Hundred Dates
Hundred Dates

Hindi Love Story: “अ…आ…आई लव यू” मैंने ब-मुश्किल अटकती ज़बान से कहा। मेरी नज़रों ने जैसे डाका डाला हो, सड़क की ओर देखती, गुनाह के ख़्याल से झुक गईं।

हम लॉन्ग ड्राइव पर थे और एक घंटा ही हमारे पास बचा था। मैंने यह प्रपोज़ल रखने के लिए पहले भी कई बार ख़ुद को रोका था और आज भी ऐसा कोई इरादा तो नहीं था। शायद! आजकल हर शाम-सुबह कभी भी आ जाने वाली बेहद हसीन इमेजिनेशन्स, और आज परवान पर रहा इश्क़ ही इस बेचैन झोकें का ज़िम्मेदार रहा हो;जिससे मैं यह बकवास कर गया।

कोई जवाब ना पाकर मैंने उसकी शक्ल, नापतौल की पाक नीयत से निहारी। मुखड़े पर कोई भाव था या अनगढ़ चेहरा ही पढ़े जाने की चुनौती। सपाट चेहरे दहशतगर्दी पसारते हैं। मुझसे कोई भूल हुई है, यह सोचते हुए शरीर के साथ मन भी पसीने से तरने लगा।

“तुमने कोई जवाब नहीं दिया, क्या मुझसे कोई ग़लती हुई?”

“हाँ! यह तुम्हारी ग़लती ही तो है कि तुम ‘आई लव यू’ को वह सवाल समझते हो, जिसका तुम्हें जवाब चाहिए।” उसके चेहरे पर बेज़ायक़ा मुस्कान खेलती दिखी।

“सवाल नहीं? फिर भी तो है ही।” मैंने समझने की कोशिश करते हुए ख़ुद को फिर से समेटा। कहा-“तुम्हें कुबूल है या नहीं, यह तो सवाल है ना?”

“हा…हा…हा…लड़कपन की किन कहानियों में उलझे हो अब तक? प्यार तुम्हें है, यह तुम पक्का करो। मुझे क़बूल है या नहीं, इसकी फ़िक्र में तुम क्यों पड़ते हो? क्या मेरे कुबूलने या इंकार कर देने से तुम्हारे ख़्याल बदल जाने वाले हैं? और प्यार में क्या ऐसा कुछ है कि, अगर मैंने कुबूलने की बात नहीं बताई तो तुम मुझे अब प्यार नहीं दे पाओगे? और अब तक जो हमारे बीच था, क्या वह कुछ अलग था?”

मुझे जवाब नहीं सूझा। उसके चेहरे के दृढ़ भाव, ब्रेल लिपि के उभरे हुए अक्षरों की तरह दिखे – हमारी मोहब्बत किन्ही शब्दों की मोहताज नहीं। जिस मुक़ाम पर हम हैं; वहाँ ये शब्द अर्थहीन, बल्कि टुच्चे और निकम्मे हैं।

ना जाने क्यों, पर मेरी समझ पर पुर-सुकून से लबालब शीतल हाथ फिरते हुए महसूस हुए।