रिमझिम बौछारों के साथ बारिश का मौसम सबको अच्छा लगता है। मन करता है बारिश की बूंदों में सराबोर हो जाओ और खूब मस्ती करो। लेकिन बारिश के मौसम में आपके शिशु को चाहिए कुछ खास देखभाल जिससे आपका शिशु बीमार न पड़े और आप मौसम का भरपूर मज़ा उठा पाएं।
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इन ट्रिक्स से खिलाएं बच्चों को हेल्दी सब्ज़ियां
सब्ज़ियों में कई प्रकार के पोषक तत्व मौजूद होते हैं लेकिन हर एक मां की शिकायत है कि उनका बच्चा सब्ज़ियां नहीं खाता। ऐसे में बच्चों को सब्ज़ियों का पोषण कहां से मिलेगा? कुछ टिप्स आजमाइए और बच्चों को सब्ज़ियां खिलाकर आप भी मॉम से सुपरमॉम बन जाइए।
जानिए क्या हैं ऑटिज्म के लक्षण ….कहीं आपका बच्चा भी तो नहीं है इसका शिकार ?
ऑटिज्म जन्म से लेकर तीन वर्ष की आयु तक विकसित होने वाला रोग है जो सामान्य रूप से बच्चे के मानसिक विकास को रोक देता है। ऐसे बच्चे समाज में घुलने-मिलने में हिचकते हैं, वे प्रतिक्रिया देने में काफी समय लेते हैं और कुछ में ये बीमारी डर के रूप में भी दिखाई देती है।
स्मार्टफोन में ग़ुम होता बचपन, कैसे छुड़ाएं इसकी लत….
सुबह उठने के गुड मॉर्निंग मैसेज से लेकर दिनभर की गतिविधियों में हमारे साथ चलने वाला स्मार्टफोन रात में सोने तक हमारे साथ ही रहता है। इसकी गिरफ्त में बड़े ही नहीं बल्कि बच्चे भी आ गए हैं और स्मार्टफोन ने पूरी तरह से बच्चों को अपना गुलाम बना लिया है।
आपका बच्चा झूठ बोलता है तो ऐसे बदलें उसकी ये आदत
कई बार जब माता-पिता और बच्चों के बीच कम्युनिकेशन गैप होता है तो उनके आपसी संबंध कमजोर होने लगते है जिसके कारण बच्चे अपने माता-पिता से झूठ बोलने लगते हैं ।
ये तरीके अपनाएं और बच्चों को दें अच्छी परवरिश
कई बार माता-पिता के बीच रिश्ता खुशहाल न हो तो बच्चे ये भी महसूस कर लेते हैं और इसका पूरा असर उनकी आने वाली जिंदगी पर पड़ता है और बच्चे भी अपने रिश्ते को लेकर असुरक्षित महसूस करने लगते हैं…..
बच्चों के साथ बॉन्डिंग को मजबूत बनाने के लिए अपनाएं ये टिप्स
बच्चों के साथ बैठकर ज्यादा से ज्यादा बातें करें और उनसे दिनभर की गतिविधियों के बारे में पूछें। खासतौर पर किशोरावस्था की तरफ बढ़ते हुए बच्चों से ज्यादा से ज्यादा बातें करें और उनकी जिज्ञासा को जानने का प्रयास करें।
मां की जान की बाज़ी होता है शिशु का जन्म
मई के महीने में 8 तारीख़ का अपना अलग ही महत्त्व होता है। 8 मई, यानी मदर्स डे। पूरी दुनिया में इस दिन को खास एहसास से जोड़ा जाता है। यूं तो स्त्री का हर रूप ही अपनी मिसाल आप है, फिर भी मां के रूप को ईश्वर का दूसरा रूप कहा जाता है, क्योंकि ईश्वर से मिली जि़ंदगी को जन्म वही देती है। एक बच्चे को जन्म देने के लिए औरत अपनी जान तक को जोखिम में डालती है, इसलिए तो कहा जाता है कि एक बच्चे के जन्म के साथ उस मां को भी दूसरा जीवन मिलता है।
कैसा हो शिशु-आहार
शिशु की निर्भरता यूं तो मां के दूध पर ही सबसे ज्यादा होती है, लेकिन समय बीतने के साथ उसे वैकल्पिक आहार देना शुरू करना भी ज़रूरी होता है। इसी बारे में कुछ अहम जानकारी-
अध्यात्म से संवारें गर्भ से ही बच्चे का व्यक्तित्व
हर मांबाप का यह सपना होता है कि उनकी आने वाली संतान स्वस्थ, प्रभावशाली होने के साथ ही जीवन में सफल रहे। इस सपने को साकार करने के लिए मां-बाप हमेशा प्रयत्न करते रहते हैं। संतान आने वाली वंश की परंपरा को आगे बढ़ाती है।
