अधिकतर युवा अक्सर सोचते हैं कि किस प्रकार अपने कैरियर का चुनाव करें जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो और वे अपने जीवन में वह सबकुछ पा सकें, जो वो चाहते हैं I परन्तु इसके लिए उन्हें क्या करना होगा, एक तो इसकी जानकारी उनके पास नहीं होती I
Author Archives: Neeraj Gupta
चमत्कार को नमस्कार
इस विषय पर अपनी बात प्रारम्भ करने से पहले हम स्पष्ट कर देना चाहेंगें कि हमारा उद्देश्य न तो किसी की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाना हैं और न हीं किसी पर अनावश्यक दोषारोपण करना ! हम तो मात्र आपके सामने कुछ तथ्य रखना चाहते हैं, जिससे चमत्कार सम्बन्धी बातों पर भरोसा करने से पहले आप उनको अच्छे से परख लें ताकि नीहित स्वार्थी तत्वों द्वारा ठगे जाने की संभावना न रहे I
अपनी सोच को तार्किक बनाएं
स्वतंत्रता के पश्चात हमारे देश में शिक्षा का प्रसार तो हुआ, परन्तु उससे जो परिवर्तन हमारी सोच में आना चाहिए था, वह कहीं नज़र नहीं आता I आज भी ऐसे बहुत से क्षेत्र हैं जहां हम अपनी सदियों पुरानी दकियानूसी सोच से उबर नहीं पाए हैं, जिसके चलते बड़ी-बड़ी डिग्रियां लेकर भी हम सही अर्थों […]
अपराध पीड़ितों के प्रति नज़रिया बदलें
हमारे देश में बलात्कार व यौन-उत्पीड़न की घटनाएं तेज़ी से बढ़ती जा रही हैं I इसमें सैद्धांतिक रूप से सबकी सहानुभूति पीड़ितों के साथ होनी चाहिए, परन्तु अगर कहा जाए कि उनके संपर्क में आने वाले अधिकतर लोग अपेक्षित सहयोग देने के स्थान पर जाने-अनजाने उनके घावों पर नमक छिड़कने का ही काम करते हैं, […]
अपने जीवन से प्यार करें !
इस लेख का शीर्षक पढ़कर आप चौंक गए होंगें, यह भी कोई बात हुई, भला अपने जीवन से कौन प्यार नहीं करता ! परन्तु यदि आप मीडिया के द्वारा रोज़ आने वाली दुर्घटनाओं संबंधी विभिन्न ख़बरों पर गौर करें, तो ऐसे अनेक किस्से मिल जायेंगे, जब पीड़ित ने आ बैल मुझे मार की तर्ज़ पर […]
कोरोना संक्रमण : एक आपदा, कई सन्देश
आज समूचा विश्व कोरोना-संक्रमण नामक जिस भयावह आपदा से जूझ रहा है, उसने हमें एक ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया है, जहां किसी को पता नहीं कि अगले पल क्या होगा I कौन इस महामारी के चंगुल में फंस जाएगा, चंगुल में फंसकर कौन जीवित बच पायेगा और जीवित बचों में से भी कौन फिर […]
लिखें रिश्तों की नई परिभाषा
मानव-जीवन में रिश्तों की अपनी अलग महत्ता होती है I कुछ रिश्ते जन्म के साथ स्वयमेव जुड़ जाते हैं, जिन्हें खून के रिश्ते कहते हैं जबकि कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जो बाद में हमारे साथ जुड़ जाते हैं I यों तो मानव-निर्मित होने के कारण ये रिश्ते बहुत नाज़ुक होते हैं, परन्तु यदि कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो ये मात्र औपचारिकता न रहकर खून के रिश्तों के समान ही पारिवारिक सुख व संतोष का कारण बन सकते हैं I
