अनाड़ी जी, झूठ हम सहजता से बोल देते हैं, सच बोलने के लिए जान हथेली पर क्यों रखनी पड़ती है?
दीपाली शुक्ला, भोपाल
जीवन के हर हल्के में
हलके इंसान सहजता से
झूठ बोलते हैं
क्योंकि झूठ होता है हलका,
आपकी जान बचाकर
तत्काल रोक लेता है तहलका।
भारी-भरकम लोग
भारी मन से सच बोलते हैं
जो सचमुच भारी होता है,
और तत्काल की
मारामारी होता है।
लेकिन, अभी तक
यही तो है पहेली,
कि जान बचाने के लिए
एक झूठ को मिले
सौ झूठ के कंधे
और सच को मिली
एक इकलौती हथेली।
अगर सेंसरशिप रहे सावधान और चौकस, अच्छी खबरों पर डाले फोकस, तो शर्तिया अपराध कम हो जाएंगे, क्या यह सही है?
टीया ढाका, गुडग़ांव
आपको मालूम है
फिर भी आपके
मन में सवाल है,
अच्छी खबरें
बिकती नहीं हैं
खबरचियों को मलाल है।
जो इन्हें रोकते नहीं हैं
या तो उनकी शुद्धि
में खोट हैं,
या फिर उनकी
बुद्धि में नोट हैं।
चलो मिलकर करते हैं वर्शिप,
चुस्त हो जाय हमारी सेंसरशिप।
अनाड़ी जी, पत्नी पर हाथ उठाने के बाद पति क्या सोचता है, बता सकते हैं?
अनुराधा विरमानी, बेंगलूरू
जबसे मैंने उसको मारा चांटा है,
पता नहीं है किसको कितना घाटा है?
पहले सन्नाटे में बातें करते थे,
अब बातों में पसर गया सन्नाटा है।
परीक्षा में विफलता के भय से आत्महत्या का इरादा रखने वाले बच्चों से आप क्या कहेंगे?
विनीता अग्रवाल, श्रीगंगानगर (राजस्थान)
हारो जीवन में भले
हार-जीत है खेल,
चांस मिले तब जीतना
कर मेहनत से मेल।
मेहनत से कर मेल
किंतु हम क्या बतलाएँ,
डरा रही हैं
बढ़ती हुई आत्महत्याएँ।
कहे अनाड़ी, सुनो
निराशा छोड़ो यारो,
नहीं मिलेगा चांस
जि़ंदगी से मत हारो।
अनाड़ी जी, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के सिर्फ नारों से नारी का क्या भला होगा?
अदिति भारद्वाज, हुगली, (प. बंगाल)
सिर्फ नारों से नहीं
नारे लगाने वालों से
अंतर आएगा,
वे जितने ज़्यादा होंगे
उतनी जल्दी
नारी के जीवन में
जादू-मंतर आएगा।
बेटी अगर पढऩा सीखेगी,
तो दूसरी बेटियों
के लिए भी
लडऩा सीखेगी।
अनाड़ी जी, मित्रता क्या होती है? आपकी नज़र में मैत्री की व्याख्या क्या है?
निर्मला महाजन, अम्बाला
मैत्री एक पुकार है, जाती दोनों ओर,
बिन स्वारथ के प्रेम से, छूती दिल के छोर।
मैत्री टायर-ट्यूब सी, आ जाती जब ऐंठ,
हवा एक की निकलती, दूजा जाए बैठ।।
मैत्री कागज़-पैन सी, रचती है इतिहास,
आवश्यकता जब पड़े, दूजा दीखे पास।।
अनाड़ी जी, ज्ञान अपना अच्छा या पराया?
सारिका वोहरा, मंडी सदर, मंडी
अपना ज्ञान अगर
दूसरे को परास्त कर दे
तो सोचिए, हराया अच्छा,
दूसरे का ज्ञान अगर
आपको परास्त कर दे
तो सोचिए, पराया अच्छा।
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