दरअसल, आज हम आपको ऋषि ऋष्यश्रृंग की कथा बताने जा रहे हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होने बचपन से लेकर युवावस्था तक कोई स्त्री नहीं देखी थी और जब देखी तो वो घटना सनातन धर्म के  ऐतिहासिक पन्नों पर दर्ज हो गई। तो चलिए जानते हैं ऋष्यश्रृंग के बार में…
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ऋष्यश्रृंग महाज्ञानी और तपस्वी ऋषि कश्यप के पौत्र और विभांडक ऋषि के पुत्र थे। ऋष्यश्रृंग का जन्म ऋषि विभांडक और उर्वशी नाम की अप्सरा के संसर्ग से हुआ था। कथा के अनुसार एकबार ऋषि विभांडक कठोर तपस्या में लीन थे और उनकी उस घोर तपस्या को देख देवराज इंद्र विचलित हो गए उन्होने इस तपस्या को भंग करने के लिए स्वर्ग से उर्वशी नाम की अप्सरा को भेजा। उर्वशी अपने मंत्वय में सफल रही, उनकी सुंदरता के आगे ऋषि विभांडक नतमस्तक हो गए और फिर दोनो में संभोग हुआ जिसके परिणाम स्वरूप एक पुत्र हुआ जोकि ऋष्यश्रृंग थे।
लेकिन ऋष्यश्रृंग के जन्म के बाद ही उर्वशी उन्हे छोड़ स्वर्ग चली गई और उर्वशी के इस छलावे से ऋषि विभांडक इतना क्रोधित हुए कि उन्होने प्रण ले लिया कि वो अपने पुत्र ऋष्यश्रृंग पर किसी भी स्त्री की छाया पड़ने नहीं देंगे। इसक चलते ऋष्यश्रृंग ने अपने बचपन से लेकर युवावस्था तक किसी स्त्री को देखा ही नहीं।
वहीं उधर ऋषि विभांडक भी उर्वशी के छलावे से क्रोधित होकर तपस्या करने चले गए और उनके वर्षों के तप के चलते आसपास के राज्यों में अकाल पड़ गया । ऐसे में जब इसका पता चला उस नगर के राजा रोमपाद को पता चला तो उन्होने अपने मंत्रियों, ऋषि-मुनियों को बुला कर इस पर विमर्श किया तो ऋषियों ने कहा कि अगर ऋष्यश्रृंग का विवाह हो जाए तो विभांडक ऋषि को मजबूर होकर अपना क्रोध त्यागना पड़ेगा । ये सुनकर राजा रोमपाद ने ऋष्यश्रृंग को सम्मोहित करने के लिए कुछ खूबसूरत दासियों को उनके पास भेजा।
हालांकि ऋष्यश्रृंग को आकर्षित करने में उन दासियों को काफी समय लगा, पर आखिरकार वो दासिया सफल रही और उनके प्रयास स्वरूप ऋष्यश्रृंग उनके साथ उनके नगर जाने के लिए भी तैयार हो गए। ये बात जब विभांडक ऋषि को पता चला तो वो क्रोधित हुए और अपने पुत्र को ढूंढते हुए राजा के महल जा पहुंचे, वहां उनका क्रोध शांत करने के लिए राजा ने अपनी पुत्री का विवाह ऋष्यश्रृंग से कर दिया।
ऋष्यश्रृंग की ये कथा इतनी विख्यात हुई कि मान्यता है कि राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति को लिए जो अश्वमेध यज्ञ कराया था, उसमें यही कथा सुनाई गई थी। इसी अश्वमेध यज्ञ के परिणाम स्वरूप राजा दशरथ को घर में राम जन्मे थे।