नवंबर महीने में पड़ने वाले कई त्यौहारों में से एक ‘अहोई अष्टमी’ का भी त्यौहार उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में धूमधाम से मनाया जाता है।
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पुत्रदा एकादशी व्रत 2020: जानिए पुत्रदा एकादशी व्रतकथा और पूजा विधि
एकादशी का व्रत बेहद पुण्यकारी माना जाता है, मान्यता है कि इसे करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है, वहीं पुत्रदा एकादशी व्रत विशेष रूप से पुत्र कामना के लिए रखा जाता है।
इन उपायों को करने से मिलेगी ‘पितृदोष’ से मुक्ति
पितृ हमारे पूर्वज हैं जिन्हें हम देवता के समान पूजते हैं। पितृ हमारे बुजुर्गों के वे सूक्ष्म शरीर हैं जो मृत्यु पर्यंत पुनर्जन्म होने तक विभिन्न लोकों में वास करते हैं तथा अपनी वृत्ति अनुसार भोगों को याद करते हैं, जो उन्होंने इंद्रियों द्वारा इस धरती पर भोगे थे तथा स्थूल शरीर उपलब्ध न […]
जानिए कैसे बदलता और बिगड़ता जा रहा है व्रतों का स्वरूप
क्या हमारे जीवन में कोई ऐसा व्रत है जब हम कह सकें कि हम एक दिन के लिए गुस्सा छोड़ देंगे, किसी की निंदा या चुगली नहीं करेंगे या फिर हम वाट्सअप-फेसबुक या मोबाइल के बिना खुद को एक दिन रखेंगे? शायद नहीं। खाना-छोडऩा आसान है मंदिर जाना, माथा टेकना आसान है इसलिए […]
क्या आप जानते हैं तुलसी से जुड़ी ये 10 बातें
“तुलसी वृक्ष ना जानिए। गाय ना जानिये ढोर।। गुरू मनुज ना जानिये। ये तीनों नन्दकिशोर।।” अर्थात- तुलसी को कभी पेड़ ना समझें गाय को पशु समझने की गलती ना करें और गुरू को कोई साधारण मनुष्य समझने की भूल ना करें, क्योंकि ये तीनों ही साक्षात् भगवान के रूप हैं। ” तुलसी के औषधीय गुण तो हैं ही, साथ ही तुलसी दैवीय शक्ति के रूप में घर-घर पूजी जाती हैं। आज हम आपकों तुलसी के संबंध में 10 खास बातें बताएगे जिन्हें शायद ही आप जानते होगे।
जानिए क्या है ‘श्राद्ध’ की महिमा और महत्त्व
शास्त्रों के मुताबिक, मनुष्य के लिए तीन ऋण बताये गए हैं पहला देव ऋण, दूसरा ऋषि व तीसरा पितृ ऋण। इनमें पितृ ऋण को श्राद्ध या पिंडदान करके उतारना आवश्यक है। क्योंकि जिन माता-पिता ने हमारी आयु,आरोग्यता तथा सुख-सौभाग्य की अभिवृद्धि के लिए अनेक प्रयास किए, उनके ऋण से मुक्त न होने पर हमारा […]
कौए बताते हैं शगुन-अपशगुन, इस तरह देते हैं संकेत
कौए से जुड़े कई शगुन-अपशगुन हमारे समाज में आमतौर पर प्रचलित हैं। वाल्मीकि रामायण के सुन्दर कांड में एक प्रसंग है कि रावण के युद्ध में जाते समय उसके सिर पर कई कौए एक साथ मंडराने लगे, इससे यह सिद्ध होने लगा कि उसका विनाश सुनिश्चित है। इसी प्रकार महाभारत के भीष्म पर्व में भी एक स्थान पर उल्लेख है कि जिस समय कौरवों की सेना युद्ध के लिए चली तो कौओं का झुंड उनके ऊपर मंडराने लगा जो कि सेना एवं सेनापति के विनाश का सूचक है। इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि जैसी मान्यता है कि कौए भावी घटनाओं की सूचना देते हैं यह उनकी कार्यवृत्ति से पता चलता है। जैसा कि कहा गया है कि कौआ या उनका झुंड जिन मनुष्य-मनुष्यों के ऊपर मंडराता है उसका विनाश हो जाता है। जानिए कि किन परिस्थितियों में कौए का दिखाई देना शुभ होता है और किन हालातों में अशुभ –
गुप्त नवरात्रि में ऐसे करें देवी मां की आराधना, रखें इन बातों का ध्यान
नौ शक्तियों के मिलन को ही नवरात्रि कहते हैं। ज्यादातर लोग केवल दो नवरात्रि (चैत्र व शारदीय नवरात्रि) को मानते हैं और पूजते भी हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि हिंदू धर्म के अनुसार एक वर्ष में चार नवरात्रि होती है। जिसमें से दो को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। इन नवरात्रों में […]
