Summary:केरल में ब्रेन ईटिंग अमीबा से हड़कंप, जानें कैसे बचें इस संक्रमण से
यह संक्रमण प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (PAM) नामक घातक बीमारी का कारण बनता है। स्वच्छ पानी और सतर्कता ही इससे बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।
Brain-Eating Amoeba in Kerala: केरल में एक दुर्लभ लेकिन अत्यंत घातक संक्रमण से दहशत का माहौल बना हुआ है। इस संक्रमण ने स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ-साथ आम लोगों की भी चिंता काफी बढ़ा दी है। इस संक्रमण का मुख्य कारण है ‘ब्रेन ईटिंग अमीबा, जिसे आम बोलचाल की भाषा में ‘दिमाग खाने वाला अमीबा’ भी कहा जाता है, यानी नेग्लेरिया फाउलेरी, जो प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस का जिम्मेदार है। इस संक्रमण से केरल में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है। आइए जानते हैं क्या है ब्रेन ईटिंग अमीबा, इसके लक्षण और बचाव के उपाय के बारे में।
क्या है ब्रेन ईटिंग अमीबा

ब्रेन ईटिंग अमीबा नेग्लेरिया फाउलेरी नामक एक सूक्ष्म अमीबा के संक्रमण से होता है। यह आकर में काफी छोटा होता है, इसी वजह से यह नाक के जरिए शरीर में प्रवेश करके सीधा दिमाग में पहुंच जाता है। दिमाग के टिशू मुलायम होने के कारण, यह अमीबा आसानी से उनपर अटैक करता है और उन्हें धीरे-धीरे गलाना शुरू कर देता है, जिसकी वजह से 98% संक्रमित व्यक्ति जिंदा नहीं बच पाता है।
क्या है ब्रेन ईटिंग अमीबा के कारण
बढ़ते तापमान के कारण अमीबिक मेनिन्जाइटिस के मामले बढ़ रहे हैं। गर्म परिस्थितियां इस रोगाणु के लिए एक आदर्श प्रजननस्थल बनाती हैं। ब्रेन ईटिंग अमीबा गर्म, मीठे पानी वाले स्थान जैसे झील, तालाब, गर्म पानी के स्विमिंग पूल, या टैंक में मुख्य रूप से पाया जाता है।
क्या है ब्रेन ईटिंग अमीबा के लक्षण

इसका शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू के समान होता है, जो आमतौर पर संक्रमण के लगभग 9 दिन के बाद दिखाई देने लगते हैं। ये इसके कुछ मुख्य लक्षण हैं, जैसे कि तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, मतली और उल्टी, गर्दन में अकड़न की समस्या, रौशनी से डर, नींद में बदलाव आना और चक्कर महसूस होना।
क्यों खतरनाक है यह संक्रमण

प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (PAM) एक दुर्लभ लेकिन अत्यंत घातक मस्तिष्क संक्रमण है। यह मुख्य रूप से बैक्टीरिया या वायरस के कारण होता है, लेकिन कभी-कभी अमीबा के कारण भी मस्तिष्क पर हमला हो सकता है। यह संक्रमण काफी तेजी से फैलता है और इसे मस्तिष्क खाने वाला अमीबा भी कहा जाता है, क्योंकि यह मस्तिष्क को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है।
क्या है ब्रेन ईटिंग अमीबा से बचाव

ब्रेन ईटिंग अमीबा तेजी से फैलने वाला संक्रमण है, जो मस्तिष्क को प्रभावित करता है। अगर समय से इसका इलाज न किया जाए तो 48 से 72 घंटे के अन्दर ही व्यक्ति की मृत्यु तक हो सकती है। लेकिन अगर समय से एमआरआई समेत इससे जुड़ी बाकी जांच करवाकर व्यक्ति की जान बच सकती है। ब्रेन ईटिंग अमीबा के इलाज के दौरान डॉक्टर एंटी-एमीबिक दवाओं का उपयोग करते हैं, लेकिन बहुत कम मामलों में ही मरीज पूरी तरह ठीक हो पाता है।
- ब्रेन ईटिंग अमीबा दूषित पानी के संपर्क में आने से शरीर में प्रवेश करता है और फिर व्यक्ति संक्रमित हो जाता है। इससे बचने के लिए तालाबों और जलाशयों में तैरने से बचना चाहिए।
- स्विमिंग पूल और वाटर टैंक के पानी को नियमित रूप से क्लोरीनेशन और सफाई जरूर करवाएँ।
- सीधे नल का पानी नाक में डालने से बचें।
