‘mumma’s boy’ ये शब्द अपने कभी न कभी किसी न किसी लड़के के लिए जरूर सुने होंगे। लेकिन सिर्फ सुनना ही नहीं बल्कि कई दफा देखने का मौका भी मिलता है। दरअसल कई ऐसी महिलाएं हैं, जिनकी शादी ही ‘मम्मास बॉय’ से हुई है। ऐसी महिलाएं पति के ‘मम्मास बॉय’ होने से कई बार इतनी परेशान हो जाती हैं कि यही कुछ कलह का कारण भी बनता है। शुरुआती दिनों में तो पति का ‘मम्मास बॉय’ होना खराब नहीं लगता है लेकिन फिर जब धीरे-धीरे जिंदगी रोजमर्रा की लाइफ वापस आती है तो असलियत खुलती है। छोटी-छोटी बात भी मां से बताने पहुंच जाने वाले पति पर फिर प्यार नहीं सिर्फ गुस्सा आता है। लेकिन हमेशा गुस्सा ही आए, ये जरूरी तो नहीं है। कुछ ऐसे तरीके हैं, जिनके साथ आप ‘मम्मास बॉय’ कहलाने वाले अपने पति के साथ सुखमय जीवन गुजर पाएंगी। इन तरीकों से रूबरू हो लेते हैं, ताकि आपकी जिंदगी थोड़ी आसान हो सके-
सीमा रेखा क्या है-
ज्यादातर पुरुष अपनी पत्नी से वैसा ही व्यवहार चाहते हैं, जैसा, वो अपनी मम्मी के साथ महसूस करते हैं। जैसे मम्मी खाना बनाती हों, जैसे वो घर संभालती हों, ठीक वैसे ही पत्नी भी करे। फिर बात ‘मम्मास बॉय’ की हो तो मामला और पेचीदा हो जाता है। तब तो मानो बच्चों की तरह ध्यान रखने वाली बात हो सकती है। अब ऐसे में ये जरूरी है कि आप पति को पत्नी और मां के बीच अंतर समझा दें। उन्हें बता दें कि आप मां नहीं पत्नी हैं। जब भी वो आपके साथ होंगे उन्हें मां के बेटे नहीं बल्कि आपके पति और आत्मनिर्भर पुरुष की तरह व्यवहार ही करना होगा। इस तरह की सीमा रेखा तय कर लेने से होगा ये कि आप पति के बचकाने व्यवहार से रूबरू नहीं होंगी। और रिश्ते में दिक्कतें कम आएंगी। याद रखिए ऐसी सीमा रेखा नहीं बनाई जाएंगी तो आपको कई सारी उलझन वाली स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। 
झगड़ा आप दोनों का-
देखिए पति अगर ‘मम्मास बॉय’ हैं तो ये हो सकता है कि जब-जब आप दोनों के बीच झगड़ा हो, वो दौड़ कर अपनी मां के पास पहुंच जाएं। ये स्थिति भी आपके लिए सही नहीं होगी। इस स्थिति में भी आपको पहली बात तो घर पराया लगेगा, आप महसूस करेंगी कि यहां आपके लिए कोई है ही नहीं। दूसरा ये बिलकुल भी अच्छी बात नहीं है कि दिक्कत होने पर आप दोनों में ही कोई एक किसी और के पास अपना दुख ले कर जाए। पति-पत्नी को हमेशा ही अपने झगड़े खुद ही खत्म कर लेने चाहिए। इस तरह से बात आसानी से खत्म होती है वो भी बिना मामला आगे बढ़े। 
खुल कर बात करें-
खुल कर बात करना हमेशा ही एक अच्छा निर्णय होता है। सामने वाले को आपके दिल में क्या चल रहा है ये बात साफ-साफ पता चल जाती है। दिल की बात सामने होती है तो व्यू बनाना आसान होता है और सही-गलत भी खुलकर सामने आ जाता है। ये काम आपको अपने पति के साथ भी करना होगा। उन्हें बताना होगा कि बात-बात में मां के पास पहुंच जाना आपको पसंद नहीं है। मां का ख्याल रखना और हर जरूरत का ध्यान रखना जरूरी है लेकिन आपसी बातों को उनके सामने ले जाना और हर बार ऐसा करना गलत है। ये बात अगर आपको भी गलत लगती है तो पति से कहने में हिचकिए बिलकुल नहीं। शांत मन से जब आप अपने दिल की बात कहेंगी तो वो जरूर समझेंगे। नाराज नहीं होंगे। ठीक ऐसा ही आप अपनी सास के साथ भी कर सकती हैं। आपकी दिक्कत और दिल की बात उनको समझ जरूर आएगी। उन दोनों को ही ये बात समझ आनी चाहिए कि आप की सासू मां से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है बल्कि सिर्फ ये कुछ स्थितियां हैं, जिनमें सबकुछ सामान्य बनाए रखने के लिए समझदारी के साथ आगे बढ़ना जरूरी है। 
अपनी सोच-
कई बात देखा जाता है कि ‘मम्मास बॉय’ कहलाने वाले पुरुष हर काम मां से पूछ कर करते हैं। पूछने और निर्णय लेने का ये सिलसिला इस कदर बड़ा होता है कि पुरुष खुद से कोई भी निर्णय लेने से बचने लगते हैं। इससे उनके व्यक्तित्व पर गलत असर पड़ता है और उनको पता भी नहीं चलता। एक तरह से वो अपने निर्णय खुद लेने की स्थिति में कभी आ ही नहीं पाते हैं। लेकिन एक पार्टनर होने के नाते ये आपका काम है कि आप पति को खुद में छिपी प्रतिभा निखारने में मदद करें। उन्हें बताएं कि वो खुद भी अपने निर्णय ले सकते हैं। वो निर्णय सही भी होंगे और गलत भी लेकिन उनके खुद के होंगे। इसका फायदा उन्हें आगे आने वाले जीवन में जरूर होगा। अपने बच्चों के सामने भी पति की छवि ऐसे पिता की बनेगी, जो अपने निर्णय खुद लेता है और आत्मविश्वासी है। 
आपकी शादी-
पूरा परिवार एडजस्टमेंट से चलता है। ये काम सिर्फ आपको नहीं करना है बल्कि ये काम आपकी सास और पति को भी करना होगा। उन्हें समझना होगा कि पति की ‘मम्मास बॉय’ वाली छवि आपकी शादीशुदा जिंदगी को खराब कर सकती है। इसको भले ही न सुधारिए लेकिन शादी के बीच में इसको लाना पूरी तरह से गलत है। इस छवि को मां-बेटे के रिश्ते की खूबसूरती के तौर पर देखा जाना ही ठीक रहता है। ये उन दोनों के बीच का रिश्ता है, इसे वहीं रखा जाए तो अच्छा है। अपनी शादी बचाने के लिए आपको ये बात पति और सास से करनी ही होगी। ताकि वो एक रिश्ते के लिए दूसरे रिश्ते को बचाए रखने की कम से कम कोशिश तो करें।