सुमित्रा महाजन (पद्म भूषण)

2021 के पद्म पुरस्कार की श्रेणी में पद्म भूषण पुरस्कार के तहत पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को सम्मानित किया गया। ताई के नाम से प्रसिद्ध सुमित्रा महाजन मीरा कुमार के बाद लोकसभा अध्यक्ष बनने वाली दूसरी महिला हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में सुमित्रा महाजन को लोकसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सुमित्रा महाजन देश की एकमात्र महिला सांसद हैं, जो एक ही लोकसभा क्षेत्र से, एक ही पार्टी से लगातार 8 लोकसभा चुनाव जीती हैं।

कृष्णन नायर शांताकुमारी चिथ्रा (पद्म भूषण) 

केरल की कृष्णन नायर शांताकुमारी चिथ्रा भारतीय पार्श्वगायिका हैं। शांताकुमारी चित्रा ने अनेक भारतीय भाषाओं में 25,000 से अधिक गीत रिकार्ड किए हैं। चित्रा को छह राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों, आठ फिल्मफेयर पुरस्कार, 36 विभिन्न राज्य फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

बिजॉय चक्रवर्ती (पद्म श्री)

असम में रहने वाली बिजॉय चक्रवर्ती भी 2021 में पद्भम भूषण पुरस्कार पाने वाली 29 महिलाओं की सूची में शामिल हैं। बिजॉय चक्रवर्ती ने अपना राजनीतिक जीवन जनता पार्टी में आरंभ किया और कालांतर में ये क्षेत्रीय असम गण परिषद का हिस्सा हो गईं। 1986 से 1992 तक राज्यसभा में अपनी सेवाएं देने वाली बिजॉय चक्रवर्ती राज्यसभा का कार्यकाल पूरा करने के बाद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गईं।

शांता देवी (पद्म श्री) 

ओडिशा की शांता देवी अनाथों और निराश्रित बच्चों के पुनर्वास के लिए सामाजिक कार्य करने वाली महिलाओं की सूची में शामिल हैं। शांता देवी ने उड़ीसा के एक बहुत पिछड़े आदिवासी इलाके कोरापुट में एक छोटा सा आश्रम शुरू किया। बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए रायगढ़ में सेवा समाज की स्थापना की।

सिंधुताई सपकाल (पद्म श्री) 

सिंधुताई की पहचान ‘अनाथों की मांÓ के रूप में बन चुकी है। सिंधुताई का जीवन बहुत ही कष्टों के बीच व्यतीत हुआ है। पति द्वारा घर से निकाल दिए जाने के बाद सिंधु ताई ने अनंत कष्टों के बीच अपना जीवन व्यतीत किया। आगे चलकर वे बे-सहारा लड़कियों, बच्चों के लिए मां के रूप में सामने आईं, इसीलिए इन्हें अनाथों की मां कहा जाने लगा। सिंधुताई सपकाल एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। 2016 में डी.वाई. पाटिल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च द्वारा साहित्य और 2017 में नारी शक्ति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

छुटनी देवी (पद्म श्री) 

झारखंड की छुटनी देवी को एक समय पर डायन कह कर घर-गांव से निकाल दिया गया था। आज वे हर सामाजिक बुराई से लड़कर गांव में ही एसोसिएशन फॉर सोशल एंड ह्यूमन अवेयरनेस (आशा) के सौजन्य से संचालित पुनर्वास केंद्र चलाती हैं और अपनी जैसी असंख्य महिलाओं की ताकत बन गई हैं। समाज सेवा क्षेत्र में दिए गए योगदान के कारण केंद्र सरकार ने उनका नाम पद्म श्री पुरस्कार के लिए चुना।

अनीता पौलदुरई (पद्म श्री)

