Hindi Motivational Story: हैरी ट्रूमैन को सैन्य जीवन से मोह था। हाई स्कूल पास करते ही उन्होंने न्यूयार्क के सैनिक स्कूल जाना चाहा लेकिन आँख कमज़ोर होने के कारण सफल नहीं हुए। लगातार प्रयास करते रहने के कारण उन्हें पहले विश्वयुद्ध के दौरान सेना में जाने का मौक़ा मिल गया। वह एक सामान्य सैनिक के रुप में भर्ती हुए थे। एक रात जब उनकी घुड़सवार पलटन चढ़ाई करने जा रही थी, जर्मन तोपखाना बेतहाशा बम बरसाने लगा। आसमान में बरसते बमों को देख पूरी पलटन में अफरा-तफरी मच गई। ट्रूमैन भी स्वयं को बचाने की कोशिश कर रहे थे। इसी बीच ट्रूमैन के घोड़े को चोट आई और घोड़ा उनके ऊपर गिर गया। घायल अवस्था में ट्रूमैन किसी तरह घोड़े के नीचे से बाहर आए। उन्हेांने स्वयं को सकुशल पाकर छिपने की जगह शत्रुओं से मुकाबला करना तय किया। वे अपने सभी सैनिकों से बोले “उठो और लड़ो।”
जब तक हमारे हौसले बुलंद हैं, दुनिया की कोई ताकत हमें नहीं हरा सकती।” सैनिक भी ज़ख्मी ट्रूमैन की बुलंद आवाज़ देखकर दंग रह गए और जोश के साथ ख़ुद को नए सिरे से तैयार करके युद्ध करने कूद पड़े।
ट्रूमैन ने अपनी डायरी में लिखा, उस रात मुझे अपने बारे में दो चीज़ें पता चली। पहली, मुझमें थोड़ा साहस था और दूसरी मुझे नेतृत्व करना पसंद था।” उसके बाद ट्रूमैन का आत्मविश्वास और नेतृत्व करने का गुण दिन-प्रतिदिन निखरता गया। एक दिन ऐसा भी आया, जब वह अमरीका के राष्ट्रपति पद पर पहुँए गए। अमरीका के राष्ट्रपति पद पर पहुँचने के बाद ट्रूमैन ने कहा, “प्रत्येक व्यक्ति असंभव की सीमा को पार करते हुए कठिन मार्ग को सरल बना सकता है। बस इसके लिए थोड़े से साहस और आत्म-विश्वास की आवश्यकता होती है।”
ये कहानी ‘नए दौर की प्रेरक कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – Naye Dore ki Prerak Kahaniyan(नए दौर की प्रेरक कहानियाँ)
