Bird Story: एक चिड़िया थी जो रोज दाना चुगने के लिए अपने बच्चों को घोंसले में छोड़कर दूर जंगलों के पार बस्तियों में जाया करती थी। एक दिन किसी घुरे पर उसने एक चने का दाना पाया। वह उसे लेकर चक्की में दलने के लिए गयी। दाल दलते-दलते एक दाल खूटे में फंसी रह गयी। […]
Author Archives: डॉ. नीलोत्पल रमेश
ढोल से निकली छोटी बहन-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं झारखण्ड
Hindi Short Story: एक बार अकाल पड़ा। लोग रोजी-रोटी की तलाश में इधर-उधर जंगल-पहाड़ों में भटकने लगे। परिवार बिखरने लगे। एक परिवार में छह आदमी थे जिनमें दो बहनें बड़की और छोटकी भी थीं। एक दिन दोनों को बहुत जोर की भूख लगी। दोनों केंद फल खाने जंगल में निकल पड़ी। केंद खाते-खाते रात हो […]
कारा और गूजा-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं झारखण्ड
Unity Story: एक समय कारा और गूजा नाम के दो भाई थे दोनों श्रेष्ठ श्रेणी के धनुर्धर, धनुष और बाण के परिचालन में अति दक्ष थे। जिस राज्य के वे नागरिक थे, वहाँ एक चील के जोड़े ने बहुत उपद्रव मचा रखा थाः ये दोनों चील पेड़ पर के एक घोसला में रहने वाले अपने […]
कुंवर और राजा की बेटी-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं झारखण्ड
Lok Katha: किसी समय एक धनवान व्यापारी एक राजा के नगर में रहता था; और राजा ने एक विद्यालय की स्थापना की ताकि उसके अपने बच्चों की कुछ शिक्षा-दीक्षा हो जाये, और नगर के लड़के-लड़कियां राजा के बेटे-बेटियाँ और उन सभी के साथ धनवान व्यापारी का बेटा जिसका नाम कुंवर था वह भी पाठशाला जाने […]
जादुई गाय-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं झारखण्ड
Cow Story: किसी समय एक राजा था उसके एकलौता पुत्र का नाम कारा था और कालांतर में राजा अतिशय दरिद्रता से घिर गया बस उसकी स्थिति भिखारी से थोड़ी ही बेहतर रह गई थी। एक दिन जब कारा कुछ बड़ा हो चरवाहा का काम करने के लायक हो गया तो राजा ने उसे बुलाया और […]
चरवाहे को कैसे दुल्हन मिली-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं झारखण्ड
Folk Story: एक बार एक ग्वाला जो कि एक रेवड़ का चरवाहा था और नित्य मध्याह्न में अपने रेवड़ को पीपल के पेड़ के नीचे विश्राम करने के लिए ले कर आया करता था। एक दिन पीपल का पेड़ ग्वाला से बोला “यदि तुम मेरे जड़ में प्रतिदिन दूध उड़ेला करोगे तो मैं तुम को […]
बन्दर बेटा-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं झारखण्ड
Monkey Story: एक बार एक आदमी जिसके छः बेटे और दो बिटियाँ थीं। उसकी मृत्यु के समय उसकी पत्नी के गर्भ में उसका नौवां संतान था और जब लड़का का जन्म हुआ तो वह बंदर के सदृश्य दिखता था। गाँव वाले और रिश्तेदार ने जननी को इससे निर्मुक्ति का परामर्श दिए। परन्तु माता ने इसे […]
करमू और धरमू-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं झारखण्ड
Lok Kathayen-किसी समय करमू और धरमू दो सगे भाई थे। करमू किसान था और धरमू व्यापारी। एक बार जब धरमू अपने घर से बाहर गया हुआ था तब करमू ने एक धार्मिक सहभोज का आयोजन किया और उसमें धरमू के परिवार वालों को नहीं बुलाया; जब धरमू लौट कर आया तो उसे यह सब विदित […]
त्याग का फल- 21 श्रेष्ठ लोक कथाएं झारखण्ड
त्याग का फल: बहुत पहले की बात है। एक गाँव में एक बूढ़ा और बुढ़िया रहते थे। उन्हें एक बेटा था। उन्होंने उसका नाम चतुर रखा था। वे बहुत गरीब थे। चतुर बहुत कम ही उम्र का था, तभी उसके माता-पिता मर गए। छोटी उम्र में ही चतुर को नौकरी करनी पड़ी। गाँव के कुछ […]
पलाश-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं झारखण्ड
एक घना जंगल था। इसमें तरह-तरह के जंगली जीव-जन्तु रहते थे। जंगल तीन ओर से ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों से घिरा था और एक ओर एक बड़ी नदी बहती थी। पहाड़ बहुत ऊँचे थे और नदी बहुत गहरी और चौड़ी थी। इसे पार करना बहुत कठिन था। इसलिए बाहर का कोई व्यक्ति जंगल के भीतर नहीं पहुँच […]
