व्यापार से मनुष्य की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है। यदि व्यापार चल जाये तो मनुष्य धनी बन जाता है और यदि नुकसान हो जाये तो बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अत: व्यापार करने से पूर्व इसकी रूप-रेखा तैयार करनी पड़ती है और उचित निर्णय लेकर व्यापार प्रारंभ करना होता है या चल रहे व्यापार को नियम-कानून के तहत धन के आय-व्यय का लेखा जोखा तैयार करना होता है।
