संस्कृत साहित्य में रामकथा का प्रतिपादन सर्वप्रथम आदिकवि वाल्मीकि द्वारा रचित ‘रामायण’ शीर्षक ग्रंथ में किया गया है। प्राचीन कथाओं के अनुसार सृष्टि के रचयिता ब्राह्मण ने स्वप्न में महर्षि वाल्मीकि को दर्शन देकर उन्हें रामायण की रचना के लिए प्रेरित किया तथा यह आश्वासन भी दिया कि वे अपने काव्य में राम के चरित्र का निर्माण जिस प्रकार से करेंगे राम अपने जन्म के पश्चात् उसी प्रकार का आचरण करेंगे। इस प्रकार राम के जन्म से पूर्व ही इस ग्रंथ का निर्माण वाल्मीकि द्वारा किया गया। ऐसी मान्यता है, यद्यपि आदि कवि ने राम के चरित्र की कल्पना सभी गुणों आगार, कौशिल्या के परमप्रिय, हिमालय के समान धैर्यवान, समुद्र की भांति गंभीर, पृथ्वी की भांति क्षमाशील, चन्द्रमा के समान कांतिमान तथा विष्णु के समान बलवान रूप में की तथापि मूल रूप से उन्हें नारायण का चरित्र न देकर नर श्रेष्ठ के रूप में ही प्रस्तुत किया-
