Posted inमुंशी प्रेमचंद की कहानियां, हिंदी कहानियाँ

मां – मुंशी प्रेमचंद

आज बंदी छूटकर घर आ रहा है। करुणा ने एक दिन पहले ही घर लीप-पोत रखा था। इन तीन वर्षों में उसने करीब तपस्या करके जो दस-पाँच रुपये जमा कर रखे थे, वह तब पति के सत्कार और स्वागत की तैयारियों में खर्च कर दिये। पति के लिए धोतियों का नया जोड़ा लायी थीं, नये […]

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ईदगाह – मुंशी प्रेमचंद

रमजान के पूरे तीस रोज़ो के बाद ईद आई है। कितना मनोहर, कितना सुहावना प्रभात है। वृक्षों पर कुछ अजीब हरियाली है, खेतों में कुछ अजीब रौनक है, आसमान पर कुछ अजीब लालिमा है। आज का सूर्य देखो, कितना प्यारा, कितना शीतल है, मानो संसार को ईद की बधाई दे रहा है। गाँव में कितनी […]

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अलग्योझा – मुंशी प्रेमचंद

भोला महतो ने पहली स्त्री के मर जाने के बाद दूसरी सगाई की, तो उसके लड़के रग्घू के लिए बुरे दिन आ गये। रग्घू की उम्र उस समय केवल दस वर्ष की थी। चैन से गाँव में गुल्ली-डंडा खेलता-फिरता था। माँ के आते ही चक्की में जुटना पड़ा। पन्ना रूपवती स्त्री थी। और रूप और […]

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