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मज़ाक  – गृहलक्ष्मी कहानियां

विनय आठवीं कक्षा का विद्यार्थी था। वह बहुत तेज तर्रार और शरारती लड़का था। सदा कुछ न कुछ शरारत करता ही रहता था, परन्तु कभी भी पकड़ा नहीं जाता था। उल्टा उसके कारण दूसरों को डाट पड़ जाती थी। एक दिन उसने अपने एक मित्र सुरेश की साइकिल के टायर में पिन चुभो दिया।

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शक्तिला – गृहलक्ष्मी कहानियां

साबित कर दिया शक्तिला ने कि हिम्मत हो तो कोई नहीं डिगा सकता किसी को भी… और लडक़ी की सबसे बड़ी खूबसूरती है, मुश्किलों से लडऩे का हौसला और सही निर्णय लेने की क्षमता। आज अपने नाम को सार्थक कर लिया था उसने…।

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मोहल्ले का इकलौता नल – गृहलक्ष्मी कहानियां

जिस मकान के सामने नल लगा था, उन्हें लोग कह रहे थे आप मजे में रहे। लेकिन अगली सुबह ही उस परिवार को समझ आ गया कि वह किस मुसीबत में पड़ गए हैं..

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वीरा या प्रेरणा – गृहलक्ष्मी कहानियां

सुबह शायद चार बजे थे वीरा को नींद नहीं आ रही थी । बार बार सोने की कोशिश करती, पर नींद थी कि उसका दूर दूर तक कहीं पता न था । मन में अनेक संकल्प चल रहे थे कि उठ कर कुछ पढ़ लूं या कुछ व्यायाम ही कर लूं। वीरा को सुबह सुबह प्राणायाम करने की आदत थी । पिछले तीस सालों से यह सिलसिला चालू था । पर अभी तो रात के दो ही बजे थे। इतनी सुबह उठ गयी तो दिन भर थकावट लगती रहेगी । यही सोच बिस्तर पर पिछले एक घंटे से करवटें बदल रही थी ।

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भरवां बैंगन का साहित्य में योगदान – गृहलक्ष्मी कहानियां

अपने यहां व्यंजन साहित्य की बड़ी मांग है और इसमें स्कोप भी बहुत हैं। भरवां बैंगन में किशमिश, काजू और बादाम डाल दो तो शाही भरवां बैंगन हो जाएगा, यानी कि इसी बैंगन से ढ़ाई सौ और बन जाएंगे।

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अगले जन्म मोहे बेटी ही कीजो – गृहलक्ष्मी कहानियां

भला हो सरकार का, सस्ते होने के कारण घर की रजिस्ट्री मेरे नाम, बिजली का मीटर मेरे नाम, बैंक ने गाड़ी के लिए कर्ज दिया तो गाड़ी मेरे नाम।

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कबीर के ये 10 दोहे करते हैं जिंदगी की कड़वी सच्चाई को बयां

“कबीरा खड़ा बाजार में मांगे सब की खैर, ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर!” ऐसे ही जीवन के प्रति सीख देने वाले कबीर के दोहे सभी के लोकप्रिय हैं। कबीर दास जैसा व्यक्तित्व शायद ही किसी और अन्य हिन्दी साहित्यकार का होगा। कबीर को पढ़ने-लिखने का अवसर नहीं मिला था लेकिन वह हमेशा विद्वानों की ही सानिध्य में वे खूब रहे। उनके लिखे दोहे उनकी शब्दावली इतनी सरल थी कि आज तक सभी के जबानों पर रटी है। वे अपनी बड़ी-बड़ी बातों, विचारों को अपने दोहों के माध्यम से बड़ी सरलता से समझा देते थे। यहां हम आपको तस्वीरों के माध्यम से बताने जा रहे हैं ऐसे ही कबीर जी के 10 लोकप्रिय दोहे जो जीवन की सच्चाई को बयां करते हैं –

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काश! कि एक गृहणी की भी सरकार ने तनख्वाह तय की होती..

    (एक अनुत्तरित सवाल) काश! कि एक गृहणी की भी सरकार ने तनख्वाह तय की होती.._________________   तुम दिन भर करती क्या हो …?हाँ , मैं सचमुच दिन भर करती भी क्या हूँ?मैं एक सामान्य सी गृहणी सुबह से शाम तक जो बिना किसी शुल्क के बनाये रखती है संतुलन सारे परिवार का मैं भला […]

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माँग की सिंदूर रेखा

डॉ. कुमार विश्वास हिन्दी के एक अग्रणी कवि तथा सामाजिक-राजनैतिक कार्यकर्ता हैं। कविता के क्षेत्र में शृंगार रस के गीत इनकी विशेषता है। पढ़िए उनकी कविता ‘माँग की सिंदूर रेखा’ ….

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