a man shouting on a little boy who is covering his ears with hands
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Summary: बच्चों को सुधारने के सही तरीके: सजा नहीं, समझाना है जरूरी

सजा देने के चक्कर में माता-पिता बच्चों के साथ अत्यधिक कठोर हो जाते हैं, जिससे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

Punishment for Children: बच्चे मन से बेहद नादान होते हैं और उन्हें कई बार चीज़ें आसानी से समझ में नहीं आतीं, जिस वजह से वे जाने-अनजाने कई गलतियां कर बैठते हैं, जो माता-पिता को गुस्सा दिला देती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि बच्चों को उनकी गलतियों पर सजा देना सही है या गलत। क्योंकि कई बार ऐसा देखा गया है कि सजा देने के चक्कर में माता-पिता बच्चों के साथ अत्यधिक कठोर हो जाते हैं, जिससे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। तो, आइए जानते हैं कि बच्चों को सजा देना सही है या नहीं।

a woman shouting on a little boy who is covering his ears with hands
Behaving strictly with children

बच्चों को सजा देना एक संवेदनशील मुद्दा है, और यह सही तरीके से किया जाना चाहिए ताकि बच्चे पर नकारात्मक असर न पड़े। बच्चों के मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक विकास को समझते हुए सजा देने के तरीके को निर्धारित करना बेहद आवश्यक है। सजा का उद्देश्य बच्चों को सुधारना और उन्हें सही-गलत का फर्क समझाना होना चाहिए। अगर सजा का उद्देश्य केवल बच्चे को डरा-धमका कर नियंत्रित करना है, तो यह बच्चे के आत्मविश्वास और मानसिक स्थिति पर प्रतिकूल असर डाल सकता है।

सजा का तरीका हमेशा सकारात्मक और सुधारात्मक होना चाहिए। मार पीट की सजा को पूरी तरह से नकारा जाना चाहिए, क्योंकि इससे बच्चों में हिंसा का प्रतिरूप बन सकता है और उनकी मानसिक स्थिति पर बुरा असर पड़ सकता है

  • बच्चों को अपनी गलतियों के नतीजे दिखाना, जैसे उन्हें कुछ समय के लिए कुछ गतिविधियों से रोकना, ताकि वे समझ सकें कि उनकी गलतियों का क्या परिणाम होता है।
  • बच्चों से प्यार से बात करना और उन्हें समझाना कि वे क्यों गलत कर रहे हैं। इससे बच्चे खुद समझते हैं और उनकी गलतियां सुधारने का मौका मिलता है।
  • अच्छे व्यवहार के लिए बच्चों को सराहना और बढ़ावा देना। इससे बच्चों को अच्छा व्यवहार करने की प्रेरणा मिलती है और वे उसे दोहराने की कोशिश करते हैं।
a girl is standing with folded hands in a serious mood with mom talking in background
Do not be strict with the child
  • बच्चों को कठोर सजा देने से उनके मन में भय और चिंता उत्पन्न हो सकती है, और इसके कारण वे अपनी गलतियों को सुधारने के बजाय उन्हें छुपाने की कोशिश कर सकते हैं, जो उनके भविष्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
  • बच्चों को कठोर सजा देने से उनका आत्म-सम्मान और कॉन्फिडेंस पर असर डाल सकता है। वे खुद को कमतर महसूस करने लगते हैं, जिससे उनकी मेंटल हेल्थ कमजोर हो सकती है। यदि बच्चे हमेशा डर के माहौल में रहते हैं, तो वे कभी भी अपने आप को किसी काम के काबिल महसूस नहीं कर पाते, जो उनके विकास में रुकावट डालता है।
  • जब बच्चों को शारीरिक रूप से कठोर सजा मिलती है, तो वे हिंसक व्यवहार दिखाने लग सकते हैं। वे यह सीख सकते हैं कि समस्याओं का हल केवल गुस्से या हिंसा से होता है, जिससे वे दूसरों के प्रति आक्रामक हो सकते हैं। 

स्वाति कुमारी एक अनुभवी डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं, जो वर्तमान में गृहलक्ष्मी में फ्रीलांसर के रूप में काम कर रही हैं। चार वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली स्वाति को खासतौर पर लाइफस्टाइल विषयों पर लेखन में दक्षता हासिल है। खाली समय...