भगवान श्री गणेश के अलग-अलग नाम व अलग-अलग स्वरूप हैं, लेकिन वास्तु में गणेश जी का कितना महत्त्व है यह शायद कम ही लोगों को पता होगा। गणेश जी अपने आप में संपूर्ण वास्तु हैं। धर्मग्रंथों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि गणेश जी की स्थापना व पूजा पाठ विधि-विधान की जाये तो नौ ग्रहों का दोष से दूर हो जाता है। गणेश जी की मूषक हो या फिर उनका पहनावा या बात की जाए उनके प्रिय भोग मोदक उनके शरीर का हर हिस्सा किसी न ग्रह के दोष को दूर करता है। आइए जानते हैं गणेश पूजा से होने वाले लाभ के बारे में –
 
  • वेदों एवं पुराणों में ऐसा कहा गया है कि श्वेत गणपति की पूजा करनी चाहिए। इस बात की पुष्टि बहुत से विद्वान भी करते हैं। श्वेत गणपति की पूजा-आराधना करने से जीवन में भौतिक सुख एवं समृद्धि का प्रवाह होता है और यदि विधि-विधान से श्वेत गणपति की पूजा की जाए तो इससे शुक्र ग्रह का दोष भी दूर होता है।
  • अब बात गणेश जी की सवारी मूषक की। मूषक जासूसी व सूचनाएं एकत्र करने का प्रतीक है। मूषक के प्रभाव का भी हमारे जीवन में खासा महत्त्व है। ऐसा माना जाता है कि गणेश जी का मूषक भी हमारे जीवन को हितकारी व खुशहाल बनाने हेतु चमत्कारिक परिवर्तन ला सकता है। साथ ही राहु के दोष को दूर करता है, मूषक।
  • गणेश जी के हाथी जैसे मुख की अलग ही मान्यता है। गणेश का गजमुख बुद्धि का, अंकुश (नियन्त्रण) का, अराजकतत्त्वों पर लगाम लगाने का प्रतीक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि उनके मुख के इस रूप के कारण ही शनि का दोष भी आसानी से दूर हो जाता है। गणेश जी की पूजा करने से उनके हाथी जैसा मुख होने के कारण जीवन में धैर्य, एवं वीरता का समावेश होता है।
  • ऐसी मान्यता है कि गणेश जी के लंबे दांत जीवन में आने वाले केतु के प्रभाव को कम करते हैं। क्योंकि बड़े दांत ओजस्विता व वचनबद्धता का प्रतीक होते हैं। गणेश जी के बड़े दांत होने के कारण ही जीवन में आने वाले बड़े से बड़े संकट भी आसानी से दूर हो जाते हैं।
  • अगर बात उनके प्रिय भोग मोदक की करें तो ऐसा कहा जाता है कि गुड़ मिश्रित मोदक उन्हें बहुत प्रिय है। मोदक से गुरु की कृपा जीवन में आती है, क्योंकि गुड़ मिश्रित मोदक सूर्य और गुरु का प्रतीक होता है। सूर्य और गुरु का प्रभाव जीवन में ओजस्विता प्रदान करता है।
  • अत्यन्त सुन्दर, शुद्ध और पीताम्बर धारण किए हुए, आभूषणों से विभूषित, सुन्दरता जिनके मन का अपहरण नहीं कर सकती उन्हें गणेश कहते हैं। पीतांबर यानी पीला वस्त्र या पीला मोदक गुरु का प्रतीक होता है। गुरु की कृपा हमारे चित्त को आध्यात्मिक व पवित्रता से पूर्ण बनाए रखती है।
  • गणेश जी को आक के फूल बहुत प्रिय हैं। आक का फूल चंद्रमा का प्रतीक होता है। चंद्रमा का प्रभाव मानवीय जीवन में सौम्यता, शीतलता प्रदान करता है। चंद्रमा के प्रभाव से मानसिक रोग भी आसानी से दूर हो जाते हैं।डिप्रेशन के रोगी के लिए भी चंद्रमा का प्रभाव काफी हितकारी साबित होता है।
  • जामुन भी गणेश जी को बहुत प्रिय है। जामुन में राहु और शनि का मिश्रित रूप होता है। जिसका प्रभाव सीधा-सीधा चर्म रोगों एवं मधुमेह जैसे जटिल रोगों पर ज्यादा आसानी से महसूस किया जा सकता है। यानी जामुन के आध्यात्मिक प्रभाव के कारण ऐसे रोगी तुरंत ही ठीक हो जाते हैं।
  • गणेश जी को पूजा में दूर्वा घास चढ़ायी जाती है। दूर्वा घास बुद्ध का प्रतीक होती है। जोकि विद्या एवं बुद्धि की प्रदाता होती है। इससे व्यापार एवं संचार में बढ़ोत्तरी सकी संभावनाएं बढ़ती हैं। हरियाली गणेश जी को ज्यादा पसंद है।
  • गणेश लम्बोदर हैं यानी अपने पेट की बातों को पेट में रखते और सार तत्त्वों को ग्रहण करते हैं। उनके कान बड़े-बड़े हैं जो सबकी सुनते हैं, किन्तु कार्य अपने ही विवेक से करते हैं। गणेश जी को विधि-विधान से घर में स्थापित करने व पूजापाठ करने से हमारे अंदर भी उपरोक्त सभी गुणों का प्रवाह होता है, जिसका प्रभाव दूरदर्शी समाजपरक होता है।
 
 
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