Chaitra Purnima 2025: हिंदू पंचांग के मुताबिक हर महीने शुक्ल पक्ष की पहली तिथि को पूर्णिमा होती है और इस तरह से पूरे वर्ष में कुल 12 पूर्णिमा पड़ती है जिन्हें अलग-अलग नाम से जाना जाता है और सभी पूर्णिमा के अलग-अलग महत्व भी होते हैं। हालांकि पूर्णिमा के दिन स्नान, दान, पूजा, व्रत, सत्यनारायण पूजा आदि का विशेष महत्व होता है। लेकिन साल की पहली पूर्णिमा बहुत ही खास मानी जाती है। बता दें कि, हिंदू नववर्ष की शुरुआत 30 मार्च 2025 से हुई है। इसके बाद सबसे पहली पूर्णिमा चैत्र महीने में पड़ेगी। इसलिए चैत्र पूर्णिमा को हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा कहा जाता है, जिसका विशेष धार्मिक महत्व होता है। चैत्र पूर्णिमा के दिन ही हनुमान जयंती भी मनाई जाती है। साथ ही इसी दिन लोग चंद्र देव, सत्यनारायण भगवान, और मां लक्ष्मी का पूजन भी करते हैं।
चैत्र महीने में पड़ने वाली पूर्णिमा को ‘चैत्र पूर्णिमा’ के नाम से जाना जाता है। चैत्र जोकि संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है सूर्य का मेष राशि में उच्च स्थिति में होना और चंद्रमा का तुला राशि के नक्षत्र में चमकीले तारे क्षेत्र के साथ संरेखित होना। पूर्णिमा अभिव्यक्ति और सृजन के लिए एक शक्तिशाली अवधि होती है। आइए जानते हैं हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा यानी चैत्र पूर्णिमा कब है और इस दिन भाग्योदय के लिए क्या करना चाहिए।
चैत्र पूर्णिमा 2025 तिथि और मुहूर्त

चैत्र पूर्णिमा सोमवार 12 अप्रैल को है। दरअसल पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 12 अप्रैल सुबह 3 बजकर 21 मिनट पर होगी और इसका समापन 13 अप्रैल सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयातिथि के मुताबिक चैत्र पूर्णिमा का व्रत-पूजन 12 अप्रैल 2025 को किया जाएगा। इस दिन स्नान-दान के लिए सुबह 4 बजकर 29 मिनट से 5 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा आप अभिजित मुहूर्त में सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट में भी स्नान-दान कर सकते हैं। ये दोनों ही मुहूर्त स्नान-दान के लिए शुभ रहेंगे। चैत्र पूर्णिमा पर लोग पवित्र नदियों में भी स्नान करते हैं।
भाग्योदय के लिए चैत्र पूर्णिमा पर करें ये काम

- दान-पुण्य:- शुभ मुहूर्त में स्नान करने के बाद चैत्र पूर्णिमा पर दान-पुण्य का लाभ कमाएं। मान्यता है कि चैत्र पूर्णिमा पर किए दान का कई गुणा लाभ मिलता है। इस दिन जरूरतमंदों में वस्त्र, भोजन, जल से भरे घड़े, अन्न, गुड़, घी, फल आदि का दान कर सकते हैं।
- मां लक्ष्मी का मंत्र जाप:- पूर्णिमा तिथि पर मां लक्ष्मी की पूजा करने से देवी प्रसन्न होती हैं। इसलिए चैत्र पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा करें। साथ ही श्रीयंत्र घर पर स्थापित करें। कमलगट्टे की माला से ‘ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः’ मंत्र का जाप करने देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होगी।
- चंद्रमा की पूजा- चैत्र पूर्णिमा का चंद्र देव की पूजा जरूर करें। रात्रि मे चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को जल से अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय “ॐ सोम सोमाय नमः” का जाप करें। इससे मानसिक शांति और धन-संपत्ति का लाभ होगा। बता दें कि चैत्र पूर्णिमा पर 12 अप्रैल को शाम 6 बजकर 18 मिनट पर चंद्रोदय होगा।
- गाय को खिलाएं चारा:- चैत्र पूर्णिमा पर गाय को हरा चारा खिलाना बहुत शुभ होता है। ज्योतिष के अनुसार, इस दिन गाय को चारा और गुड़ खिलाने से जीवन में चल रही परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
