self thoughts
Self Thoughts

Self Thoughts: जीवन  में हम कई तरह के अनुभव हासिल करते है और रोज़ कुछ नया सीखते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि कई बार हम औरों से सीखते हैं] तो कुछ लोग हमारे अनुभव और प्रयोगों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लेते हैं। दरअसल, इस समाज में दो प्रकार के लोग होते हैं, एक वो जो अपने अनुभव से सीखते हैं और दूसरे के ज़रिए अनुभव की हुई चीजों को ज्यो का ज्यो अपने जीवन में उतार लेते है। इस दोनों प्रकार के लोगों में से अगर आप उन लोगों की केटेगरी में आते है, जो अपने अनुभवों से रोज़ाना कुछ नया सीख पा रहे हैं, तो आपको अपनी लर्निग्स कों एक डायरी में नोट करना चाहिए। ताकि आप उसे जब भी खोलकर देखें, तो वो आपको याद दिलाएं कि जीवन के किस मोड़ पर आपने क्या सीखा था। आइए जानते हैं  अपने विचारों को लिखने यां उनको सरंक्षित करने के फायदे।

खुद में बदलाव करेंगे महसूस

हमारे जीवन में सुबह से लेकर शाम तक बहुत सी गतिविधियां होती चली जाती है। ऐसे में आपको उन्हें एक डायरी में संग्रहित कर लेना चाहिए। इस प्रकार से आपके पास एक सूची तैयार हो जाएगी, जो आपको इस बात का आभास कराएगी कि आपने जीवन के किस मोड़ पर किस कार्य को अंजाम दिया था और उसका आपको क्या फल प्राप्त हुआ। इस प्रक्रिया से आपके जीवन में कई प्रकार के बदलाव आने आरंभ हो जाएंगे, जो आगे चलकर आपके लिए फायदेमंद साबित होंगे।

एकाग्रता बढ़ेगी

हम में से ऐसे बहुत से लोग है, जो मन को एकाग्र नहीं कर पाते हैं, फिर चाहे पूजा पाठ का समय हो यां फिर रोज़ाना के कार्य। हर वक्त हम एक अलग सी उलझन में रहते हैं। हांलाकि वो बातें कई बार बहुत गंभीर नहीं होती है, मगर फिर भी मन विचलित रहता है। ऐसे में अगर आप रोज़ाना एक क्रम से अपने विचारों को लिखने की आदत डाल लेंगे, तो यकीनन जिदगी में आपको न सिर्फ एक नई दिशा मिलेगी बल्कि आपके अंदर एकाग्रता के गुण का भी समावेश होगा।

नकारात्मक विचार होंगे दूर

जब हम किसी के प्रति कोई विचार बना लेते हैं, तो चाहकर भी मन से उस भाव को नहीं निकाल पाते। अब चाहे वो विचार सकारात्मक हों या फिर नकारात्मक। अगर आप भी ऐसी ही उधेड़बुन से जूझ रहे हैं, तो आपको अपने विचारों को लिखने का प्रयास करना चाहिए। ऐसे में जब आप अपने विचारों को लिखेंगी, तो खुद ब खुद आप जान पाएंगी कि आपने भीतर मन में कितनी नकारात्मकता है। इस प्रकार से आप इस नकारात्मकता से बाहर निकलकर सकारात्मक हो पाएंगी।

आपको अच्छी बातें हमेशा रहेंगी याद

इसमें कोई दोराय नहीं कि जब आप किसी विचार को लिखते हैं, तो वो आपको हमेशा याद रहेगा। इन अच्छे विचारां के संग्रह को अपने पास रखने से न सिर्फ आप जीवन में समय सयम पर इसका इस्तेमाल कर पाएंगे बल्कि अपनी अगली पीढ़ी का भी उचित मार्गदर्शन कर पाएंगे।

तनाव होगा कम

आज के इस दौर में तनाव ने हर मनुष्य को घेरा हुआ है। कोई घरेलु कलह से परेशान है, तो कोई प्रोफेशनल लाइफ को लेकर सेटिसफाइड नहीं है। ऐसे में अगर आप रोज़ाना की बातें एक किताब में लिखती चली जाएंगी, तो आपके मन में उठने वाले विचार और दुविधाएं एक एक कर लफ्जों के ज़रिए किताब में कैद होते चले जाएंगे, जो आपको न सिर्फ तनाव में मुक्त करेंगे बल्कि जीवन में इन सब दुनियावी बातां को छोड़कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी करेंगे। माना ये एक कठिन प्रयास है। मगर रोज़ाना ये प्रैक्टिस करने से आपको जीवन में सफलता ज़रूर हासिल होगी ।

कार्यक्षमता में होगी बढ़ोतरी

अगर आप अपने विचारों को लिखना पसंद करती हैं, तो इससे आपको खुद को इस बात का एहसास हो जाएगा कि आप एक दिन में कितने कामों को अंजाम देती है और कितना समय कहां कहां पर व्यतीत करती है। ऐसे में आप समय को अपने अनुकूल मैनेज करके अपनी कार्यक्षमता को आसानी से बढ़ा सकती है।

स्मरण शक्ति में होगा सुधार

हम रोज़ाना बहुत सारे काम एक जैसे करते है। मगर फिर भी कुछ न कुछ भूल जाते हैं। लेकिन अगर आपको लिखने की आदत है, तो आप आसानी से उन कामों को और उन चीजों को याद रख सकती है। इस प्रकार से आपको किसी काम को लेकर बहुत ज्यादा सोचने की आवश्यकता नहीं होगी और स्मरण शक्ति भी बढ़ेगी।

रचनात्मकता का होगा विकास

लिखते लिखते आपके अंदर विचारों और शब्दों  का एक कोष संग्रहित हो जाता है। अब आप आसानी से अपने विचारों को न सिर्फ एक किताब में उकेर सकते हैं बल्कि अब आप जुगलबंदी करके कविताएं और कहानियां भी खुद बुन सकते हैं। रोजमर्रा की जिदंगी में होने वाले अनुभवों की बदौलत हम बहुत से हालातों से होकर गुज़रते हैं, जो जीवन में हमें कोई न कोई सीख ज़रूर देकर जाते हैं। ऐसे में हम उन घटनाओं को मौकों  को किस्से कहानियों का रूप देकर उन्हें सालों साल अपने पास रख सकते हे। इसके अलावा आप चाहें तो उसे एक किताब की शक्ल भी दे सकते हैं।

खुद से करने लगते हैं à¤ªà¥à¤°à¥‡à¤® 

जब हम अपने विचारों को लिखना आरंभ करते हैं,  तो हमें अपनी छवि उन शब्दों में नज़र आने लगती है। अब वो अच्छी भी हो सकती हैं और बुरी भी। अब हम अपनी कमियां पहचानने लगते हैं और फिर धीरे धीरे उन्हें ठीक करने की भी कोशिश करते हैं। इस प्रकार हम खुद के करीब आते हैं और फिर अपने विचारों और मज़बूत व्यक्तित्व से प्रेरित होने लगते हैं। जब हम अपने आप को पहचानने लगते हैं, तो ऐसे में खुद से प्यार होना स्वाभाविक हैं।

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