फलदीपिका ग्रंथ के अनुसार आयु, मृत्यु, भय, दुख, अपमान, रोग, दरिद्रता, दासता, बदनामी, विपत्ति, निन्दित कार्य, नीच लोगों से सहायता, आलस, कर्ज, लोहा, कृषि उपकरण तथा बन्धन का विचार शनि ग्रह से होता है। अपने अशुभ कार्यकाल के कारण शनि ग्रह को पापी तथा अशुभ ग्रह कहा जाता है। परन्तु यह पूर्णतया सत्य नहीं है।
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तुरंत पाना चाहते हैं शनिदेव की कृपा तो करें ये उपाय
हर मनुष्य को उसके अच्छे-बुरे कर्मों का फल ग्रहों के न्यायाधीश कहलाने वाले भगवान शनिदेव देते हैं। कहते हैं अगर किसी व्यक्ति पर यदि शनिदेव की टेढ़ी नजर पड़ जाए तो वह राजा से रंक बन जाता है और वही दूसरी ओर जिस पर शनिदेव प्रसन्न हो जाएं वह मालामाल हो जाता है। शनिदेव अपने मन के मालिक हैं कब किसी से क्रोधित हो जाएं और कब किसी से खुश इस बात का अंदाजा कोई नहीं लगा सकता। धर्म ग्रंथों में शनिवार के दिन शनि देव को प्रसन्न करने के लिए कई विशेष उपाए बताएं गए हैं जिनसे शनिदेव शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं और उनकी कृपा भी बनी रहती। इन उपायों को सच्चे मन से करने पर शनिदेव अवश्य प्रसन्न हो जाते हैं।
शनि अशुभ भाव में है तो वक्री शनि समय में होगा भाग्योदय
अजीब लगता है यह सुन कर कि वक्री शनि भी भाग्योदय का कारण बन सकता है। अभी तक तो सभी ज्योतिषी शनि के नाम से डराते थे? अब अचानक शनि कैसे जीवन में उत्थान दे सकता हैं?जानिए
