क्या आप घूमने के शौकीन हैं और निकट भविष्य में भारत से बाहर जा रहे हैं या आप खेल प्रेमी हैं और आपकी योजना अगले ओलम्पिक खेल देखने के लिए ब्राजील के रियो जाने की है। आप रियो जा रहे हों या नहीं, आपके लिए जीका वायरस से बचने के लिए सावधानी रखना आवश्यक है। जीका वायरस महिलाओं को और खासतौर पर गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चे को प्रभावित करता है। जीका वायरस को अजन्मे बच्चों की महामारी के तौर पर देखा जा रहा है। इसकी वजह से गर्भ में ही भ्रूण के मस्तिष्क का विकास रुक जाता है और बच्चे को माइक्रोसेफाले नामक दिमागी बीमारी हो जाती है। 

पिछले दिनों वेनेजुएला से अमेरिका के टेक्सास लौटे एक व्यक्ति के मामले से एक और नई बात सामने आई कि जीका वायरस मच्छर से नहीं सेक्स संबंधों के माध्यम से भी फैल सकता है। इससे पहले सिर्फ यही माना जा रहा था कि जीका का संक्रमण सिर्फ एडीज मच्छरों के माध्यम से ही होता है। इस नई बात से खतरे की आशंका और भी बढ़ गई है। हो सकता है कि पुरुष इस वायरस के करियर होते हों जो संक्रमण के बाद संबंधों के माध्यम से महिलाओं और अपने बच्चों तक इस वायरस का संक्रमण फैला सकते हों। अभी इस बारे में कोई रिसर्च नहीं हुई है, इसलिए इस बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं है लेकिन यह शंका पूरी तरह से निर्मूल भी नहीं है। जीका वायरस एचआईवी की तरह सेक्स के माध्यम से फैलता तो है लेकिन इसकी तीव्रता और असर एचआईवी एड्स जितना भयंकर नहीं है। यह गर्भ में पल रहे बच्चों पर असर करता है जो बड़ी चिंता का विषय जरूर है। इसका सीधा-सीधा अर्थ यही है कि इसका निशाना हमारी भावी पीढ़ी बन रही है। इस वायरस से संक्रमित बच्चे अविकसित मस्तिष्क और छोटे व विकृत सिर के साथ पैदा होते हैं इसीलिए गर्भवती महिलाओं को खासतौर पर सतर्कता बरतने की जरूरत है। 

लैटिन अमेरिका के कई देशों को अपनी चपेट में ले चुका ‘जीका वायरस’ अब ग्लोबल खतरा बन चुका है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अकेले ब्राजील में 15 लाख लोग इसके खतरे के दायरे में हैं और करीब 50 लोगों की इससे जान जा चुकी है। ब्राजील में करीब चार हजार बच्चे बेहद छोटे विकृत सिर के साथ पैदा हुए हैं। अल सल्वाडोर सरकार ने तो महिलाओं को अगले दो साल तक प्रेगनेंसी से बचने की सलाह तक दे डाली है। ब्राजील के अलावा वेनेजुएला में जीका के 4700 संदिग्ध मामले सामने आए हैं तो वहीं, फ्रांस सरकार ने भी विदेश यात्रा से लौटे पांच लोगों में इसके संक्रमण की पुष्टि की है। न्यूयॉर्क सिटी में तीन और ऑस्ट्रेलिया में दो लोगों में संक्रमण की बात पता लगी है।

उधर, रियो ओलंपिक में मात्र छह महीने बचे हैं और जीका के खतरे के मद्देनजर रियो ओलंपिक को रद्द भी नहीं किया गया है। इसका नुकसान यह होगा कि वहां विश्व भर से पर्यटक आएंगे और यदि तब तक जीका को फैलने से रोका नहीं जा सका तो यह पूरी दुनिया में फैल सकता है।

जीका वायरस का खतरा भारत पर भी मंडरा रहा है। हालांकि भारत में फिलहाल इसका कोई मामला सामने नहीं आया है लेकिन भारत से उन देशों की आवाजाही चलते रहने के कारण यह आशंका भी निर्मूल नहीं है कि जल्द ही भारत में भी इक्का-दुक्का मामले जीका संक्रमण के मिल जाएं।

भारत इस दिशा में सावधानी और सुरक्षा की तैयारी जरूर कर रहा है, कमेटियां बनाई गई हैं, कम्युनिटी स्तर पर निगरानी हो रही है और अनेक तरह के उपाय सुझाए जा रहे हैं, लेकिन फिर भी यहां की जनसंख्या को देखते हुए इसके फैलने की आशंका बढ़ रही है।

भारत में इसका खतरा इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि जीका वायरस एडीज मच्छर से फैलता है और भारत में इन मच्छरों की भरमार है जिनसे मलेरिया होता है। इस वायरस से माइक्रोसेफाले नाम की बीमारी होती है जिसका अर्थ है छोटा दिमाग। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का कहना है कि गर्भवती महिलाएं उन देशों की यात्रा न करें, जहां जीका वायरस फैला हुआ है या फैलने की आशंका है। जो महिलाएं ऐसे देश गई हुई हैं, वे दो सप्ताह के भीतर वायरस की जांच करा लें। जिन लोगों को बुखार, रैशेज, मांसपेशियों में दर्द जैसे लक्षण हों वे भी इसकी जांच तुरंत कराएं और किसी क्लीनिक पर ऐसे मरीज आएं तो स्वास्थ्य विभाग को सूचना दें।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जीका वायरस के संक्रमण को रोकने का सबसे अच्छा उपाय है मच्छरों की रोकथाम। मच्छरों से बचने के लिए पूरे शरीर को ढककर रखें और हल्के रंग के कपड़े पहनें। अपने घर के आसपास गमले, बाल्टी, कूलर आदि में भरा पानी निकाल दें। बुखार, गले में खराश, जोड़ों में दर्द, आंखें लाल होने जैसे लक्षण नजर आने पर अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन और भरपूर आराम करें। 

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