बच्चू’ वैसे तो यह कोई नाम नहीं था, पर जब वह बच्चा था तब लोग उसे ‘बच्चू’ बोलने लगे थे और इसी शब्द ने उसके नाम का स्थान ले लिया था। बच्चू इस राजपूत परिवार में चौधरी बलाधीन की पहली पत्नी सावित्री देवी के मायके से उनके साथ आया था। सावित्री देवी के शराबी पिता भोला सिंह ने बलाधीन सिंह से पांच सौ कर्ज लिया था। सो उसे उतारने के लिए दो साल के लिए बच्चू को भोलासिंह की बेटी के अतिरिक्त दहेज का सामान बनकर उसकी ससुराल जाना पड़ा था। सो वह जुबानी एग्रीमैंट के मुताबिक चला आया था।
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पॉपकॉर्न तो छोड़ जाए
यह घटना तब की है जब मैं सात साल की थी। एक दिन हम सब (पापा, मम्मी और चार वर्षीय भाई पिंटू) चिड़ियाघर घूमने गए थे। वहां चिंपैंजी के पिंजरे के पास पहुंचने पर पापा ने पिंटू को डराते हुए कहा, ‘तुम शैतानी बहुत करते हो, आज तुम्हें हम चिंपैंजी के पिंजरे में छोड़कर जाएंगे।’ यह सुनते ही मैंने पिंटू के हाथ में पकड़ा हुआ पॉपकॉर्न का पैकेट छीन लिया और बोली, ‘यह तो हमारे लिए छोड़ जाए, हमें भूख लगेगी तो हम क्या खाएंगे।’
