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अहिंसा का विचार : एक समग्र व्याख्या

नैतिक सिद्धांत कितने भी महान क्यों न हों, यदि उनमें भ्रांतियां उत्पन्न हो जाती हैं तो वे धीरे-धीरे अपना वास्तविक अर्थ खोकर समाज का उत्थान करने के स्थान पर उसकी प्रगति में ही अवरोध उत्पन्न करने लगते हैं I ‘अहिंसा’ एक ऐसा ही सार्वभौमिक तथा सर्वहितकारी विचार है, जिसकी संकीर्ण व्याख्या, व्यक्ति, समाज व राष्ट्र का उत्थान करने के स्थान पर उन्हें पंगु बना सकती है, अतः आवश्यक है कि इसको सही अर्थों में समझने का प्रयास किया जाए I

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