सम्पादक जी से दीपावली पत्रिका के लिए कहानी लिखने का तीसरा स्मरण पत्र भी आ गया। कहानी लिखने के लिए मैं बैठा- वह माया रूपी कल्पना; मेरी पकड़ से बच कर कहीं भाग गयी, गुम हो गई। मैं जब चाहूँ, बुलाऊँ तो क्या आयेगी? खुली हुई औरों की तरह, प्रकाश में आने से सकुचा रही […]