भारतीय बास्केटबॉल खिलाड़ी अनीता पौलदुरई तमिलनाडु की रहने वाली हैं। 19 वर्ष की उम्र में  सीनियर नेशनल टीम की कप्तानी करने वाली यह अब तक की सबसे कम उम्र की खिलाड़ी हैं। अनीता ने राष्ट्रीय चैम्पियनशिप के तहत 30 पदक जीतने का रिकॉर्ड भी बताया है। अनीता पहली भारतीय खिलाड़ी हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्क्वॉड का प्रतिनिधित्व करते हुए लगातार नौ एशियाई बास्केटबॉल परिसंघ (एबीसीद्ध) चैंपियनशिप में भाग लिया है।

सुधा सिंह (पद्म श्री) 

2012 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित सुधा सिंह भारत के सबसे प्रसिद्ध एथलीट में से एक हैं। ये 3000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा में एक भारतीय ओलंपिक एथलीट हैं। इन्होंने एशियाई खेलों और महाद्वीपीय चैंपियनशिप के विभिन्न संस्करणों में दो स्वर्ण और चार रजत पदक प्राप्त किए हैं। 2012, 2016 में लगातार दो ओलंपिक खेलों में इन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया था।

सांगखुमी बॉलछौक (पद्म श्री)

सांगखुमी बालछौक को सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए पद्म श्री पुरस्कार प्रदान किया गया है। ये मिजोरम की रहने वाली हैं और मिजोरम के लिए कई वर्षों से काम कर रही हैं। समाज सेवा के क्षेत्र में इनके द्वारा किए गए हर कार्यों की गूंज देश भर में रही है और उनके इसी कार्यों को ध्यान में रखते हुए सांगमुखी बॉलछौक का नाम पद्म पुरस्कार की सूची में शामिल किया गया।

मौमा दास (पद्म श्री)

भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी मौमा दास कोलकाता, पश्चिम बंगाल की रहने वाली हैं। इन्होंने 2000 की आरंभ से अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। मौमा दास ने 2018 में महिला टीम प्रतियोगिता में स्वर्ण सहित राष्ट्रमंडल खेलों में कई पदक भी जीते हैं। इन्हें खेल में उल्लेखनीय योगदान के लिए 2013 में अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

जसवन्तीबेन जमनादास पोपट (पद्म श्री) 

व्यापार और उद्योग श्रेणी में महाराष्ट्र की जसवन्तीबेन जमनादास पोपट गुजराती गृहिणियों के अर्ध-साक्षर समूह की एकमात्र जीवित सदस्य हैं। इन्होंने 50 वर्ष पूर्व लिज्जत पापड़ से अपना कारोबार शुरू किया था। 80 रुपये के लोन से शुरू हुआ यह कारोबार आज 800 करोड़ रुपये से अधिक का हो चुका है। हजारों महिलाओं को रोजगार देकर इन्होंने आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव रखने में अहम योगदान दिया है।

मृदुला सिन्हा (पद्म श्री)

मृदुला सिन्हा एक भारतीय लेखिका होने के साथ-साथ एक कुशल राजनीतिज्ञ भी रहीं। इन्होंने अगस्त 2014 से अक्टूबर 2019 तक गोवा की पहली महिला राज्यपाल के रूप में भी कार्य किया। इन्हें मरणोपरांत पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

इन महिलाओं के साथ ही नीरु कुमार (समाज सेवा), गुरु मां कमली सोरेन (समाज सेवा), लखिमी बरुआ (समाज सेवा), प्रकाश कौर (समाज सेवा), बॉम्बे श्री (कला), पूर्णमासी जानी (कला), निदुमोलु सुमथि (कला), संजीदा खातून (कला- बांग्लादेश), रजनी बेक्टर (उद्यïोग एवं व्यवसाय), पाप्पम्माल (कृषि), लाजवंती (कला), अंशु जमसेंपा (खेल), मंजम्मा जोगति (कला), भूरी बाई (कला), दुलारी देवी (कला), राधे देवी (कला), उषा यादव (साहित्य एवं शिक्षा) के क्षेत्र में पद्म श्री से सम्मानित किया गया। राजनीति, समाज सेवा, कला, साहित्य, कृषि, व्यापार आदि क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देकर इन महिलाओं ने यह साबित कर दिखाया कि वे सबला और शक्ति स्वरूपा हैं। 

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