गंगा हिंदू धर्म की ही नहीं, बल्कि भारत तथा समस्त संसार की पवित्र नदी है। गंगा का नाम ही इतना पवित्र है कि जिसे लेते ही तन-मन ही नहीं आत्मा भी पवित्र हो जाती है, इसी कारण इसे पतित पाविनी भी कहा गया है। अपने उद्गम से लेकर सागर में विघटित होने तक भारत […]
Tag: गंगा दशहरा
जानिए गंगा की कहानी तस्वीरों की जुबानी
गंगा देश के लिए नदी ही नहीं भक्ति है पूजा है, मां है…. जिसे सब गंगा मैय्या कह कर पुकारते हैं। भारतीय धर्मग्रंथों में इसे पवित्र नदी माना गया है और इसे माता का दर्जा दिया गया है। गंगा केवल नदी ही नहीं, एक संस्कृति भी है। इसी पावन नदी के किनारे कभी बाणभट्ट ने कादम्बरी लिखकर अपनी लेखनी की धाक जमाई थी। इसी की बालू पर पले नन्दराज की शक्ति से डरकर सिकन्दर की सेना ने आगे बढ़ने से इन्कार कर दिया था। यहीं पाणिनी ने व्याकरण लिखा और पतंजलि ने अपना महाभाष्य लिखकर राष्ट्र को योगसूत्र दिए। चाणक्य ने भी यहीं पर अर्थशास्त्र लिखकर पूरे विश्व को सदा के लिए अपना ऋणी बना दिया। कबीर काशी के थे, पाणिनी सीमा प्रान्त से आए थे, चाणक्य पंजाब से और पतजंलि गौड़े थे। गंगा जल का स्पर्श कर वे आज भी नक्षत्र की भांति जगमग हैं। वेदों के अनुसार इसके दर्शन करने वाले की और इसमें स्नान करने वाले की सात पीढ़ियों को यह पवित्र कर देती है। तो आइए कुछ तस्वीरों के माध्यम से जानते हैं गंगा की कहानी –
गंगा का स्पर्श अपने पूर्वजों का स्पर्श है
दुनियाभर में नदियों के साथ मनुष्य का एक भावनात्मक रिश्ता रहा है, लेकिन भारत में आदमी का जो रिश्ता नदियों-खासकर गंगा, यमुना, नर्मदा गोदावरी आदि प्रमुख नदियों के साथ रहा है, उसकी शायद ही किसी दूसरी सभ्यता में मिसाल देखने को मिले। इनमें भी गंगा के साथ भारत के लोगों का रिश्ता जितना भावनात्मक है, […]
