने के लिए जीना चाहिए। वैसे, मुझे बिरयानी पसंद है और मुझे पाकिस्तानी खाना पसंद है। उनकी निहारी हलीम, कबाब, बिरयानी जैसे डिश मुझे पसंद हैं। यह सब खाना मुग़लई खाने से अलग होता है और उनके खाने में बेहतरीन फ्लेवर होते  हैं । यहा तो वैसा स्वाद नहीं मिलता है, लेकिन जब मैं अमेरिका में पढ़ रहा था, तो वहां कॉलेज में बहुत बढ़िया पाकिस्तानी खाना मिलता था । मुझे भी खाना बनाना सीखना है । मेरी सिस्टर रिया बहुत अच्छी कुक है और वो हर डिश टेस्टी बनाती है ।

12. अापका आइडियल कौन है ?
मैं किसी एक को आइडियल बनाकर नहीं चलता कि उसी के पद चिन्हों पर चलना चाहूं। मैं किसी भी अच्छे इंसान की अच्छाइयों को फ़ॉलो करने के लिए तैयार हूँ ।

 

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