Posted inहिंदी कहानियाँ

”अकेली”

उनके कोई रिश्तेदार भी नहीं थे, जो थे, सब मुंह मोड़ चुके थे। मैंने उनके अकेलेपन को अक्सर उनकी आंखों में पढ़ा था। वह अक्सर तन्हाइयों से घबरा जाती थीं…

Gift this article