छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर…ऐसी जगह है, जहां पहले पहल सिर्फ घूमने जाने का प्लान लोग नहीं बनाते हैं। वो तो नैनीताल, गोवा, मुंबई जैसी जगह घूमने जाते हैं मगर कुछ ऐसी जगहें हैं जहां लोग जाते कम हैं। लेकिन एक बार आने के बाद यहां की सुंदरता, हरियाली बार-बार अपनी ओर खींचती हैं। रायपुर भी एक ऐसी ही जगह है। इस शहर की सुंदरता ‘रॉ’ (Raw) कहलाती है। यानि ज़्यादातर जगह अपने नेचुरल रूप में ही हैं। इनको देखने का मतलब खुद को रिफ्रेश करने जैसा है। हो सकता है आप ही यहां आने का प्लान बना लें। जब प्लान बना लें और इस शहर में अगर एक दिन के लिए आना होता है तो आप कहां-कहां जाएंगे और कैसे अपना दिन बिताएंगे। चलिए हम बताए देते हैं, लेकिन याद रखिए जब तक जरूरी न हो तब तक घर से बाहर ना ही निकलें, सबकुछ नॉर्मल होने के बाद ही घूमने का प्लान बनाएं-
मेमोरियल में बनाए मेमोरी-

महंत घासीदास मेमोरियल म्यूजियम में आकर आप इतिहास में खो जाएंगे ये तो बात पक्की है। इस म्यूजियम का नाम राजनंदगांव के राजा महंत घासीदास के नाम पर रखा गया है। महंत घासीदास मेमोरियल म्यूजियम उन लोगों के लिए है जो आर्कोलॉजी में थोड़ी भी रुचि रखते हैं। ये देश के 10 सबसे पुराने म्यूजियम में से एक है। यहां पर आपको प्राचीन सिक्के, हथियार, कारविंग और स्काल्पचर भी मिलेंगे। साथ ही ऐसे सामान भी मिल जाएंगे जो कई सारे आदिवासी समुदायों ने इस्तेमाल किए थे जैसे बस्तर। यहां पर किताबों के शौकीनों के लिए भी बेहतरीन लाइब्रेरी भी है। यहां आकर हैरान होना तो तय है। 
विवेकानंद सरोवर-

रायपुर आने के बाद जो एक जगह आपको बिलकुल भी नहीं छोड़नी है, वो है विवेकानंद सरोवर। अगर आप कुछ घंटे शांति में बिताना चाहते हैं तो इस सरोवर में आकर आपको इसका बढ़िया डोज मिल जाएगा। माना जाता है कि यहां बनी झील के पास स्वामी विवेकानन्द कई दिन रहे थे और इसी के तट पर मेडिटेशन भी किया था। यहां पर विवेकानंद की बड़ी मूर्ति बनी है जो रायपुर की पहचान सी बन गई है। यहां पर आप सुबह 6 से 9 और दोपहर में 3 बजे से शाम के 8 बजे तक आ सकते हैं। 
नया रायपुर सेंट्रल पार्क-
न्यू रायपुर में बना ये पार्क रायपुर को टूरिस्ट फ्रेंडली प्लेस बनाने की ओर कदम भर है। ये पार्क एक बहुत ही बड़े एरिया में बना है और ये सिर्फ इतना ही भर नहीं है। बल्कि यहां पर बच्चों के लिए एक्टिविटी एरिया, जॉगिंग, योगा सेंटर और आर्टीफ़िशियल लेक भी बनी है। कैफे भी यहां पर है, जहां पर आप हैंगआउट के लिए आ सकते हैं।
नंदनवन जू-
जू वैसे तो कहीं का भी हो मजा ही आता है लेकिन यहां पर की गई सफारी आपको जरूर ही अलग अनुभव देगी। यहां आपको कई तरह के जानवर मिल जाएंगे। बाघ, घड़ियाल, हिरण आदि। यहां पर चार तरह की सफाई कराई जाती है। टाइगर सफारी, लायन सफारी, बियर सफारी और हरबिवोर सफारी। इतना ही नहीं सफारी के बाद यहां पर बोटिंग का मजा भी लिया जा सकता है। इस जू को अभी तक का सबसे बड़ा प्लानिंग के साथ बनाया गया जंगल माना जाता है। ये धीरे-धीरे सबकी पसंद भी बंता जा रहा है। ये जू सोमवार को बंद रहता है। 
दूधाधारी मोनेस्ट्री और मंदिर-
दूधाधारी मोनेस्ट्री और मंदिर, एक बहुत ही सुंदर जगह है, इसकी सुंदरता में चार चाँद लगाती है महाराजबंध रिवर, जो इसके साथ ही लगी हुई है। ये मंदिर भगवान राम का है और 17वीं शताब्दी में बनाया गया था। यहां पर बने म्यूरल्स आपका दिल जीत लेंगे और फिर यहां से नदी का नजारा भी आपको बहुत पसंद आएगा। यहां पर मौजूद मोनेस्ट्री स्वामी बालभद्र दास को समर्पित है। जो सिर्फ दूध ही पीते थे, खाना नहीं खाते थे। सुबह छह बजे से रात 9 बजे तक यहां आया जा सकता है। 
महामाया मंदिर-
ये 11 वीं शताब्दी में बना श्राइन है, जो कि खरून नदी के किनारे पर बना है। देवी दुर्गा को समर्पित है और नवरात्रि के समय यहां भक्तों की बहुत भीड़ लगती है। इस मंदिर में महाकाली, भद्राकाली, भगवान शिव, हनुमान और विष्णु की भी मूर्तियां हैं। इस जगह पर आकर आरती का अनुभव लेना आप कभी नहीं भूलेंगी। 

घटरानी वॉटरफॉल-
घटरानी वॉटरफॉल बहुत ही घने जंगलों के बीच बना है। ये एक रोमांचक जगह है। यहाँ के लोकल लोगों की बात मानें तो इस जगह आने का बेस्ट जगह सितंबर से दिसंबर के बीच का होता है। सिर्फ यहां आना ही नहीं बल्कि यहां आने का रास्ता भी आपको यादगार लगेगा। ये होगा अगर आप ट्रेकिंग करके घटरानी वॉटरफॉल तक आते हैं तो, मजा आएगा, ये बात पक्की है। यहां पर एक अनोखा मंदिर जटमाई भी है। यहां जरूर आएं और याद रखें कि यहां पर मैगी और फ्रूट चाट आदि के काउंटर हैं इसलिए आपको अपने साथ खाने का कुछ भी लाने की कोई जरूरत नहीं है। 

ट्रैवलसम्बन्धी यह आलेख आपको कैसा लगा?  à¤…पनी प्रतिक्रियाएं जरूर भेजें। प्रतिक्रियाओं के साथ ही प्रेगनेंसी से जुड़े सुझाव व लेख भी हमें ई-मेल करें- editor@grehlakshmi.com

 

ये भी पढ़ें-

इन आसान तरीकों से अपनी प्रेगनेंसी थकान को कहें बायबाय